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Prayagraj: बाहुबली अतीक अहमद के भाई अशरफ के खिलाफ दो मामलों में आरोप तय

बाहुबली अतीक अहमद के भाई अशरफ के खिलाफ आरोप तय

बाहुबली अतीक अहमद के भाई अशरफ के खिलाफ आरोप तय

Charges Framed Against Ex MLA Asharaf: अशरफ ने दो मामलों में तय आरोपों से इंकार करते हुए इनका परीक्षण कराए जाने की मांग अदालत से की है. दोनों मामले आर्म्स एक्ट (Arms Act) से जुड़े हुए हैं.

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प्रयागराज. एमपी-एमएलए कोर्ट (MP-MLA Court) ने बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद (Atiq Ahmad) के भाई पूर्व विधायक खालिद अजीम उर्फ़ अशरफ (Ashraf) के खिलाफ दो मामले में आरोप तय (Charge Framed) कर दिए हैं. पूर्व विधायक अशरफ पर शस्त्र अधिनियम के तहत दर्ज दो अलग-अलग मामलों में आरोप तय किए गए हैं. हालांकि अशरफ ने इन आरोपों से इंकार करते हुए मामले का परीक्षण कराए जाने की अदालत से मांग की है. अदालत ने अशरफ की मांग पर अभियोजन को गवाहों को पेश करने का आदेश दिया है.

स्पेशल जज एमपी-एमएलए कोर्ट आलोक कुमार श्रीवास्तव ने एडीजी क्रिमिनल राजेश कुमार गुप्ता और अशरफ के अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद व मौजूद साक्ष्यों को देखने के बाद यह आदेश दिए. पहले मामले में कोर्ट ने अशरफ की गिरफ्तारी के दौरान उसके कब्जे से बरामद पिस्टल के मामले में आरोप तय किया है. 03 जुलाई 2020 को सुबह 5:30 बजे बमरौली क्षेत्र के शिवाला मार्केट पर सीओ सेकंड ब्रिज नारायण सिंह ने एसटीएफ टीम और पुलिस फोर्स के साथ अशरफ को गिरफ्तार किया था. इस दौरान अशरफ के कब्जे से 32 बोर की पिस्टल बरामद हुई थी. यह पिस्टल शस्त्र अधिनियम की धारा 3 व 5 के तहत दंडनीय अपराध है.

दूसरा मामला भी आर्म्स एक्ट से जुड़ा हुआ
वहीं दूसरे मामले में अदालत ने अशरफ पर आरोप तय किया है कि अशरफ ने प्रशासन द्वारा शस्त्र लाइसेंस निलंबित किए जाने के बाद भी उसे जमा नहीं किया था. अशरफ के नाम जारी पिस्टल का लाइसेंस तत्कालीन डीएम प्रशांत शर्मा ने निलंबित कर दिया था. इसके बावजूद उसे जमा नहीं कराया गया था. गौरतलब है कि तीन साल की फरारी के बाद एक लाख के इनामी पूर्व विधायक अशरफ को 3 जुलाई 2020 को पुलिस और एसटीएफ ने गिरफ्तार किया था. जिसे नैनी सेंट्रल जेल भेजा गया था. बाद में उसे सुरक्षा व अन्य कारणों से नैनी जेल से बरेली जेल शिफ्ट कर दिया गया था. फिलहाल अशरफ इन दिनों बरेली जेल में बंद है.

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UP Madarsa Result: मदरसा बोर्ड का रिजल्ट घोषित, बिना परीक्षा पास हुए 1 लाख 21 हजार स्टूडेंट

UP Madarsa Result: मदरसा बोर्ड का सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी परीक्षाओं का रिजल्ट घोषित हो गया है.

इस साल सेकेंडरी में कुल 96213 परीक्षार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था जिसके सापेक्ष 95624 परीक्षार्थी पास हुए हैं. वहीं सीनियर सेकेंडरी में इस साल कुल 25919 परीक्षार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था जिसके सापेक्ष 25659 परीक्षार्थी पास हुए हैं.

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प्रयागराज. यूपी मदरसा शिक्षा परिषद ने सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी परीक्षाओं के लिए वर्ष 2021 का रिजल्ट जारी कर दिया है. इस साल मुंशी, मौलवी और आलिम के कुल एक लाख 22 हजार 132 परीक्षार्थियों का रिजल्ट जारी किया गया है. बता दें कि कोविड के चलते परीक्षायें आयोजित नहीं की गई थीं ऐसे में स्टूडेंट्स को बिना परीक्षा लिए ही प्रमोट कर दिया गया है. सर्किट हाउस प्रयागराज में रिजल्ट की घोषणा की गई.

बता दें कि जारी रिजल्ट में सेकेंडरी में 99.38 प्रतिशत परीक्षार्थी पास हुए हैं. इस साल सेकेंडरी में कुल 96213 परीक्षार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था जिसके सापेक्ष 95624 परीक्षार्थी पास हुए हैं. इनमें 54630 छात्र और 40994 छात्राएं शामिल हैं. वहीं सीनियर सेकेंडरी 98.99 प्रतिशत परीक्षार्थी पास हुए हैं. सीनियर सेकेंडरी में इस साल कुल 25919 परीक्षार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था जिसके सापेक्ष 25659 परीक्षार्थी पास हुए हैं. सीनियर सेकेंडरी में पास होने वालों में 13734 छात्र और 11925 छात्राएं शामिल हैं.

शासन की ओर से तय मानक के आधार पर किए गए हैं प्रमोट
बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार के तय मानक और यूपी बोर्ड की तर्ज़ पर, यूपी मदरसा शिक्षा परिषद ने सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी परीक्षार्थियों को प्रमोट किया है. दोनों कक्षाओं को मिलाकर पास होने वाले स्टूडेंट्स की संख्या 1 लाख 21 हजार से ज्यादा है.

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मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने घोषित किया रिजल्ट
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने रिजल्ट घोषित किया है. इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार सबका साथ सबका विकास की भावना से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि मदरसा बोर्ड में पढ़ने वाले स्टूडेंट्स के एक हाथ में कुरान हो तो दूसरे हाथ में लैपटॉप हो. सरकार ने एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया है. मदरसा पोर्टल भी सरकार ने शुरु किया है. इस दौरान उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि दूसरे दलों ने सिर्फ वोट के लिए इस्तेमाल किया लेकिन बीजेपी ने मदरसों के आधुनिकीकरण के लिए काम किया है. अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को सरकार एजुकेशन लोन देकर आगे बढ़ाने का काम कर रही है.

हाईकोर्ट ने दिया भर्ती के लिए निकले UPPSE का विज्ञापन रद्द करने का आदेश, जानें वजह

कोर्ट ने राज्य सरकार और लोक सेवा आयोग से जवाब मांगा है. (File photo)

UPPSE : आयोग के अधिवक्ता का कहना था कि आयोग की कई परीक्षाओं में धांधली के आरोप की सीबीआई जांच चल रही है. इसलिए आयोग ने पूर्व में लिया गया टेस्ट निरस्त करने का निर्णय किया है. याचिका पर 27 अक्तूबर को अगली सुनवाई होगी.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग प्रयागराज के प्रदेश सचिवालय में अपर निजी सचिवों की भर्ती के लिए 24 अगस्त 2021 को जारी विज्ञापन को रद्द करने का आदेश दिया है. कोर्ट ने इस बारे में दाखिल याचिका पर राज्य सरकार व यूपी लोक सेवा आयोग से दो सप्ताह में याचिका पर जवाब मांगा है. बता दें कि इससे पहले अपर निजी सचिवों की भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2013 में भी शुरू की गई थी. लेकिन तब भी इसे बीच में ही रोक दिया गया था और 9 साल बाद पूर्व की चयन प्रक्रिया रद्द कर नई अधिसूचना जारी की गई है. इस बार इसकी वैधता को चुनौती दी गई है.

विज्ञापन रद्द करने का आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने जय करन व अन्य की याचिका पर दिया है. याची का कहना है कि लोक सेवा आयोग की वर्ष 2013 में जारी भर्ती के तहत स्टेनोग्राफी व टाइप टेस्ट के अलावा कंप्यूटर टेस्ट होना था. स्टेनोग्राफी व टाइप टेस्ट में याचीगण सफल रहे और कंप्यूटर टेस्ट कई तारीखें तय करने के बाद भी नहीं लिया जा सका. और अब 9 साल बाद 24 अगस्त 21 के आदेश से परीक्षा नियंत्रक लोक सेवा आयोग ने उन्हीं पदों की नए सिरे से भर्ती प्रक्रिया शुरू की है. याची का कहना है कि स्टेनोग्राफी और टाइपिंग के लिए नियमित अभ्यास की आवश्यकता होती है. चूंकि याचीगण इस चरण को पास कर चुके थे, इसलिए उनको सिर्फ कंप्यूटर टेस्ट की उम्मीद थी. इसे निरस्त करने का कोई ठोस कारण भी नहीं बताया गया है.

