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Prayagraj News: जबरन धर्म परिवर्तन कराकर निकाह करने वाले आरोपी की जमानत अर्जी खारिज, हाईकोर्ट ने की अहम टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण को लेकर की अहम टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने धर्मांतरण को लेकर की अहम टिप्पणी

Forceful Conversion in UP: हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि संविधान प्रत्येक बालिग नागरिक को अपनी मर्जी से धर्म अपनाने और पसंद की शादी करने की आजादी देता है. इस पर कोई वैज्ञानिक रोक नहीं है.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने साजिश के तहत हिन्दू लड़की का अपहरण कर धर्म परिवर्तन (Religious Conversion) कराने और उससे जबरन निकाह करने के मामले में अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने अपहरण, षड्यंत्र और धर्मांतरण कानून के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है. हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि संविधान प्रत्येक बालिग नागरिक को अपनी मर्जी से धर्म अपनाने और पसंद की शादी करने की आजादी देता है. इस पर कोई वैज्ञानिक रोक नहीं है. कोर्ट ने कहा कि संविधान सबको सम्मान से जीने का भी अधिकार देता है. सम्मान के लिए लोग घर छोड़ देते हैं और धर्म बदल लेते हैं. ऐसे में धर्म के ठेकेदारों को अपने में सुधार लाना चाहिए.

हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी देश का बहुसंख्य नागरिक जब अपमानित होकर धर्म बदलता है तो देश कमजोर होता है. इसका लाभ देश की विघटनकारी शक्तियों को प्राप्त होता है. लोग डर, भय, लालच में धर्म नहीं बदलते, बल्कि उपेक्षा, अपमान के कारण स्वतः धर्म परिवर्तन करते हैं‌ कि दूसरे धर्म में उन्हें सम्मान मिलेगा. कोर्ट ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हम बंटे, देश पर आक्रमण हुआ और हम गुलाम हुए. सुप्रीम कोर्ट ने भी धर्म को जीवन शैली माना और कहा कि आस्था व विश्वास को बांधा नहीं जा सकता. इसमें कट्टरता, भय लालच का कोई स्थान नहीं है. कोर्ट ने कहा कि शादी एक पवित्र संस्कार है. शादी के लिए धर्म बदलना शून्य व स्वीकार्य नहीं हो सकता.

ये है पूरा मामला
कोर्ट ने इच्छा के विरुद्ध झूठ बोल कर धर्मांतरण कराकर निकाह करने वाले जावेद उर्फ जाविद अंसारी को जमानत पर रिहा करने से इनकार कर दिया. दरअसल पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया था कि सादे व उर्दू में लिखे कागज पर दस्तखत कराते गये. याची पहले से शादीशुदा था, झूठ बोला और धर्म बदलवाया. बयान के समय भी वह डरी सहमी दिखी. कोर्ट ने अपहरण, षड्यंत्र व धर्मांतरण कानून  के आरोपी की जमानत अर्जी खारिज कर दी. यह आदेश जस्टिस शेखर कुमार यादव ने दिया.

याची की थी ये दलील
याची का कहना था कि दोनों बालिग है और उन्होंने अपनी मर्जी से धर्म बदलकर शादी की है. धर्मांतरण कानून लागू होने से पहले ही धर्म बदल लिया गया था, लेकिन पीड़िता ने अपने बयान में कहा कि वह  17नवंबर 20 शाम पांच बजे जलेसर बाजार गयी थी. वहां कुछ लोगों ने उसे जबरन गाड़ी में डाल लिया. दूसरे दिन जब कुछ होश आया तो वकीलों की भीड़ में कड़कड़डूमा कोर्ट में पाया। वहीं कागजों पर दस्तखत लिए गए. 18 नवंबर को धर्मांतरण कराया गया. फिर उसे कई जगहों पर ले गये. 28 नवंबर को निकाह कराया गया. मौका मिलने पर पुलिस को बुलाया और 22 दिसंबर को पीड़िता को पुलिस ने बरामद किया था.

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