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UP Board Results 2019: इस बार भी 'फील गुड' देगा परिणाम, मिलेगा बदले नियमों का फायदा

फाइल फोटो
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दरअसल, यूपी बोर्ड के रिजल्ट की तारीख करीब आने के साथ ही परीक्षा में सम्मिलित 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं की धड़कने बढ़ने लगी है.

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यूपी बोर्ड में 10वीं और 12वीं के छात्र-छात्राओं को इस बार बदले नियमों का फायदा मिलेगा. लिहाजा UP Board Result 2019 भी छात्रों को फील गुड का अहसास कराने वाला हो सकता है. पिछले साल 10वीं में 75.16 और 12वीं में 72.43 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण घोषित हुए थे.

दरअसल, यूपी बोर्ड के रिजल्ट की तारीख करीब आने के साथ ही परीक्षा में सम्मिलित 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं की धड़कने बढ़ने लगी हैं. दो साल से परीक्षा के दौरान हो रही सख्ती ने परिणाम को लेकर चिंता और बढ़ा दी है. हालांकि परीक्षार्थियों को घबराने की जरूरत नहीं है. बोर्ड से जो संकेत मिल रहे हैं, उसके अनुसार इस बार का परिणाम भी 2018 की तरह फील गुड देने वाला है.

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पिछले साल सख्ती के कारण लोग परिणाम बहुत खराब होने की आशंका जता रहे थे. हालांकि 29 अप्रैल 2018 को रिजल्ट घोषित हुआ तो उम्मीद से कहीं अधिक हाईस्कूल के 75.16 और इंटर के 72.43 प्रतिशत छात्र-छात्राएं सफल हो गए.
परिणाम में सुधार के पीछे कई कारण हैं. पिछले ढाई दशक में बोर्ड के नियमों में व्यापक बदलाव का भी असर हुआ है. 1992 में जब सबसे खराब रिजल्ट आया था, उस समय हाईस्कूल के 6 विषयों में से किसी एक विषय में फेल होने पर परीक्षार्थी फेल हो जाता था. लेकिन अब छह में से पांच विषय में पास होने पर भी पास कर दिया जाता है. इस नियम से बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को राहत मिलने के आसार हैं. इसी प्रकार पहले कुल पांच नंबर का ग्रेस मार्क्स सिर्फ दो विषयों में मिलता था.

अब इंटर में 20 और हाईस्कूल में 18 नंबर का ग्रेस मार्क्स सभी विषयों में मिलाकर मिलता है. इसके चलते चार-पांच नंबर से फेल हो रहे छात्र आसानी से पास हो जाते हैं. सिर्फ दो विषयों में ग्रेस मार्क्स मिलने की बाध्यता नहीं होने के कारण भी बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों को राहत मिलने की संभावना है.

दरअसल, छात्रहित में बोर्ड ने पिछले कुछ वर्षों में अपने नियमों में कई बदलाव किए हैं. प्रश्नपत्र का प्रारूप भी बदला है. जिसका लाभ सीधे तौर पर छात्र-छात्राओं को मिलता है. सख्ती के कारण सफलता प्रतिशत में कमी तो आएगी लेकिन 1992 जैसे हालात नहीं रहेंगे.

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