लोक सेवा आयोग का तर्क

आयोग के अधिवक्ता का कहना था कि आयोग की कई परीक्षाओं में धांधली के आरोप की सीबीआई जांच चल रही है. इसलिए आयोग ने पूर्व में लिया गया टेस्ट निरस्त करने का निर्णय किया है. याचिका पर 27 अक्तूबर को अगली सुनवाई होगी.

ओवैसी का बयान: यादव ने अखिलेश, जाटव ने माया और ठाकुर ने योगी को चुना, मुस्लिम अपना नेता चुनें

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यूपी में मुस्लिम अखलियत की कोई आवाज ही नहीं है.

Asaduddin Owaisi: उत्तर प्रदेश में पांव जमाने को आतुर असदुद्दीन ओवैसी जातीय नब्ज पर हाथ रखने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से यादवों ने अखिलेश, जाटवों ने मायावती, ठाकुरों ने योगी आदित्यनाथ को नेता मान लिया है, उसी तरह मुस्लिम भी अपना नेता चुन लें. ओवैसी आपको हिस्सा दिलाने आया है.

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प्रयागराज. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव (Uttar Pradesh Assembly Election) के पहले ही असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की एंट्री ने यहां चुनावी माहौल गर्माना शुरू कर दिया है. शनिवार को प्रयागराज पहुंचकर असदुद्दीन ओवैसी ने जनसभा को संबोधित किया. इस दौरान ओवैसी ने अतीक अहमद को पार्टी में शामिल करने पर कहा कि वह कानून की नजर में चुनाव लड़ सकते हैं. आने वाले विधानसभा चुनाव में अतीक अहमद आपके वोट से जरूर जीतेंगे. उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपियों पर दर्ज मुकदमे बीजेपी सरकार ने वापस ले लिए हैं, लेकिन इस पर मीडिया में कोई चर्चा नहीं हुई.

ओवैसी ने नाथूराम गोडसे को आजाद भारत का पहला दहशतगर्द बताया. भारत की सियासत की ये तल्ख हकीकत है. उन्होंने कहा कि जिस समाज का नेता होगा उसके मसले हल किए जाते हैं. ओवैसी इसीलिए आया है कि हमको अपना हिस्सा लेना है. आपको अपना हक कब मिलेगा. ओवैसी ने कहा कि जिस तरह से यादव ने अखिलेश को अपना नेता माना, जिस तरह से जाटवों ने मायावती को अपना नेता माना, जिस तरह से ठाकुर योगी आदित्यनाथ को अपना नेता मानते हैं, जिस तरह कुर्मी अनुप्रिया पटेल को अपना नेता मानते हैं, जिस तरह से ब्राह्मण और अन्य समाज के लोग मोदी को अपना नेता मानते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश में मुस्लिम अखलियत की कोई आवाज ही नहीं है.

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उन्होंने कहा कि याद रखो कोई आसमान और जमीन से निकलकर नहीं आएगा. आपको खुद अपने हालात तब्दील करने होंगे. अगर आप एक करवट लेंगे तो मुझे यकीन है उत्तर प्रदेश में इंकलाब होगा. मैं वादा करता हूं अल्लाह जब तक मुझे जिंदा रखेगा, उत्तर प्रदेश में एक इंकलाब पैदा होगा.

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अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन की आंसुओं का वास्ता देते हुए ओवैसी ने कहा कि मेरी मां और बहनों की आंख से आंसू निकलना कम हो जाए मैं यही चाहता हूं. उन्होंने कहा कि न मोदी से डरना है, न योगी से डरना है, न अखिलेश से डरना है और न कांग्रेस से डरना है. मैं यही पैगाम देने आया हूं. मौलाना कलीम सिद्दीक़ी को लेकर ओवैसी ने कहा कि इस मामले में अखिलेश यादव नहीं बोले, क्योंकि फिर उन्हें हिंदू वोट नहीं मिलेगा.

धर्मांतरण कानून को बताया गलत

ओवैसी ने योगी सरकार के धर्मांतरण कानून को ही गलत बताया है. उन्होंने कहा कि इस कानून के तहत कोई मुसलमान और ईसाई होता है तो उसे बताना पड़ेगा बगैर किसी फ्रॉड के उसने धर्म परिवर्तन किया. योगी सरकार का यह कानून को असंवैधानिक है. चीखकर चिल्लाकर बोलो कि यह नाइंसाफी है. हम नाइंसाफी को नाइंसाफी कहेंगे चाहे मुसलमान करे या हिन्दू करे.

यह बीज बोने का वक्त नहीं, फसल काटने का वक्त है

उन्होंने कहा कि दोबारा किसी की भी कीमत पर यूपी में बीजेपी की सरकार न बने. मैं आप को नेता बनाने आया हूं. मैं आपको पैगाम दे कर जा रहा हूं. यह फसल काटने का वक्त है, यह बीज बोने का वक्त नहीं है. मुसलमानों को साठ साल से धोखा मिलता रहा है. आजम खान जेल में हैं. मुख्तार अंसारी जेल में है. बड़ी संख्या में मुसलमान जेलों में बंद हैं. हम फिरका परस्त को भी हरायेंगे.

मोदी सरकार पर बोला हमला

उन्होंने कहा कि ओबीसी ने मोदी को अपना वोट देकर पीएम बनाया, लेकिन ओबीसी की जनगणना नहीं करा रहे हैं. मोदी की सरकार ओबीसी को धोखा दे रही है. साल 2024 में मोदी को भी हरायेंगे.

जेल से अतीक अहमद की चिट्ठी, कहा- मुस्लिमों की हालत के लिए SP जिम्मेदार, ओवैसी रहनुमा

अतीक अहमद ने साबरमती जेल से चिट्ठी लिखकर समाजवादी पार्टी पर हमला बोला है.

Muslim Politics: पूर्व सांसद अतीक अहमद ने एक पत्र भेजकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है. अतीक अहमद ने पत्र में कहा कि आज जो उनकी, उनके परिवार और प्रदेश के मुसलमानों की हालत है वह समाजवादी पार्टी की वजह से है.

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प्रयागराज. गुजरात के साबरमती जेल (Sabarmati Jail) में बंद बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद (Atiq Ahmed) ने एक पत्र भेजकर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है. अतीक अहमद ने पत्र में कहा कि आज जो उनकी, उनके परिवार और प्रदेश के मुसलमानों की हालत है वह समाजवादी पार्टी की वजह से है. उन्होंने कहा है कि बीजेपी जीते या हारे, लेकिन हमें अपनी ताकत दिखानी है. उन्होंने पत्र में एआईएमआईएम को वोट करने की अपील की है.

दरअसल, कुछ दिन पहले ही अतीक अहमद ने अपनी पत्नी समेत एआईएमआईएम ज्वाइन किया है. शनिवार को एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी प्रयागराज भी पहुंच रहे हैं.

अतीक ने पत्र में लिखी ये बात

अतीक अहमद की पत्नी शाईस्ता परवीन ने साबरमती जेल से भेजे गए अतीक अहमद के पत्र का संदेश पढ़ा. पत्र में लिखा है ‘ मैं और मेरा भाई अशरफ जेल में है. मेरे बेटे उमर अतीक को गलत फंसाया गया. बेटे पर सीबीआई ने इनाम घोषित किया है.’ पत्र में लिखा कि कुछ सियासी गलतियां हुई हैं. मैं आपका वोट लेकर दूसरे को दे आता था. आजदी के इतने साल बाद मुसलमानों का कोई सियासी रहनुमा नहीं है. हमको लेमनचूस और टाफियां खिलायी जाती हैं. इनको ऐसे मुसलमान सांसद और विधायक चाहिए जो जी हुजूरी करें.

फूलपुर सांसद बना तो कब्रिस्तान की बाउंड्री वॉल बनाने में लगा दिया. मुझे रोका गया कि यादवों के स्कूलों को भी सांसद निधि दो, लेकिन मैंने कभी दबाव में आकर काम नहीं किया. हमको हर नौकरी में और शिक्षा में हिस्सा दो. हमारे वोट सबसे ज्यादा है, हमें हिस्सा चाहिए. हम हिन्दू भाईयों को भी टिकट देंगे. अतीक ने पत्र में लिखा कि वोट एआईएमआईएम को दो. बीजेपी जीते तो जीत जाये, लेकिन हमें अपनी ताकत दिखाना है.

