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द्रविड़ शैली पर आधारित प्रयागराज का यह मंदिर करता है लोगो को आर्कषित

द्रविड़ शैली पर आधारित प्रयागराज का यह मंदिर करता है लोगो को आर्कषित

प्रयागराज

प्रयागराज स्थित शंकर विमान मण्डपम मंदिर

उत्तर भारत में स्थित दक्षिण भारत को जोड़ता, संगम तट के किनारे स्थित शंकर विमान मंडपम लोगों के लिए प्रमुख आकर्षक का केंद्र है.प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर द्रविड़ शैली पर आधारित 133 फीट ऊंची एक हिंदू मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है. यह मंदिर कांचीकामकोटि पीठ की पहल में बनाई गई.

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    भारत विविधताओं का देश है.प्रत्येक प्रदेश की अपनी अलग पहचान, पहनावा ,भाषा, व्यंजनों और शैली है. उत्तर भारत की अपनी अलग पहचान है तो दक्षिण भारत की अपनी अलग छाप. ऐसे में अगर उत्तर भारत में हमे दक्षिण की कोई झलक मिलने लगे तो हम उत्साहित हो जाते हैं, उसकी तरफ आकर्षित हो जाते हैं.आपको बता दें कि ऐसे ही एक एहसास को जन्म देती है , प्रयागराज में स्थित ‘श्री आदि शंकर विमान मंडपम’. प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर द्रविड़ शैली पर आधारित 133 फीट ऊंची एक हिंदू मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है. यह मंदिर कांचीकामकोटि पीठ की पहल में बनाई गई और आज भी मंदिर की देखरेख की जिम्मेदारी इसी के पास है. मंदिर के दूसरे तथा तीसरे तल से त्रिवेणी संगम का नजारा अद्भुत नजर आता है, जिसे देखने लोग सुबह-शाम पहुंचते हैं.

    <b>तीन तल का है यह मंदिर</b>
    मंदिर तीन तल में है. पहले तल पर कांची कामकोटी पीठ की आराध्य कामाक्षी देवी की मूर्ति 51 शक्तिपीठों के साथ विराजमान है. दूसरे तल पर भगवान विष्णु के बालाजी स्वरूप 108 शालिग्राम के साथ स्थित हैं और तीसरे तथा सबसे ऊपरी तल पर भगवान शिव का स्थान है . मंदिर के प्रत्येक तल पर मुख्य मूर्तियों के कक्ष के बाहर काले रंग के द्वारपाल की मूर्तियां लगी हैं,जिसमें तमिल तथा हिंदी दोनों भाषाओं में श्री द्वारपाल लिखा है क्योंकि ऐसी मान्यता है कि हम मंदिर की रक्षा करते हैं. मंदिर की दीवारों तथा छतो पर उकेरी गई मूर्तियां रामायण तथा शिव की कहानियों को बयां करती है.

    <b>इसलिए कहते हैं शंकर विमान मंडपम</b>
    द्रविड़ संस्कृति में मंडपम, मंदिर का प्रवेश द्वार होता है जो कि खंभों पर टिका होता है. जैसे यह मंदिर 16 खंभों पर टिकी है.मंदिर का गुंबद ‘विमान’ कहलाता है जिसे सीढ़ी दार पिरामिड की तरह बनाया जाता है जो ऊपर की ओर ज्यामिति रूप से उठा होता है . मंदिर की बनावट इसका स्पष्टीकरण दे रही है. क्योंकि यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है इसलिए यह ‘शंकर विमान मंडपम’ कहलाती है.

    <b>यह है मंदिर का इतिहास</b>
    अगर बात करें मंदिर के इतिहास की तो ऐसे कांची कामकोटी पीठ के 69वें पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने अपने गुरु चंद्रशेखर सरस्वती की इच्छा पूर्ति हेतु बनवाया. दरअसल चंद्रशेखर सरस्वती जब 1934 में प्रयागराज आए तो उन्होंने बांध के पास दो पीपल के वृक्ष के बीच खाली जगह देखी और अपने धर्मज्ञान तथा आध्यात्म की शक्ति से यह सिद्ध किया. इसी स्थान पर आदि शंकराचार्य और कुमारिल भट्ट के बीच संवाद भी हुआ था.
    यह मंदिर भक्तों के लिए सुबह 7:00 बजे से 1:00 बजे तक और शाम को 4:00 से 7:30 बजे तक खुला रहता है.
    <b>(रिपोर्ट-प्राची शर्मा)</b>

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