यहां हैंडपंपों से न‍िकल रही है गर्म हवा, लोग कीचड़ वाला पानी पीने को मजबूर

यूपी के कई गांव इन दिनों पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं.

यूपी के कई गांव इन दिनों पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं.

Uttar Pradesh News:गर्मी के चलते जलस्तर नीचे चले जाने से गांव में लगे हैंडपंपों से जहां पानी निकलना बंद हो गया है. वहीं गांव में स्थित कुंए भी सूख चुके हैं, जिन कुओं में थोड़ा बहुत पानी बचा है उनमें तलहटी में कीचड़ भरा हुआ है और लोग उसे पीने को मजबूर हैं.

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गर्मी का सीजन शुरू होते ही उत्‍तर प्रदेश की संगम नगरी प्रयागराज के यमुनापार इलाके के कई गांवों में पेयजल की किल्लत शुरू हो गई है. बारा तहसील के पाठा इलाके के कई गांव इन दिनों पेयजल किल्लत से जूझ रहे हैं. देश की आजादी के सात दशक बाद भी इन गावों में पेयजल की कोई योजना नहीं पहुंची है. पाठा इलाके में लगे हैंडपंपों से पानी की जगह अब गर्म हवा निकलना शुरू हो गई है. वहीं दूसरी और नहर, तालाब और पोखरे भी सूख चुके हैं, जिसके चलते इंसान तो इंसान मवेशी भी प्यास बुझाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं.

इसी तरह की समस्या बारा तहसील के गीज गांव में देखी जा रही है. जहां पर पीने के पानी के लिए लोग परेशान हो रहे हैं. गर्मी के चलते जलस्तर नीचे चले जाने से गांव में लगे हैंडपंपों से जहां पानी निकलना बंद हो गया है. वहीं गांव में स्थित कुंए भी सूख चुके हैं, जिन कुओं में थोड़ा बहुत पानी बचा है उनमें तलहटी में कीचड़ भरा हुआ है. पानी की उपलब्धता न होने की वजह से लोग वही कीचड़ युक्त पानी पीने को मजबूर हैं, जबकि साफ पानी की चाहत में बस्ती के कुछ युवक अपनी जान की परवाह ना करते हुए गहरे कुएं में उतरकर के कुएं में जमे कीचड़ व दल दल को इस उम्मीद में साफ करने में लगे हुए हैं कि शायद कुएं में जमा कीचड़ और दलदल को साफ करने से उन्हें पीने के लिए साफ पानी मिलने लगेगा.

वहीं बस्ती के लोग कुए की सफाई कार्य में सहयोग करते हुए जी जान से लगे हुए थे. हांलाकि कुंए से जहरीली गैस निकलने पर उनकी जान को खतरा भी हो सकता है. गीज गांव के ही रहने वाले राजेंद्र कुमार के मुताबिक, बस्ती में लगे सभी हैंडपंप खराब पड़े हुए हैं. वहीं नहरों में पानी न आने से मवेशियों के पेयजल की समस्या और विकराल होती चली जा रही है. गांव में अब यही एक कुआं ही इस पूरे बस्ती के लोगों की प्यास बुझाने का जरिया बचा है. इसके अलावा पानी के लिए गांवों वालों के पास कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं है, जबकि पेयजल की किल्लत से जूझ रहे ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए भी तहसील प्रशासन की ओर आज तक कोई ठोस व कारगर कदम नहीं उठाया है. जिससे बस्ती के लोगों को पीने के पानी की समस्या से निजात मिल सके.

ग्रामीणों का कहना है कि पुराने प्रधान ने कभी इस समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं दिया। हालांकि अब पंचायत चुनाव के बाद नये प्रधान निर्वाचित हुए हैं लेकिन उनसे फिलहाल इतनी जल्दी कोई उम्मीद नहीं है.

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