अतीक के घर जाएंगे ओवैसी

पत्र पढ़ने के बाद शाईस्ता परवीन ने बीजेपी सरकार के बजाय समाजवादी पार्टी को ही अपनी हालत का जिम्मेदार बताया. उन्होंने कहा कि वोट लेते हैं, लेकिन साथ खड़े नहीं हो सकते. गौरतलब, है कि एमआईएमआईएम मुखिया और सांसद असदुद्दीन ओवैसी शनिवार को एक दिन के प्रयागराज दौरे पर हैं. यहां उन्हें पहले एमआईसी ग्राउंड पर सम्मेलन में शामिल होना है. सम्मेलन में सिर्फ 100 लोगों को ही शामिल होने की इजाजत दी गई हैं. ओवैसी इसके बाद पूर्व बाहुबली सांसद अतीक अहमद के उस घर पर खाना खाने और नमाज पढ़ने के लिए जाएंगे, जिसे योगी सरकार ने पिछले साल ऑपरेशन माफिया के तहत बुलडोजर चलवा कर मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया था.

Prayagraj News: नरेंद्र गिरि के ड्राइवर का बड़ा खुलासा, बोला- घटना वाले दिन मठ से कहीं बाहर नहीं गए थे महंत

Prayagraj News: महंत नरेंद्र गिरि के ड्राइवर का बड़ा खुलासा

Mahant Narendra Giri Suicide Case: महंत नरेंद्र गिरि को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में तीन लोगों आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को यूपी पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी (Mahant Narendra Giri) आत्महत्या (Suicide) मामले में प्रयागराज से बड़ी खबर आ रही है. शनिवार को महंत नरेंद्र गिरि के ड्राइवर दुर्गेश ओझा का बड़ा खुलासा सामने आया है. मीडिया से बातचीत में महंत नरेंद्र गिरि के ड्राइवर दुर्गेश ओझा ने बताया कि घटना वाले दिन महंत मठ से कहीं बाहर नहीं गए थे. ड्राइवर के मुताबिक घटना वाले दिन वो ड्यूटी पर नहीं था. लेकिन महंत जी ने उसे 10 बजे सुबह बुलाया और कहा तबीयत ठीक नहीं है जाकर आराम करो. दुर्गेश ओझा ने दावा करते हुए कहा कि उनको देखने से बिल्कुल नहीं लग रहा था वो इतना बड़ा कदम उठा सकते हैं.

महंत नरेंद्र गिरि के ड्राइवर ने बताया कि शाम को 6 बजे जानकारी हुई कि महंत जी ने खुदकुशी कर ली. उसके बाद बहुत भारी संख्या में पुलिस बल पहुंचकर शव को कब्जे में ले लिया. ड्राइवर ने बताया कि वो अपनी पर्सनल बात किसी से शेयर नहीं करते थे. आनंद गिरि से महंत नरेंद्र गिरि का विवाद किसी से छुपा नहीं है. सर्वेश कुमार द्विवेदी उनके मुशी हैं. महंत जी कुछ लिखने पढ़ने के लिए बुलाया करते थे.

फंदे से लटकते मिले महंत
सेवादार सर्वेश कुमार द्विवेदी, सुमित तिवारी व धनंजय के साथ कमरे के अंदर पहुंचे। सेवादार सर्वेश के मुताबिक, कमरे में महंत नरेंद्र गिरि का शव रस्सी के सहारे पंखे से फंदे पर लटकता हुआ मिला। रस्सी काटकर फंदे से महंत के शव को उतारा और पुलिस को घटना की जानकारी दी। सूचना के करीब 10-15 मिनट बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस को छानबीन में कमरे से 7 पन्नों का सुसाइड नोट मिला।

इससे पहले महंत नरेंद्र गिरि को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में तीन लोगों आनंद गिरि, आद्या तिवारी और संदीप तिवारी को यूपी पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है. सीबीआई पता लगाएगी कि महंत की मौत हत्या है या आत्महत्या.

प्रयागराज का किशोर वैज्ञानिक अब बना IAS अफसर, पढ़ें UPSC में 50वीं रैंक पाने वाले अभिषेक की कहानी

प्रयागराज के अभिषेक शुक्ला का UPSC में हुआ चयन

Prayagraj News: अभिषेक शुक्ला शुरू से ही मेधावी रहे हैं. इनकी शुरुआती पढ़ाई टूंडला के क्राइस्ट द किंग हाई स्कूल से हुई. इसके बाद सेंट जोसेफ कॉलेज प्रयागराज से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की. दोनों ही परीक्षाओं में अभिषेक शुक्ला ने जिले में टॉप किया था.

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प्रयागराज. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए नतीजों में प्रयागराज (Prayagraj) के अभिषेक शुक्ला (Abhishek Shukla) का भी आईएएस के पद पर चयन हुआ है. प्रयागराज के इस लाल ने आईएएस की परीक्षा में 50वीं  रैंक हासिल हासिल कर देश और प्रदेश के साथ ही प्रयागराज का भी नाम रोशन किया है. अभिषेक शुक्ला शुरू से ही मेधावी रहे हैं. इनकी शुरुआती पढ़ाई टूंडला के क्राइस्ट द किंग हाई स्कूल से हुई. इसके बाद सेंट जोसेफ कॉलेज प्रयागराज से इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की. दोनों ही परीक्षाओं में अभिषेक शुक्ला ने जिले में टॉप किया था. इसके बाद आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. अपनी पढ़ाई के बाद पहली नौकरी एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया में जूनियर एक्जीक्यूटिव इलेक्ट्रिकल के पद पर मिली. इसके बाद से ही अभिषेक शुक्ला संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए.

यूपीएससी से 2020 में इंडियन इंफॉर्मेशन सर्विसेज में चयन हुआ. इन दिनों दिल्ली के आईआईएमसी में इसकी ट्रेनिंग भी कर रहे हैं. अभिषेक शुक्ला के पिता आनंद शुक्ला नार्थ सेंट्रल रेलवे के प्रयागराज डिवीजन में चीफ कंट्रोलर इंचार्ज के पद पर कार्यरत हैं. उनके मुताबिक अभिषेक शुक्ला शुरू से मेधावी रहे हैं. उन्हें कभी पढ़ाई के लिए कहना नहीं पड़ा और बिना कोचिंग के सेल्फ स्टडी से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है. उन्हें किशोर वैज्ञानिक प्रोत्साहन योजना की स्कालरशिप भी वर्ष 2010 में मिल चुका है. इसके साथ ही साथ राष्ट्रीय प्रतिभा खोज छात्रवृत्ति भी हासिल कर चुके हैं.

उपलब्धि पर परिवार में जश्न
इस बड़ी उपलब्धि से परिवार में जश्न का माहौल है. घर में मां कल्पना शुक्ला गृहणी हैं. उन्हें बेटे की सफलता पर गर्व भी है. अभिषेक शुक्ला की छोटी बहन प्रतिष्ठा शुक्ला ने लॉ की पढ़ाई की है और वकालत शुरु कर रही हैं. उन्हें भी अपने भाई की कामयाबी पर बेहद नाज है प्रतिष्ठा के मुताबिक उनके भाई ने आईएएस बनकर उन्हें जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा दिया है.

महंत नरेंद्र गिरि मौत मामले में अहम मोड़, अब CBI के रडार पर हरिद्वार के प्रॉपर्टी डीलर

अखाड़ा परिषद के प्रमुख थे महंत नरेंद्र गिरि.

Mahant Narendra Giri Death : प्रयागराज में हुई नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की जांच में सीबीआई प्रॉपर्टी के एंगल से भी जांच में जुटी हुई है. उत्तराखंड तक पहुंच गई इस जांच के साथ ही ये भी जानिए कि कैसे हरिद्वार में प्रॉपर्टी की जंग पहले भी संतों की जान तक पहुंची है.

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पु​लकित शुक्ला
हरिद्वार. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत की गुत्थी उलझती जा रही है. गिरि के शिष्य आनंद गिरि को हरिद्वार से गिरफ्तार किए जाने के बाद उन्होंने अखाड़ों की ज़मीन और प्रॉपर्टी के विवाद के संबंध में बातचीत कही थी और अब जांच एजेंसी को नरेंद्र गिरि के कॉल रिकॉर्ड से हरिद्वार के कुछ रियल एस्टेट कारोबारियों से कई बार बात होने का पता चला है. पूरे मामले में जांच एजेंसी अब प्रॉपर्टी के एंगल से भी जांच कर रही है. यही कारण है कि जांच एजेंसी की रडार पर अब हरिद्वार के कुछ रियल एस्टेट कारोबारी भी आ गए हैं.

