पृथ्वी के जलमग्न होने के बाद भी नहीं डूबता है अक्षय वट, अकबर ने किले में कराया था बंद

पुराणों के मुताबिक, प्रलय के बाद जब पूरी पृथ्व जलमग्न हो जाती है तब भी यह वृक्ष नहीं डूबता है. वृक्ष के एक पत्ते पर ईश्वर बालरूप में विद्यमान रहकर सृष्टि के अनादि रहस्य का अवलोकन करते हैं.

News18Hindi
Updated: January 10, 2019, 3:10 AM IST
पृथ्वी के जलमग्न होने के बाद भी नहीं डूबता है अक्षय वट, अकबर ने किले में कराया था बंद
अक्षयवट वृक्ष
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Updated: January 10, 2019, 3:10 AM IST
तीर्थराज प्रयाग में अक्षयवट का प्रवेश द्वारा श्रद्धालुओं के दर्शन और पूजा के लिए गुरुवार से खोल दिया जाएगा. कुंभ में अक्षय वट के दर्शन के बिना स्नान और पूजा अधूरी मानी जाती है. कई दशकों से यह अक्षयवट किले में सेना की सुरक्षा में था. लेकिन इस बार कुंभ में स्नान के बाद श्रद्धालु अक्षय वट के दर्शन कर सकेंगे. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मूल अक्षयवट दर्शन का श्रीगणेश करने के साथ परिक्रमा करेंगे.

अकबर ने कराया था बंद

मुगल सम्राट अकबर ने अक्षय वट को किले में बंद करवा दिया था. बताया जाता है कि अक्षय वट वृक्ष के पास कामकूप नाम का तालाब था. मोक्ष प्राप्ति के लिए लोग यहां आते थे और वृक्ष पर चढ़कर तालाब में छलांग लगा देते थे. अकबर को जब इस बारे में पता चला, तो उन्होंने पेड़ को किले के अंदर कैद करवा दिया और तालाब को बंद करवा दिया. ऐसा भी कहा जाता है कि अकबर के सैनिकों ने वृक्ष को जलाने और काटने की कोशिश की, लेकिन वे सफल नहीं हो पाए.

कभी नहीं डूबने वाले वृक्ष है अक्षय वट

इस वृक्ष का वर्णन पुराणों में भी बताया जाता है. पुराणों के मुताबिक, प्रलय के बाद जब पूरी पृथ्वी जलमग्न हो जाती है तब भी यह वृक्ष नहीं डूबता है. वृक्ष के एक पत्ते पर ईश्वर बालरूप में विद्यमान रहकर सृष्टि के अनादि रहस्य का अवलोकन करते हैं. ऐसी भी मान्यता है कि अक्षय वट वृक्ष के नीचे से ही अदृश्य सरस्वती नदी बहती है.

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