यूपी में 17 OBC जातियों को SC में शामिल करने पर होगी हाईकोर्ट में सुनवाई

उधर विधि और संविधान विशेषज्ञों की राय है कि कोर्ट में सरकार का यह फैसला ख़ारिज हो जाएगा. ऐसा पहले की सरकारों ने भी किया था, लेकिन कोर्ट से इसकी अनुमति नहीं मिली थी.

News18 Uttar Pradesh
Updated: July 12, 2019, 11:44 AM IST
यूपी में 17 OBC जातियों को SC में शामिल करने पर होगी हाईकोर्ट में सुनवाई
17 OBC जातियों को आरक्षण
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Updated: July 12, 2019, 11:44 AM IST
योगी सरकार द्वारा 17 ओबीसी जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल किए जाने के फैसले पर शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होगी. इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पंकज भाटिया की बेंच करेगी. दरअसल योगी सरकार के इस फैसले को असंवैधानिक बताते हुए अधिवक्ता राकेश गुप्ता ने हाईकोर्ट में सुनवाई की मांग की है. अधिवक्ता ने मांग की थी कि इस मामले में याचिका लंबित है, इसीलिए इस पर सुनवाई की जानी चाहिए.

'वेट एंड वाच' की नीति पर सरकार

उधर सरकार ने अपने इस फैसले पर फ़िलहाल 'वेट एंड वाच' की नीति पर चलने का फैसला किया है. सरकार ने तय किया है कि कोर्ट के फैसले को देखकर ही केंद्र सरकार को इन जातियों को अनुसूचित जाति में शामिल करने का प्रस्ताव भेजने या न भेजने का निर्णय लिया जाए.

गौरतलब है कि योगी सरकार के इस फैसले को राज्य सभा में केंद्रीय सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद्र गहलोत ने असंवैधानिक बताया था. और कहा था कि यह अधिकार राज्य सरकार के पास नहीं है. इसके लिए संसद से मंजूरी जरूरी है. सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार से भी योगी सरकार को कोर्ट के फैसले का इन्तजार करने और उसके बाद प्रस्ताव भेजने की बात कही गई है.

विशेषज्ञों की राय कोर्ट में ख़ारिज हो जाएगा फैसला

उधर विधि और संविधान विशेषज्ञों की राय है कि कोर्ट में सरकार का यह फैसला ख़ारिज हो जाएगा. ऐसा पहले की सरकारों ने भी किया था, लेकिन कोर्ट से इसकी अनुमति नहीं मिली थी. 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी 17 पिछड़ी जातियों को एससी का दर्जा दिया था, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी. विसेश्ग्यों का मानना है कि यह फैसला तभी लागू हो सकता है जब संसद के दोनों सदनों से पास होकर राष्ट्रपति से मंजूरी मिले.

इन जातियों को मिलेगा फायदा?
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बता दें कि बीते दो दशक से 17 अति पिछड़ी जातियों- कहार, कश्यप, केवट, मल्लाह, निषाद, कुम्हार, प्रजापति, धीवर, बिंद, भर, राजभर, धीमर, बाथम, तुरहा, गोडिया, मांझी और मछुआ को अनुसूचित जाति में शामिल करने की कोशिशें जारी हैं. सपा और बसपा सरकार में इसे चुनावी फायदे के लिए अनुसूचित जाति में शामिल तो किया गया पर उनका यह फैसला परवान नहीं चढ़ पाया.

(रिपोर्ट: सर्वेश दूबे)

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First published: July 12, 2019, 11:44 AM IST
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