अखाड़ों के पास हैं बेशुमार संपत्तियां
हरिद्वार में कई अखाड़ों के मुख्यालय हैं. यहां अखाड़ों, आश्रमों और मठों के पास अकूत सम्पदाएं हैं. कुछ अखाड़ों के पास तो शहर के लगभग हर हिस्से में ज़मीनें हैं. हरिद्वार में अखाड़ों के महंतों और रियल स्टेट कारोबारियों के बीच में सांठगांठ काफी पुरानी रही है. यही कारण है कि धर्म, परमार्थ और जनहित के उद्देश्य से अर्जित की गई संपत्तियां अब अपार्टमेंट्स, शॉपिंग कॉंप्लेक्स और मॉल में तब्दील हो रही हैं.

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हरिद्वार स्थित कई अखाड़ों की संपत्तियों को लेकर विवादों की चर्चा आम है.

साल दर साल यहां ऐसे अपार्टमेंट और सोसाइटी की संख्या बढ़ रही है, जो अवैध ढंग से अखाड़ों की ज़मीनों पर खड़े हैं. दूसरी तरफ, ये भी दबे शब्दों में कहा जा रहा है कि राजस्व चोरी और नियमों को दरकिनार कर इमारतें खड़े करने का यह खेल शासन प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है.

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कई संतों की हो चुकी हैं हत्याएं
धर्म नगरी में धार्मिक संपत्तियों की खरीद-फरोख्त न सिर्फ विवादित बल्कि रक्त रंजित रही है. राज्य गठन के बाद से अब तक हरिद्वार के दर्जनों संतो की हत्या और संदिग्ध मौत हो चुकी है. ऐसी मौतों के पीछे संपत्तियों की खरीद-फरोख्त का विवाद बताया जाता है. अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय प्रवक्ता बाबा हठयोगी बताते हैं ‘अखाड़ा की ज़मीनों की खरीद-फरोख्त से कई बार अखाड़ों के पदाधिकारियों में भी आपसी तनातनी बढ़ जाती है इसलिए अब तक दर्जनों संतो की मौत संदिग्ध रही है.’

UP Elections: ओवैसी का प्रयागराज दौरा कल, पोस्टर में साथ दिखे अतीक अहमद

कल प्रयागराज में होंगे असदुद्दीन ओवैसी.  (फाइल फोटो)

Poster Viral : प्रयागराज में होने वाली रैली के लिए जारी पोस्टर में बाहुबली नेता अतीक अहमद भी दिख रहे हैं. AIMIM की ओर से जारी इस पोस्टर के बाद बड़ा सवाल यह है कि क्या ओवैसी की नैया अब बाहुबली अतीक अहमद पार लगाएंगे?

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 24, 2021, 22:48 IST
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प्रयागराज. ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी AIMIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी शनिवार को प्रयागराज आ रहे हैं. ओवैसी के प्रयागराज दौरे से पहले ही उनका पोस्टर वायरल हो गया है. प्रयागराज में होने वाली रैली के लिए जारी पोस्टर में बाहुबली नेता अतीक अहमद भी दिख रहे हैं. AIMIM की ओर से जारी इस पोस्टर के बाद बड़ा सवाल यह है कि क्या ओवैसी की नैया अब बाहुबली अतीक अहमद पार लगाएंगे?

बता दें कि हाल ही में अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन ने लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में AIMIM में शामिल हुई थीं. कुछ दिन पहले ओवैसी ने अतीक अहमद और उनकी पत्नी को चुनाव में टिकट देकर मनचाही सीट से चुनाव लड़ाने का भी ऐलान किया था. प्रयागराज के लिए जारी पोस्टर में पोस्टर में असदुद्दीन ओवैसी के साथ बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद और एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली की भी तस्वीर है. पोस्टर में अंग्रेजी में लिखा है कि बॉस इज कमिंग. ओवैसी की पार्टी यूपी की सभी सीटों पर लड़ने का दावा कर रही है.

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नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने पोस्टर को कहा – ड्रामा

एआईएमआईएम राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी के प्रयागराज दौरे को लेकर बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद के साथ जो पोस्टर जारी किया गया है उसे यूपी के कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने ड्रामा करार दिया है. उन्होंने कहा है कि यूपी विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही असदुद्दीन ओवैसी ने ड्रामा शुरू कर दिया है. ओवैसी पहले अयोध्या गए, अब प्रयागराज आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि अयोध्या और प्रयागराज आने से ओवैसी पहले परहेज करते थे. कैबिनेट मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने आरोप लगाया है कि चुनाव में वोटों के ध्रुवीकरण के मकसद से ओवैसी प्रयागराज आ रहे हैं. लेकिन ओवैसी चाहे जिसके साथ पोस्टर लगा लें अब कोई फर्क नहीं पड़ेगा‌, क्योंकि मोदी और योगी सरकार सबका साथ सबका विकास के संकल्प को लेकर काम कर रही है.

...तो इसलिए महंत नरेंद्र गिरि की मौत की गुत्‍थी सुलझाना CBI के लिए है बेहद जरूरी

सीबीआई महंत नरेंद्र गिरी की आत्महत्या या हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है.

Mahant Narendra Giri Death Investigation: महंत नरेंद्र गिरी का शव बीते सोमवार को प्रयागराज (Prayagraj) के बाघम्बरी मठ में फांसी से लटका मिला था. हाल के दिनों में यह दूसरा हाईप्रोफाइल मामला है, जो सीबीआई (CBI) के जिम्मे आया है. इससे पहले झारखंड के धनबाद कोर्ट के जज उत्तम आनंद (Judge Uttam Anand) की मौत के मामले की जांच भी सीबीआई के जिम्मे आई थी.

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नई दिल्ली. केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत (Narendra Giri Death Case) के मामले की जांच शुरू कर दी है. यूपी सरकार के अनुरोध के बाद भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) ने महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की सीबीआई जांच को मंजूरी दी है. बता दें कि महंत नरेंद्र गिरी का शव बीते सोमवार को प्रयागराज के बाघम्बरी मठ में पंखे से लटका मिला था. हाल के दिनों में यह दूसरा हाईप्रोफाइल मामला है, जो सीबीआई के जिम्मे आया है. इससे पहले झारखंड के धनबाद कोर्ट के जज उत्तम आनंद की मौत के मामले की जांच भी सीबीआई के जिम्मे आई थी. जज उत्तम आनंद की मौत में अभी तक सीबीआई को कुछ भी हाथ नहीं लगा है, जबकि इस मामले को हाई कोर्ट के निर्देश के बाद जुलाई महीने में ही सीबीआई के हवाले किया गया था. ऐसे में सवाल उठता है कि सीबीआई महंत नरेंद्र गिरी की हत्या या आत्महत्या के मामले को कितना जल्दी सुलझा लेगी? इस तरह के मामलों में क्या है सीबीआई का पुराना ट्रैक रिकॉर्ड?

सूत्रों की मानें तो सीबीआई महंत नरेंद्र गिरी की आत्महत्या या हत्या को सुलझाने के लिए कई स्तरों पर काम करना शुरू कर दिया है. सबसे पहले देशभर के अलग-अलग फोरेंसिक टीमों को इस काम में लगाया गया है. ये एक्सपर्ट्स अलग-अलग तरीके से मामले की फोरेंसिक जांच कर सीबीआई को बताएंगे. वहीं, सीबीआई इस घटना को रिक्रिएशन कर यह समझने की कोशिश करेगी कि वाकई में गिरि की मौत आत्महत्या थी या फिर हत्या की गई?

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सीबीआई की आपराधिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग मामलों में निपटाने की सफलता का दर 69.19 प्रतिशत है.

सीबीआई के लिए क्यों है यह अहम केस?
कुछ महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को लेकर एक सख्त टिप्पणी की थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ये धारणा है कि सीबीआई को मिलने वाले मामलों में सफलता दर कम रहता है. इसलिए सीबीआई अवरोधों को पहचान कर कोर्ट को अवगत कराए. न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने सीबीआई के निदेशक को निर्देश दिया था कि वह छह सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर कर बताए कि एजेंसी कितने मामलों में निचली अदालतों और उच्च न्यायलयों में आरोपियों को दोषी साबित करने में सफल रही है.

