महामंडलेश्वर बनीं साध्वी प्रज्ञा ने 9 साल तक जेल में सही थीं यातनाएं

9 साल जेल में यातनाएं सहने वाली प्रज्ञा ठाकुर का नाम मालेगांव बम ब्लास्ट में आने के बाद सुर्खियों में आया.

News18 Uttar Pradesh
Updated: February 20, 2019, 9:46 AM IST
महामंडलेश्वर बनीं साध्वी प्रज्ञा ने 9 साल तक जेल में सही थीं यातनाएं
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Updated: February 20, 2019, 9:46 AM IST
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को प्रयागराज कुंभ के दौरान भारत भक्ति अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर बनाया गया है. प्रज्ञा ठाकुर अब आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी पूर्णचेतनानंद गिरी के नाम से जानी जाएंगी. मंगलवार को कुंभ मेले में दिव्य प्रेम सेवा मिशन के शिविर में प्रज्ञा ठाकुर का पट्टाभिषेक संपन्न हुआ.

9 साल जेल में यातनाएं सहने वाली प्रज्ञा ठाकुर का नाम मालेगांव बम ब्लास्ट में आने के बाद सुर्खियों में आया. प्रज्ञा ठाकुर का आरोप है कि जेल में रहने के दौरान एटीएस ने तरह-तरह से प्रताड़ित किया. एक न्यूज चैनल को दिए इंटरव्यू में साध्वी ने आरोप लगाया कि कभी उन्हें अंडा खाने के लिए मजबूर किया जाता तो कभी बेल्ट से पूरी रात उनकी पिटाई होती थी.



क्या था मालेगांव ब्लास्ट केस
मालेगांव में ब्लास्ट
29 सितंबर 2008 में हुआ था. ब्लास्ट के लिए बम को मोटर साइकिल में लगाया गया था. इस ब्लास्ट में आठ लोग मारे गए थे और 80 से अधिक लोग घायल हुए थे. प्रारंभ में घटना की जांच महाराष्ट्र पुलिस की एटीएस ने की थी. बाद में मामला जांच के लिए एनआईए को सौंप दिया गया. एनआईए ने अपनी जांच में यह पाया कि घटना की साजिश अप्रैल 2008 में भोपाल में रची गई थी.



प्रज्ञा ठाकुर की गिरफ्तारी भी एटीएस ने की थी. गिरफ्तारी का आधार ब्लास्ट में उपयोग की गई मोटर साईकिल थी. यह मोटर साईकिल प्रज्ञा ठाकुर के नाम रजिस्टर्ड थी. प्रज्ञा ठाकुर लगभग नौ साल से जेल में हैं. मध्यप्रदेश के ही देवास में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक सुनील जोशी की हत्या में भी प्रज्ञा ठाकुर का नाम जोड़ा गया. प्रज्ञा ठाकुर इस मामले में बयान देने के लिए जब मुंबई से देवास लाई गईं थीं, तब उनकी हालत बेहद खराब थी. जज को उनके बयान उसी एंबुलेंस के पास जाकर लेना पड़े, जिससे वे कोर्ट लाई गईं थीं.

सबूत ना मिलने पर एनआईए ने दिया क्लीन चिटसाध्वी प्रज्ञा ठाकुर के प्रति एनआईए के रवैये में बदलाव केंद्र में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद आया. इससे पहले यूपीए की सरकार ने इस मामले को भगवा आतंकवाद का चोला पहना दिया था. एनआईए ने अपनी जांच के बाद 13 मई 2016 को दूसरी सप्लिमेंट्री चार्जशीट में मामले में मकोका लगाने का आधार नहीं होने की बात कह कर साध्वी प्रज्ञा ठाकुर सहित 6 लोगों के खिलाफ मुकदमा चलने लायक सबूत नहीं होने का दावा किया था.

जबकि कर्नल प्रसाद पुरोहित सहित 10 लोगों के खिलाफ धमाके की साजिश, हत्या, हत्या की कोशिश, आर्म्स एक्ट, एक्सप्लोसिव एक्ट और यूएपीए के तहत मुकदमा चलाने लायक सबूत होने का दावा किया था. ट्रायल कोर्ट एनआईए की राय से सहमत नहीं दिखी, जिसके बाद साध्वी प्रज्ञा ठाकुर और कर्नल पुरोहित ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जमानत अर्जी दी थी.



हाईकोर्ट में भी जांच एजेंसी एनआईए ने साध्वी की अर्जी पर कोई आपत्ति नहीं दिखाई, लेकिन कर्नल पुरोहित की अर्जी का विरोध किया. अदालत ने साध्वी को जमानत दे दी और कर्नल पुरोहित की याचिका नामंजूर कर दी. अदालत में सुनवाई के दौरान साजिश की मीटिंग की सीडी भी टूटी पाई गई, जिसमें साध्वी के होने का दावा किया गया था

भड़काऊ भाषणों के लिए सुर्खियों में रहीं है प्रज्ञा ठाकुर
प्रज्ञा ठाकुर मध्य प्रदेश के चंबल इलाके में स्थित भिंड जिले में पली बढ़ीं. वो राजावत राजपूत हैं. उनके पिता आरएसएस के स्वयंसेवक और पेशे से आयुर्वेदिक डॉक्टर थे.  इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएट प्रज्ञा हमेशा से ही दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़ी रहीं. वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सक्रिय सदस्य थीं और विश्व हिन्दू परिषद की महिला विंग दुर्गा वाहिनी से जुड़ी थीं.

वो कई बार अपने भड़काऊ भाषणों के लिए सुर्खियों में रहीं. 2002 में उन्होंने जय वंदे मातरम जन कल्याण समिति बनाई. स्वामी अवधेशानंद गिरि के संपर्क में आने के बाद प्रज्ञा नए अवतार में नजर आईं. अवधेशानंद का राजीनितिक गलियारे में खासा प्रभाव था. इसके बाद उन्होंने एक राष्ट्रीय जागरण मंच बनाया और इस दौरान वह एमपी और गुजरात के एक शहर से दूसरे शहर जाती रहीं.



साध्वी का भाषण ऐसा होता था कि वह सभी को बांधे रखती थी. शुरुआत में उनके भाषण का असर भोपाल, देवास, इंदौर व जबलपुर तक ही सीमित रहा. बाद में अचानक उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छोड़ दिया और वह साध्वी बन गई. गांव-गांव जाकर हिन्दुत्व का प्रचार करने लगी. उन्होंने अपनी कार्यस्थली सूरत को बनाया और वहीं पर एक आश्रम भी बनवाया. हिन्दुत्व के प्रचार के कारण वह बीजेपी के नेताओं को प्रभावित करने लगी और राजनीति में उनका वर्चस्व बढ़ता गया.

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