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चिन्मयानंद केस: SIT ने सीलबंद लिफाफे में पेश की प्रोग्रेस रिपोर्ट

News18 Uttar Pradesh
Updated: October 22, 2019, 7:03 PM IST
चिन्मयानंद केस: SIT ने सीलबंद लिफाफे में पेश की प्रोग्रेस रिपोर्ट
SIT ने सीलबंद लिफाफे में पेश की प्रोग्रेस रिपोर्ट

एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि चार हफ्ते के बाद वीडियो क्लिप के आवाज की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने की संभावना है. जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. एसआईटी की प्रोग्रेस रिपोर्ट में पूरा फोकस चिन्मयानंद से रंगदारी मांगने वाले आरोपियों और पीड़िता के सम्बन्धों को लेकर था.

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प्रयागराज. पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद (Chinmayanand) पर एलएलएम की छात्रा (LLM Student) से दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न (Rape and Sexuals Harassment Case) के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) की डिवीजन बेंच मंगलवार को सुनवाई हुई. मामले की जांच कर रही एसआईटी (SIT) ने सीलबंद लिफाफे में प्रोग्रेस रिपोर्ट अदालत में पेश की. एसआईटी की ओर से एडीशनल एसपी अतुल श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि वीडियो क्लिप की फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट अभी नहीं आयी है.

एसआईटी ने कोर्ट को बताया कि चार हफ्ते के बाद वीडियो क्लिप के आवाज की फॉरेंसिक रिपोर्ट आने की संभावना है. जिसके बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. एसआईटी की प्रोग्रेस रिपोर्ट में पूरा फोकस चिन्मयानंद से रंगदारी मांगने वाले आरोपियों और पीड़िता के सम्बन्धों को लेकर था. इसके लिए एसआईटी ने कोर्ट में वीडियो क्लिप से तैयार फोटोग्राफ भी पेश किए. कोर्ट ने एसआईटी की प्रोग्रेस रिपोर्ट देखने के बाद अगली सुनवाई की तिथि 28 नवबंर को फिर से जांच की प्रोग्रेस रिपोर्ट मांगी है. मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट में पीड़िता की ओर से मिसलेनियस एप्लीकेशन भी दाखिल की गई.

पीड़िता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रवि किरण जैन ने बहस की. उन्होंने कोर्ट को बताया कि चिन्मयानंद के खिलाफ पीड़िता की ओर से 5 सितंबर को नई दिल्ली के लोधी थाने में शिकायत की गई है. उन्होंने अदालत से उस मामले की अलग से जांच की मांग की. हालांकि एसआईटी उस मामले की भी जांच कर रही है.

कोर्ट ने राज्य सरकार से इस अर्जी पर भी जवाब मांगा है. सरकार की ओर से जीए एसके पाल और एजीए प्रथम एके सिंह ने पक्ष रखा. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच एसआईटी जांच की मानीटरिंग कर रही है. मामले की सुनवाई जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस पंकज भाटिया की खंडपीठ कर रही है. हम आपको बता दें कि निचली अदालत से स्वामी चिन्मयानंद और पीड़िता दोनों की जमानत भी खारिज हो चुकी है.

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First published: October 22, 2019, 7:03 PM IST
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