क्या कहती है यह रिपोर्ट
बता दें कि पिछले साल केंद्रीय सतर्कता आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक सीबीआई की आपराधिक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े अलग-अलग मामलों में निपटाने की सफलता का दर 69.19 प्रतिशत रही है. सीबीआई ने एक साल पहले की तुलना में 2019 में 21 फीसदी कम ममलों का रजिस्ट्रर्ड किया या पूछताछ की. साल 2018 में सीबीआई के पास 899 मामले आए थे और इतने मामलों में ही पूछताछ की, जबकि साल 2019 में 710 मामालों में ही ऐसा किया गया.

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पिछले दिनों ही सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाई थी.

क्यों सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाई?
पिछले दिनों ही सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को फटकार लगाई, जब उसे पता चला कि एक मामले में 542 दिनों की देरी के बाद अपील दायर की गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इन्हीं सब बातों को ध्यान में रख कर अब सीबीआई के कामकाज का विश्लेषण करने का फैसला किया है. हालांकि, साल 2018 की तुलना में 2019 में सीबीआई की सफलता का दर 68 प्रतिशत से बढ़कर 69.19 प्रतिशत तक पहुंच गया है.

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कुलमिलाकर अगले कुछ दिनों में सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट में कई अहम सवालों का जवाब देना है. जैसे, कितने मामलों में अभी तक सत्र न्यायालय और उच्च न्यायालयों में सीबीआई अभियुक्तों को दोषी ठहराने में सफल रही है? दूसरा, सीबीआई निदेशक कानूनी कार्यवाही के संबंध में विभाग को कितना मजबूत कर रहे हैं? तीसरा, सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट को बताना होगा कि अब देश की अदालतों में कितने मामले लंबित हैं और कितने समय पर हैं? चौथा, अभी निपटाए जा रहे केसों और सफलतापूर्वक पूरे किए गए मामलों का पूरा लिस्ट सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट को देना होगा.

Mahant Suicide Case: पुराना है संपत्ति को लेकर बाघंबरी मठ में संतों का विवाद

बाघंबरी मठ के एक महंत की पहले भी हुई है संदिग्ध परिस्थितियों मे मौत.

Suspicious death : इससे पहले 1978 में महंत विचारानंद गिरी की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी. बताया जाता है कि हरिद्वार से लौटते समय ट्रेन में जहर के सेवन से महंत विचारानंद गिरी की हुई थी मौत.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 24, 2021, 18:53 IST
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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की आत्महत्या के मामले में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. शुक्रवार को सवाल यह भी उठा कि कहीं मठ की करोड़ों की संपत्ति ने तो नहीं ले ली महंत नरेंद्र गिरि की जान. दरअसल बाघम्बरी मठ में पहले भी एक महंत की संदिग्ध मौत हुई है. इसलिए भी महंत नरेंद्र गिरि की मौत पर साजिश के लग रहे हैं आरोप. इससे पहले 1978 में महंत विचारानंद गिरी की मौत संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी. बताया जाता है कि हरिद्वार से लौटते समय ट्रेन में जहर के सेवन से महंत विचारानंद गिरी की हुई थी मौत.

सूत्रों ने बताया कि महंत बलदेव गिरी के बाद बने महंत भगवान गिरी की स्वाभाविक मौत हुई थी. उनकी मौत के बाद 2004 में महंत नरेंद्र गिरि मठ के उत्तराधिकारी बने. 20 सितंबर 2021 महंत नरेंद्र गिरि फांसी के फंदे पर लटके पाए गए.

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मौत से पहले महंत नरेंद्र गिरि के फोन पर आए थे 35 कॉल, जांच के घेरे में हरिद्वार के 2 बिल्डर

हालांकि महंत विचारानंद गिरी की मौत के बाद ही मठ की संपत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया था. तब शिवानंद गिरी ने मठ का उत्तराधिकारी घोषित करने की मांग थी. यह मामला पहले सिविल कोर्ट में दाखिल किया गया था. लेकिन शिवानंद गिरी ने कोर्ट फीस जमा नहीं कर पाए थे तो उनका दावा खारिज कर दिया गया था. हालांकि बाद में हाईकोर्ट जाने पर अदालत ने कोर्ट फीस जमा करने का मौका दिया, लेकिन शिवानंद गिरी फीस नहीं जमा कर पाए. आज भी यह मुकदमा जिला कोर्ट प्रयागराज में चल रहा है. महंत नरेंद्र गिरि के वकील महादेव द्विवेदी ने इस बात की जानकारी दी है. मतलब साफ है कि मठ की संपत्ति को लेकर विवाद कोई नया नहीं है. अब लोगों को सीबीआई जांच से ही राज खुलने की उम्मीद है.

Mahant Suicide: क्या 'हनी ट्रैप' के शिकार हुए महंत नरेंद्र गिरि, SIT ने बरामद किया वीडियो

Mahant Death: क्या 'हनी ट्रैप' के शिकार हुए थे महंत नरेंद्र गिरि (File photo)

Mahant Narendra Giri Suicide Case: आज जब हरिद्वार से सूचना मिली की आनंद एक दो दिन में फोटो वायरल करने वाला है, तो बदनामी से अच्छा मर जाना है. मेरी आत्महत्या का जिम्मेदार आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनका लड़का संदीप तिवारी है.

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प्रयागराज. अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की मौत के मामले की जांच जल्द ही सीबीआई अपने हाथ में ले लेगी. इसी बीच एक सवाल उठा है कि महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध मौत के पीछे हनी ट्रैप तो वजह नहीं है. सूत्रों के मुताबिक जांच के दौरान एसआईटी ने आनंद गिरि के ग्रुप से वीडियो बरामद किया है. इसी वीडियो को दिखाकर महंत नरेंद्र गिरि को ब्लैक मेल किया जा रहा था. महंत नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में भी इसका जिक्र किया है. पुलिस की जांच के मुताबिक मामला आत्महत्या का है, जबकि महंत के चाहने वालों के मुताबिक मामला साजिशन मौत का है, लेकिन सुसाइड लेटर के मुताबिक मामला अब एक महिला से जुड़ा दिखता है.

पुलिस के पास मौजूद सुसाइड नोट में महंत नरेंद्र गिरि ने लिखा है क‍ि “आनंद गिरि के कारण आज मैं विचलित हो गया. हरिद्वार से सूचना मिली कि आनंद कंप्यूटर के माध्यम से एक लड़की के साथ मेरा फोटो जोड़कर गलत काम करते हुए फोटो वायरल करने वाला है. वह मुझे बदनाम करने जा रहा है. मैंने सोचा कि एक बार बदनाम हो गया तो कहां-कहां सफाई दूंगा. बदनाम हो गया तो जिस पद पर हूं उसकी गरिमा चली जाएगी. इससे अच्छा तो मर जाना ठीक है. मेरे मरने के बाद सच्चाई तो सामने आ ही जाएगी. आगे नरेंद्र गिरि ने लिखा कि मैं जिस सम्मान से जी रहा हूं अगर मेरी बदनामी हो गई तो मैं समाज मैं कैसे रहूंगा, इससे अच्छा मर जाना ठीक रहेगा.

“13 सितंबर को ही करने वाला था आत्महत्या”

महंत नरेंद्र गिरि ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं 13 सितंबर को ही आत्महत्या करने वाला था . लेकिन हिम्मत नहीं कर पाया. आज जब हरिद्वार से सूचना मिली की आनंद एक दो दिन में फोटो वायरल करने वाला है, तो बदनामी से अच्छा मर जाना है. मेरी आत्महत्या का जिम्मेदार आनंद गिरि, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी और उनका लड़का संदीप तिवारी है. तीनों आरोपियों के नाम के साथ लिखा है कि मैं पुलिस अधिकारियों व प्रशासनिक अधिकारियों से प्रार्थना करता हूं कि इन तीनों पर कानूनी कार्रवाई की जाए, जिससे मेरी आत्मा को शांति मिल सके.

Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से मिला अलवर की मिठाई दुकान का थैला, कौन आया था मिलने?

Prayagraj: महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से मिला बाबा स्वीट शॉप अलवर का थैला

Mahant Narendra Giri News: सूत्रों के मुताबिक ऐसा लग रहा है महंत से हाल ही में कोई शख्स राजस्थान के अलवर से मिलने आया था. महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि राजस्थान के भीलवाड़ा में आसींद क्षेत्र के सरेरी गांव के निवासी हैं.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के संदिग्ध मौत के बाद नए-नए खुलासे हो रहे है. शुक्रवार को पुलिस ने महंत नरेंद्र गिरि के कमरे से बाबा स्वीट शॉप अलवर का एक थैला बरामद किया. बता दें कि राजस्थान के अलवर शहर का कलाकंद पूरे देश में मशहूर है. जांच एजेंसी अब इस बात का पता लगाने में जुटी है कि आखिर अलवर का कौन शख्स महंत नरेंद्र गिरि से मिलने आया था. क्या महंत नरेंद्र गिरि को पसंद था कलाकंद. सूत्रों के मुताबिक ऐसा लग रहा है कि महंत से हाल ही में कोई शख्स अलवर से मिलने आया था. महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि राजस्थान के भीलवाड़ा में आसींद क्षेत्र के सरेरी गांव के रहने वाले हैं.

