RSS के स्‍कूलों में पिछले तीन साल में 30 फीसदी बढ़े मुस्लिम स्‍टूडेंट्स, वेद मंत्र और धार्मिक ग्रंथों का करते हैं पाठ
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RSS के स्‍कूलों में पिछले तीन साल में 30 फीसदी बढ़े मुस्लिम स्‍टूडेंट्स, वेद मंत्र और धार्मिक ग्रंथों का करते हैं पाठ
आरएसएस से मुस्लिमों के रिश्ते हुए पहले से बेहतर.

भले ही देश की तमाम राजनीतिक पार्टियां आरएसएस (RSS) पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाती हों, लेकिन आरएसएस से मुस्लिमों के रिश्ते पहले बेहतर हो रहे हैं. यही वजह है कि पिछले तीन साल में आरएसएस के स्कूलों में मुस्लिम स्टूडेंट्स (Muslim Students) की संख्‍या में 30 फीसदी का इजाफा हुआ है.

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प्रयागराज. देश में कांग्रेस, वामदलों समेत दूसरी विपक्षी पार्टियां भले ही आरएसएस (RSS) पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप लगाकर उसे बदनाम करने की मुहिम में लगी रहती हों, लेकिन आरएसएस से मुस्लिमों के रिश्ते पहले बेहतर हो रहे हैं. ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि आरएसएस और मुस्लिमों के बीच बेहतर संबंधों को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं. केंद्र में नरेंद्र मोदी और उत्‍तर प्रदेश में योगी आदित्‍यनाथ की अगुवाई में बीजेपी की सरकार बनने के बाद आरएसएस के स्कूलों में मुस्लिम स्टूडेंट्स (Muslim Students) की संख्या लगातार बढ़ रही है. जबकि बीते तीन सालों की बात करें तो आरएसएस की एजुकेशन विंग विद्या भारती की ओर से पूर्वी उत्तर प्रदेश में संचालित होने वाले एक हजार से ज्‍यादा विद्यालयों में मुस्लिम स्टूडेंट्स की संख्या में तकरीबन तीस फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है.

आरएसएस ने कही ये बात
तीन साल में तीस फीसदी मुस्लिम स्टूडेंट्स की बढ़ोत्तरी को लेकर लोगों के अपने अलग-अलग दावे हैं. कोई इसे मुस्लिम समाज की शिक्षा के प्रति बढ़ी जागरुकता के रूप में देख रहा है तो कोई आरएसएस की संस्कार वाली शिक्षा के प्रति झुकाव मान रहा है, तो कोई संघ की कट्टरवादी छवि के बजाय उसकी राष्ट्रवादी सोच के प्रचार-प्रसार को बदलाव को ही बड़ी वजह मान रहा है. हालांकि यह सच्चाई है कि आरएसएस के स्कूलों में बीते तीन सालों में तीस फीसदी मुस्लिम छात्रों की तादात बढ़ी है. विद्या भारती के पूर्वी उत्तर प्रदेश क्षेत्र में 49 जिले आते हैं और इनमें संघ के 1194 स्कूल संचालित होते हैं. तीन साल पहले इन स्कूलों में महज 6890 मुस्लिम बच्चे पढ़ाई करते थे, लेकिन आज की तारीख में यहां नौ हजार से अधिक (9037) मुस्लिम बच्चे तालीम हासिल कर रहे हैं. वैसे संघ द्वारा चलने वाले ज्‍यादातर स्कूल ग्रामीण क्षेत्रों में हैं.

मुस्लिम स्टूडेंट्स भी वेद मंत्र और धार्मिक ग्रंथों का करते हैं पाठ



मुस्लिम स्टूडेंट्स भी संघ के इन स्कूलों में बाकी बच्चों के साथ ही पढ़ते हैं. उनके साथ भोजन व प्रार्थना करते हैं. वेद मन्त्रों का जाप और धार्मिक ग्रंथों का पाठ करते हैं. मुस्लिम बच्चे यहां सूर्य नमस्कार भी करते हैं और दूसरे बच्चों के साथ घुल मिलकर रहते हैं. इस बारे में विद्या भारती के प्रदेश निरीक्षक राम जी सिंह का कहना है कि इसके लिए संघ या विद्या भारती ने कोई अलग प्रयास नहीं किया बल्कि बढ़े हुए बच्चों के परिवार वाले उन्हें लेकर खुद स्कूलों तक आते हैं. उनके मुताबिक पिछले कुछ समय में मुस्लिम समुदाय में अपने बच्चों को क्वालिटी एजूकेशन और संस्कार वाली शिक्षा दिलाने को लेकर काफी जागरुकता आई है. इसी वजह से वह अपने बच्चों को संघ के स्कूलों में भेज रहे हैं. उनके मुताबिक इस दौरान संघ के मुस्लिम विरोधी होने और इसके स्कूलों में भेदभाव के बेबुनियाद आरोपों की हकीकत को भी मुस्लिम समाज समझ चुका है. यही वजह है कि मुस्लिम बच्चे-बच्चियां उनके स्कूलों में टॉप कर रहे हैं और खेलों व दूसरी गतिविधियों में भी मेडल जीत रहे हैं.



भाजपा भी है उत्साहित
प्रयागराज के भाजपा नेता पवन श्रीवास्तव का कहना है कि विपक्षी पार्टियों ने संघ को लेकर जो भ्रम फैलाया था, उसकी सच्चाई अब मुस्लिम समाज जान चुका है. आरएसएस के विद्यालय जहां देश के लिए अच्छे नागरिक का निर्माण करते हैं, वहीं शिक्षा के साथ ही बच्चों को संस्कार भी देते हैं. इन स्कूलों में जाति और धर्म के आधार पर कोई भेदभाव भी नहीं किया जाता है. यही वजह है कि मुस्लिम समाज भी अपने बच्चों को राष्ट्रवाद की शिक्षा देने के लिए संघ के स्कूलों में भेजने से नहीं हिचक रहा है. यहां पर आकर मुस्लिम बच्चे भी दूसरे बच्चों की ही तरह बेहिचक भारत माता की जय, भोजन मंत्र और राष्ट्र गान गाते हैं.

 

बदलाव की है बड़ी शुरुआत
आरएसएस के स्कूलों में मुस्लिम स्टूडेंट्स की संख्या बढ़ने के आंकड़े भले ही चौंकाने वाले हों, लेकिन यह आंकड़े अब भी बेहद कम नजर आ रहे हैं. संघ के स्कूलों में अब भी औसतन सात से आठ मुस्लिम बच्चे ही पढ़ रहे हैं. हांलाकि भले ही यह संख्या बेहद कम है, लेकिन मुस्लिम समुदाय और आरएसएस के पहले के रिश्तों और आज के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो यह किसी बड़े बदलाव की ओर इशारा जरूर करते हैं.

 

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