ये हैं सेंट्रल यूनिवर्सिटी के हरियाली गुरु जो अकेले लगा चुके हैं 1 लाख से अधिक पौधे

इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (Allahabad Central University) में बॉटनी विभाग (Botany Department) के एक प्रोफेसर पिछले 15 सालों से धरती को हरा-भरा बनाने की मुहिम में जुटे हैं. वे अब तक 1 लाख से अधिक पौधे लगा चुके हैं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 12, 2019, 9:30 PM IST
ये हैं सेंट्रल यूनिवर्सिटी के हरियाली गुरु जो अकेले लगा चुके हैं 1 लाख से अधिक पौधे
ये हैं सेंट्रल यूनिवर्सिटी के हरियाली गुरु जो अकेले लगा चुके हैं 1 लाख से अधिक पौधे. (फाइल फोटो)
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Updated: August 12, 2019, 9:30 PM IST
प्रदेश की योगी सरकार जहां प्रदेश को हरा-भरा बनाने के अभियान में शिद्दत से जुटी है और प्रदेश में एक दिन में 22 करोड़ पौधे लगाने का वर्ल्ड रिकार्ड भी प्रदेश सरकार ने बना लिया है. वहीं इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी (Allahabad Central University) में बॉटनी विभाग (Botany Department) के एक प्रोफेसर पिछले 15 सालों से धरती को हरा-भरा बनाने की मुहिम में जुटे हैं. इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से हर माह अच्छी सैलरी पाने वाले प्रोफेसर यूनिवर्सिटी के उद्यान विभाग के प्रभारी हैं. वे लक्जरी कारों के बजाय साइकिल से ही यूनिवर्सिटी आते-जाते हैं. धरती को हरा-भरा करने के उनके शौक और प्रकृति प्रेम के चलते ही लोग उन्हें हरियाली गुरू के रुप में जानते हैं. प्रोफेसर जहां यूनिवर्सिटी कैम्पस से लेकर शहर में अब तक एक लाख से ज्यादा पौधे लगा चुके हैं.

आवास के पिछले हिस्से में बनाई है नर्सरी
मौजूदा दौर में एक ओर जहां लोग भौतिक सुख-सुविधाओं की ओर तेजी से भाग रहे हैं. वहीं इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में बॉटनी विभाग के प्रोफेसर डॉ. एन. बी. सिंह ने प्रयागराज को हरा भरा बनाने को अपनी जिंदगी का मकसद बना लिया है. प्रोफेसर एन. बी. सिंह वर्ष 2004 से प्रयागराज में पौधे लगा रहे हैं. वे बंजर और कंक्रीट की धरती को अपने हाथों से हरियाली में बदलने में लगे हैं. इस काम के लिए प्रोफेसर साहब ने अपने सरकारी आवास के पिछले हिस्से में एक नर्सरी भी बनायी है, जिसमें वे खुद पौधे तैयार करते हैं. उनकी नर्सरी में औषधीय पौधों से लेकर कई तरह के सजावटी पौधे भी मौजूद हैं.

धरती को हरा-भरा करने के लिए ही खर्च कर देते हैं अपनी आधी सैलरी

वहीं वे यूनिवर्सिटी में आने वाले कई वीवीआईपी मेहमानों को अपने हाथों से पौधे भेंट कर चुके हैं. यही नहीं हरियाली का शौक रखने वाले प्रोफेसर साहब अपनी आधी सैलरी भी धरती को हरा-भरा करने के लिए ही खर्च कर देते हैं. उनके इसी शौक और जूनून के चलते लोग अब उन्हें हरियाली गुरु या ‘ग्रीन मैन’ के नाम से पुकारते हैं.

लोगों को खुद ले जाकर देते हैं अपनी नर्सरी के पौधे
वहीं प्रोफेसर एन. बी. सिंह के साथी प्रोफेसर भी प्रकृति और पर्यावरण के प्रति उनके लगाव और समर्पण को देखकर बेहद उत्साहित रहते हैं. साथी प्रोफेसर डॉ. राहुल पटेल बताते हैं कि वे लगातार छात्रों और साथी प्रोफेसरों को पौधे लगाने के लिए प्रेरित करते रहते हैं. इसके साथ ही वे लोगों को, अपने बच्चों और प्रियजनों के जन्म दिन के अवसर पर एक पौधा लगाने के लिए जरूर प्रेरित करते हैं. इसके लिए कई बार प्रोफेसर साहब अपनी नर्सरी के पौधे खुद ले जाकर लोगों को देते भी हैं.
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साइकिल को राष्ट्रीय सवारी घोषित किए जाने की मांग
देखने में बेहद साधारण से दिखने वाले प्रोफेसर एन. बी. सिंह की सैलरी डेढ़ लाख रुपये से अधिक है, लेकिन वे लक्जरी कार के बजाय साइकिल से ही कैम्पस आते और जाते हैं. उनका मानना है कि अगर प्रयागराज शहर का हर आदमी एक दिन के लिए ही साइकिल चलाए तो प्रदूषण को काफी कम किया जा सकता है. इसके साथ ही मार्निंग और इवनिंग वॉक की भी लोगों को जरूरत नहीं पड़ेगी. उन्होंने सरकार से साइकिल को राष्ट्रीय सवारी घोषित किए जाने की भी मांग की है. उनका मानना है कि साइकिल चलाने से न केवल पर्यावरण और पेट्रोल बचेगा, बल्कि इससे लोग स्वस्थ्य भी रहेंगे.

रिपोर्ट - सर्वेश कुमार दुबे

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First published: August 12, 2019, 9:26 PM IST
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