महंत की मौत के मामले में आरोपी आनंद गिरि को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. महंत के और शिष्य की शिकायत पर आनंद गिरि के खिलाफ मामला दर्ज हुआ. हालांकि आनंद गिरि ने सभी आरोपों से इनकार किया है. अदालत ने इस मामले में दो आरोपियों-आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा था.

कौन हैं आनंद गिरी

आनंद गिरि राजस्थान के भीलवाड़ा में आसींद क्षेत्र के सरेरी गांव के निवासी हैं. उनका असली नाम अशोक है और उनके पिता का नाम रामेश्वर लाल चोटिया है. वो अपने चार भाइयों में सबसे छोटे हैं. दरअसल साल 1997 में आनंद 12 साल की उम्र में अपना घर छोड़कर हरिद्वार चले गए थे. हरिद्वार में उन्हें नरेंद्र गिरी मिले. मुलाकात होने पर नरेंद्र गिरि ने आनंद से पूछा कि तुम क्या चाहते हो? तो जवाब में आनंद ने कहा था कि वो पढ़ना चाहता है. इसलिए नरेंद्र गिरी ने आनंद की पढ़ाई करवाई और दीक्षा भी दी.

Exclusive: महंत नरेंद्र गिरि ने बनवाई थी तीन वसीयत, हर बार बदला था उत्तराधिकारी

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है.

Mahant Narendra Giri Suicide Case: ऋषिशंकर द्विवेदी ने न्यूज़18 से बातचीत में बताया कि महंत नरेंद्र गिरि ने 4 जून 2020 को पहले की दोनों वसीयतों को निरस्त करवाते हुए तीसरी वसीयत लिखवाई जिसमें उन्होंने बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनवाया.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (Akhil Bhartiya Akhara Parishad) के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की आत्महत्या के मामले में हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. अपने सुसाइड नोट में उन्होंने जिस रजिस्टर्ड वसीयतनामा (Will) का जिक्र किया था वह न्यूज़18 के हाथ लगा है. इसमें उन्होंने महंत बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाया है. इतना ही नहीं महंत नरेंद्र गिरि ने एक नहीं बल्कि तीन बार वसीयत बनवाई थी. हर बार उन्होंने अपना उत्तराधिकारी बदला दिया। पहला वसीयत 2010 में उन्होंने बनवाया जिसमें बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी बनाया. इसके बाद 2011 में उन्होंने दूसरी वसीयत तैयार करवाई, जिसमे अपने शिष्य स्वामी आनंद गिरि को उत्तराधिकारी बनाया. इसके बाद 2020 में एक और वसीयत तैयार करवाई जिसमें पहले की दोनों वसीयतों को रद्द करवाते हुए बलवीर गिरि को फिर से उत्तरधिकारी घोषित किया.

महंत नरेंद्र गिरि के वकील ऋषिशंकर द्विवेदी ने न्यूज़18 से बातचीत में बताया कि महंत नरेंद्र गिरि ने 4 जून 2020 को पहले की दोनों वसीयतों को निरस्त करवाते हुए तीसरी वसीयत लिखवाई जिसमें उन्होंने बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनवाया. उन्होंने बताया कि नरेंद्र गिरि ने 7 जनवरी 2010 को पहली वसीयत तैयार करवाई थी. इसमें उन्होंने बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बनाया था. इसके बाद 29 अगस्त 2011 को फिर उन्होंने दूसरी वसीयत तैयार करवाई और इस बार स्वामी आनंद गिरी को उत्तरधिकारी बनाया. उन्होंने बताया था कि बलवीर गिरि हरिद्वार में व्यस्त रहते हैं इसलिए आनंद गिरि ही उनके उत्तराधिकारी होंगे. इसके बाद 4 जून 2020 को महंत जी ने अपनी तीसरी वसीयत तैयार करवाई. इस बार उन्होंने अपनी पहले की दोनों वसीयतों को रद्द करवाते हुए एक नई वसीयत तैयार करवाई. इसमें उन्होंने एक बार फिर बलवीर गिरि को उत्तराधिकारी बनाया. उन्होंने स्वामी आनंद गिरि से अपने मनमुटाव का जिक्र भी वकील ऋषिशंकर द्विवेदी से किया था.

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4 जून 2020 को लिखी थी आखिरी वसीयत

वसीयत के मुताबिक बलवीर गिरि ही होंगे नए महंत 

वकील ऋषिशंकर द्विवेदी ने बताया कि अखाड़ा परिषद के नियम के मुताबिक वसीयत के अनुसार ही उत्तराधिकारी तय होता है. महंत नरेंद्र गिरि की आखिरी वसीयत के मुताबिक बलवीर गिरि ही अगले महंत बनेंगे. उन्हें पांच परमेश्वरों के मुताबिक अखाड़े का संचालन करना होगा.

Mahant Death Case: मौत से पहले महंत नरेंद्र गिरि के फोन पर आए थे 35 कॉल, जांच के घेरे में हरिद्वार के 2 बिल्डर

Prayagraj: एसआईटी इन लोगों से जल्द करेगी पूछताछ

Mahant Narendra Giri Suicide: एसआईटी महंत नरेंद्र गिरि के सुरक्षाकर्मियों की संपत्ति तलाश करने में जुटी है, तो वहीं उनके गनर अभिषेक मिश्रा पर भी एसआईटी की निगाहें टेढ़ी हो गई है, जिनके पास लग्जरी कारें और करोड़ों के बंगले भी है.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri Death Case) की मौत के मामले की जांच अब सीबीआई के पास पहुंच चुकी है. इस मामले में शुक्रवार को एक नई जानकारी भी सामने आई है. सोमवार यानि जिस दिन महंत नरेंद्र गिरि की मौत हुई तब उनके फोन पर कुल 35 कॉल आई थी. इसमें से 18 पर उन्होंने बातचीत की थी. बातचीत करने वालों में हरिद्वार के कुछ लोग और 2 बिल्डर भी शामिल थे. फोन कॉल के बाद जांच एजेंसी हरिद्वार कनेक्शन की जांच करने में जुटी है. एसआईटी नरेंद्र गिरि के मोबाइल की सीडीआर निकालकर इन लोगों से भी पूछताछ करेगी. हरिद्वार से कॉल करने वालों का डिटेल खंगालने के लिए हरिद्वार पुलिस को भी जानकारी भेजी गई है.

सूत्रों के मुताबिक 13 सितंबर से पहले ही नरेंद्र गिरी को आपत्तिजनक वीडियो की जानकारी मिल गई थी. जिसके चलते मंहत नरेंद्र गिरि परेशान चल रहे थे. उधर, एसआईटी ने नरेंद्र गिरी की सुरक्षा में तैनात सिपाहियों की भी जांच शुरू कर दी है. 20 सितंबर को सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों की लोकेशन जांच टीम ने मंगी है. बताया जा रहा है कि पूरे घटनाक्रम की जानकारी जल्द एसआईटी सीबीआई के साथ साझा करेंगी.

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एसआईटी महंत नरेंद्र गिरि के सुरक्षाकर्मियों की संपत्ति तलाश करने में जुटी है, तो वहीं उनके गनर अभिषेक मिश्रा पर भी एसआईटी की निगाहें टेढ़ी हो गई है, जिनके पास लग्जरी कारें और करोड़ों के बंगले भी है. अभिषेक मिश्रा के घर और उसकी तस्वीरें न्‍यूज 18 के पास है जो यह बताती है कि वह कितना बड़ा आदमी बन चुका है. अब एसआईटी अभ‍िषेक के बारे में यह जानकारी जुटाने पर लगी है. महंत नरेंद्र गिरि के मामले में दो अन्य आरोपियों आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया और बुधवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया. अदालत ने इन दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है.

महंत का गनर और हनुमान मंद‍िर का पंड‍ित कैसे कुछ सालों में बन गए करोड़पत‍ि? नरेंद्र गिरि की मौत के बाद उठे कई सवाल


अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है.

Mahant Narendra Giri Suicide Case: महंत के मौत के पर्दे के पीछे की कहानी क्या है? इसकी जांच में लगी एसआईटी की टीम अब ऐसे कई लोगों की संपत्‍त‍ि खंगाल रही है.

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अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रहे महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की जांच अब सीबीआई कर रही है. पर इस मामले में अब की जांच में सबसे बड़ी बात यह सामने आई है क‍ि कैसे महंत के साथ रहने वाला एक गनर अभिषेक मिश्रा और हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी ज‍िनकी सैलेरी महज 10 हज़ार रुपये प्रति माह थी. बीते कुछ सालों में करोड़पत‍ि बन गए. महंत के मौत के पर्दे के पीछे की कहानी क्या है? इसकी जांच में लगी एसआईटी की टीम अब ऐसे कई लोगों की संपत्‍त‍ि खंगाल रही है. एसआईटी इन तीनों के अलावा आनंद गिरी, आद्या प्रसाद तिवारी के संदीप तिवारी और महंत नरेंद्र गिरी के सुरक्षाकर्म‍ियों की संपत्ति तलाश करने में जुटी है.

महज 10 हज़ार रुपये की सैलरी वाला पंड‍ित कैसे बना करोड़पत‍ि?
महंत नरेंद्र गिरी आत्महत्या मामले में एसआईटी की टीम आनंद गिरी, आद्या प्रसाद तिवारी और संदीप तिवारी के आमदनी और प्रॉपर्टी के कागजात पुलिस खनगल रही है. किसके नाम कितनी प्रॉपर्टी है और आमदनी क्या है? बड़े हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी का सैलेरी महज 10 हज़ार रुपये प्रति माह है लेकिन उन्होंने नैनी शिव नगर में 3 बिस्सा की जमीन पर आलीशान मकान बनाया है. साथ में अपने पुस्तैनी मकान को भी बनवाया है. नैनी की आलीशान मकान की कीमत करोड़ों की है. आद्या प्रसाद तिवारी अपने पूरी परिवार के साथ नैनी के इस मकान में रहते थे. महंत नरेंद्र गिरी ने कथित सुसाइड नोट में आद्या प्रसाद तिवारी और उनके बेटे का भी नाम लिखा है. बताया जा रहा है कि बड़े हनुमान मंदिर के चढ़ावा को लेकर नाराज थे. महंत नरेंद्र गिरी, पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी ने महंत नरेंद्र गिरी को हिसाब भी दिया था, जिसके बाद बड़े हनुमान मंदिर में सीसीटीवी कैमरा लगाया गया. एसआईटी की टीम आद्या प्रसाद तिवारी के नैनी के इस मकान भी आई थी. पुलिस ने पूरे घर की तलाशी ली है.

आद्या प्रसाद तिवारी के बहू ममता तिवारी ने बताया है क‍ि उनके ससुर की सैलरी 10 हज़ार रुपये प्रति माह थी. यहां मकान बनवाया, गांव पर पुस्तैनी मकान बनवाया. पुलिस यहां आयी थी और पूरे घर की तलाशी ली ऊपर नीचे हर तरफ की. आद्या प्रसाद तिवारी के एक पडोसी महिला ने बताया क‍ि रात में पुलिस आई थी सिविल ड्रेस में और पूरे घर में तलाशी ली. वो अपने घर से देख रही थी.

महंत के गनर अभ‍िषेक पर एसआईटी की टेढ़ी न‍िगाहें
एसआईटी महंत नरेंद्र गिरि के सुरक्षाकर्मियों की संपत्ति तलाश करने में जुटी है, तो वहीं उनके गनर अभिषेक मिश्रा पर भी एसआईटी की निगाहें टेढ़ी हो गई है, जिनके पास लग्जरी कारें और करोड़ों के बंगले भी है. अभिषेक मिश्रा के घर और उसकी तस्वीरें न्‍यूज 18 के पास है जो यह बताती है कि वह कितना बड़ा आदमी बन चुका है. अब एसआईटी अभ‍िषेक के बारे में यह जानकारी जुटाने पर लगी है.
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6. चंद सालों में सड़कों से करोड़पति बनने का सच गाना अभिषेक की अलग कहानी है?
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8. अभिषेक के पिता एक पशु आहार का दुकान चलाते हैं बेटा अभिषेक मिश्रा का जलवा इतना है लाखों-करोड़ों नीचे बात नहीं करता है?
9. महंगी गाड़ियों के शौकीन और हथियारों का शौक …
10. 1 साल में 50 से 60 करोड़ की संपत्ति बना ली?
11. अभी कुछ दिनों पहले अभिषेक की शादी हुई, जिसमें नरेंद्र गिरी खुद आशीर्वाद देने पहुंचे.

जौनपुर में अभ‍िषेक की करोड़ों की संपत्‍त‍ि
जौनपुर जनपद के खुटहन थाना क्षेत्र के विशुनपुर गांव निवासी अभिषेक मिश्रा जो महंत नरेंद्र गिरी के गनर और परम भक्त बताए जाते है. अभिषेक के पिता गांव में पशु आहार की छोटी दुकान चलाते हैं, जबकि गांव में बड़ी हवेली बनी हुई है. छोटी दुकान, बड़े मकान के पीछे लेकर सवाल उठ रहे हैं. न्यूज़ 18 की टीम जब जौनपुर के खुटहन थाना क्षेत्र के बिसुनपुर गांव स्थित अभिषेक मिश्रा के आलीशान हवेली पर पहुंची हवेली की बड़ी सी गेट बंद मिला. हमें बताया गया कि अंदर कोई नहीं है परिवार के सभी लोग इन दोनों इलाहाबाद में है जब से महंत जी की मौत हुई है. हमारे कैमरे पर ग्रामीणों ने बताया कि महंत नरेंद्र गिरि पिछले 6 माह पहले इस हवेली पर आए थे अभिषेक मिश्रा के शादी समारोह कार्यक्रम में, ग्रामीणों की मानें तो चर्चा यहां तक है कि महंत जी ने ही यह हवेली बनवा कर अपने परम शिष्य अभिषेक मिश्रा को दिए हैं. फिलहाल परिवार के सभी लोग इलाहाबाद में है इलाहाबाद के आवास पर आवास पर है. अभिषेक मिश्रा के पिता सत्य प्रकाश मिश्रा जो गांव में ही छोटी सी दुकान पशु आहार की चलाते हैं.
जेल में क्‍या कर रहे हैं आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले में आत्म हत्या के लिए उकसाने के आरोपियों को नैनी सेंट्रल जेल भेजा गया है. नैनी सेंट्रल जेल में बंद आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी को मामले की संवेदनशीलता के चलते अलग-अलग सुरक्षा सेल में रखा गया है. उन्हें सामान्य बंदियों से भी अलग रखा गया है. इनके लिए जो भी संवेदनशील बंदियों के लिए सुरक्षा इंतजाम होते हैं उसका प्रबंध किया गया है. इनके लिए जेल मुख्यालय, शासन के आदेशों और जेल मैनुअल का सख्ती से पालन किया जा रहा है. नैनी सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक पी एन पांडेय के मुताबिक, जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी अलर्ट कर दिया गया है. आनन्द गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी दोनों संवेदनशील बंदी है. इसलिए इनसे मुलाकात, इनके जेल के अंदर मूवमेंट और खान पान पर नियमानुसार नजर रखी जा रही है.

वरिष्ठ जेल अधीक्षक के मुताबिक, आनन्द गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी ने जेल में अब तक कोई डिमांड नहीं की है. उन्हें अंडर ट्रायल कैदियों के जो भी अधिकार हैं मिल रहे हैं. जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों की जो ड्यूटी है उसका भी जेल प्रशासन पालन कर रहा है. इसके साथ ही तीसरे आरोपी संदीप तिवारी को भी गुरुवार 23 सितंबर को कोर्ट ने नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया है. वहीं हम आपको बता दें कि आनंद गिरि ने सीजेएम कोर्ट में अपने वकील के माध्यम से अर्जी दाखिल कर विशेष सुरक्षा दिए जाने की मांग की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए सीजेएम कोर्ट ने जेल मैनुअल और अन्य विधिक प्रावधानों के तहत का कार्रवाई का निर्देश दिया है. इसके साथ-साथ कोर्ट ने अगले आदेश तक वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी का भी आदेश दिया है. इस आदेश के तहत पांच अक्टूबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी होगी. गौरतलब है कि कोर्ट में पेशी के दौरान आनन्द गिरि के साथ धक्का मुक्की हुई थी और मारपीट व दुर्व्यवहार भी किया गया था, जिसके चलते आनन्द गिरि ने पेशी के दौरान हमले की आशंका के चलते सुरक्षा की मांग की थी.

Mahant Narendra Giri Death Case: आनंद गिरि को नैनी जेल के हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया, जानें वजह

Mahant Narendra Giri Death: महंत नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि को नैनी जेल के हाई सिक्योरिटी सेल में रखा गया (File photo)

Prayagraj News: वरिष्ठ जेल अधीक्षक के मुताबिक, आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी ने जेल में अब तक कोई डिमांड नहीं की है. उन्हें अंडर ट्रायल कैदियों के तहत सुविधाएं दी जा है.

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प्रयागराज. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की मौत के मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपियों को नैनी सेंट्रल जेल भेजा गया है. नैनी सेंट्रल जेल में बंद आनंद गिरि (Anand Giri) और आद्या प्रसाद तिवारी (Aadya Prasad Tiwari) को मामले की संवेदनशीलता के चलते अलग-अलग सुरक्षा सेल में रखा गया है. उन्हें सामान्य बंदियों से भी अलग रखा गया है. इनके लिए जो भी संवेदनशील बंदियों के लिए सुरक्षा इंतजाम होते हैं उसका प्रबंध किया गया है. इनके लिए जेल मुख्यालय, शासन के आदेशों और जेल मैनुअल का सख्ती से पालन किया जा रहा है.

नैनी सेंट्रल जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक पीएन पांडेय के मुताबिक जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों को भी अलर्ट कर दिया गया है. आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी दोनों संवेदनशील बंदी है. इसलिए इनसे मुलाकात, इनके जेल के अंदर मूवमेंट और खान पान पर नियमानुसार नजर रखी जा रही है. वरिष्ठ जेल अधीक्षक के मुताबिक, आनंद गिरि और आद्या प्रसाद तिवारी ने जेल में अब तक कोई डिमांड नहीं की है. उन्हें अंडर ट्रायल कैदियों के तहत सुविधाएं दी जा है. जेल के अधिकारियों और कर्मचारियों की जो ड्यूटी है उसका भी जेल प्रशासन पालन कर रहा है. इसके साथ ही तीसरे आरोपी संदीप तिवारी को भी गुरुवार 23 सितंबर को कोर्ट ने नैनी सेंट्रल जेल भेज दिया है.

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बता दें कि आनंद गिरि ने सीजेएम कोर्ट में अपने वकील के माध्यम से अर्जी दाखिल कर विशेष सुरक्षा दिए जाने की मांग की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए सीजेएम कोर्ट ने जेल मैनुअल और अन्य विधिक प्रावधानों के तहत का कार्रवाई का निर्देश दिया है. इसके साथ-साथ कोर्ट ने अगले आदेश तक वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी का भी आदेश दिया है. इस आदेश के तहत पांच अक्टूबर को वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी होगी. गौरतलब है कि कोर्ट में पेशी के दौरान आनंद गिरि के साथ धक्का मुक्की हुई थी और मारपीट व दुर्व्यवहार भी किया गया था. जिसके चलते आनंद गिरि ने पेशी के दौरान हमले की आशंका के चलते सुरक्षा की मांग की थी.

UP News: प्रयागराज में डबल मर्डर से मचा हड़कंप, घर में सो रही मां-बेटी का बेरहमी से कत्ल

UP News: प्रयागराज में डबल मर्डर से मचा हड़कंप

Double Murder in Prayagraj: घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस के कई आला अफसर फिंगर प्रिंट-फारेंसिक एक्सपर्ट और डॉग स्क्वायड के साथ मौके पर पहुंचे. हालांकि अभी तक कातिलों के बारे में कोई सुराग नहीं मिल सका है.

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प्रयागराज. संगम नगरी प्रयागराज (Prayagraj) जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह डबल मर्डर (Double Murder) से आस-पास के इलाकों में सनसनी फैल गई. मां और बेटी की अज्ञात बदमाशों ने निर्मम हत्या कर दी. मां और बेटी के सिर और गले में गम्भीर चोट के निशान हैं. जानकारी के मुताबिक घर का सामान भी बिखरा हुआ मिला. पुलिस का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला लूट और हत्या का लग रहा है. प्रयागराज में डबल मर्डर की घटना से इलाके में हड़ंकप मचा हुआ है. वहीं एक वर्ष के मासूम को हत्‍यारों ने सही सलामत छोड़ दिया.

हत्‍याकांड की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंची पुलिस मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है. हालांकि अभी तक हत्‍यारों के बारे में कोई सुराग नहीं मिल सका है. पुलिस की माने तो दोनों के सिर और गले पर धारदार हथियार से हमला किया गया है. बता दें कि जगदीशपुर मसनी गांव नवाबगंज थाना क्षेत्र में आता है. गांव के गोडवा बस्‍ती में गुरुवार की रात धारदार हथियार से गला काटकर दोनों की हत्या की गई. मृतक 37 वर्षीय अंजली सरोज व उसकी 8 वर्षीय पुत्री संजीवनी सरोज के गले और सिर पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं.

जानकारी के मुताबिक मां-बेटी गुरुवार की रात में घर के बरामदे में सो रही थीं, तभी बदमाशों ने हमला कर दिया. दोहरे हत्याकांड की इस सनसनीखेज वारदात को किसने और क्यों अंजाम दिया है, फिलहाल यह साफ नहीं हो सका है. सुबह घटना की जानकारी मिलने पर पुलिस के कई आला अफसर फिंगर प्रिंट-फारेंसिक एक्सपर्ट और डॉग स्क्वायड के साथ मौके पर पहुंचे. हालांकि अभी तक कातिलों के बारे में कोई सुराग नहीं मिल सका है.

UP Board Exam 2022: यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी

UP Board Exam 2022: यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं परीक्षा 2022 के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया गया है.

UP Board Exam 2022: यूपी बोर्ड शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया है. साथ ही 9वीं व 11वीं में रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि भी आगे बढ़ाई गई है.

  • News18Hindi
  • LAST UPDATED : September 24, 2021, 10:34 IST
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नई दिल्ली (UP Board Exam 2022).  माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, उत्तर प्रदेश में साल 2022 बोर्ड परीक्षा 10वीं और 12वीं के लिए आवेदन की अंतिम तिथि को 10 दिनों के लिए आगे बढ़ा दिया है. अब 10वीं और 12वीं बोर्र परीक्षा के लिए विद्यार्थी 16 अक्टूबर 2021 तक परीक्षा फॉर्म भर सकते हैं. वहीं कक्षा 9वीं और 11वीं में दाखिले के लिए रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि 16 अक्टूबर 2021 तक बढ़ा दी गई है.इस संबंध में बोर्ड ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर नोटिफिकेशन भी जारी किया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोरोना के कारण फीस नहीं जमा हो पाने के कारण एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की थी. छात्र लेट फीस 100 रुपए के साथ 19 अक्टूबर 2021 तक आवेदन कर सकते हैं.

बता दें कि पहले 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा 2022 के लिए फॉर्म भरने और कक्षा 9वीं व 11वीं में रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 6 अक्टूबर 2021निर्धारित की गई थी.

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बोर्ड सचिव  के अनुसार परीक्षा शुल्क को कोषागार में चालान के माध्यम से जमा करने की अंतिम तिथि को 22 सितंबर से बढ़ाकर 6 अक्टूबर 2021 कर दिया गया है. विलंब शुल्क के साथ फीस 13 अक्टूबर तक कोषागार में जमा होगी.

यहां देखें नोटिफिकेशन

जाने इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों का अब क्यों नहीं होता प्रशासनिक सेवाओं में दबदबा

पूरब का ऑक्सफोर्ड इलाहाबाद यूनिवर्सिटी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय का 134 साल का इतिहास रहा है, इस दौरान विश्वविद्यालय से कई आईएएस और पीसीएस अफसर निकले जिन्होंने देश के लिए बहुत योगदान दिया है

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प्रयागराज का नाम आते ही यहां स्थित केंद्रीय इलाहाबाद विश्वविद्यालय का ख्याल भी अपने आप आ ही जाता है. यह दशको से प्रयागराज के गौरव का एक प्रमुख कारण है. प्रयागराज की शिक्षा का प्रमुख केंद्र होने के कारण यहां लोग दूर-दूर से अपना भविष्य संवारने आते हैं. अपने लगभग 133 साल के सफर में विश्वविद्यालय ने कई उपलब्धियां अपने नाम की. इसने देश की ऐसी कई शख्सियतों को संवारा जिन्होंने आगे चलकर देश की विकास यात्रा में अपना अहम योगदान दिया. फिर चाहे वह राजनीति का क्षेत्र हो, साहित्य का हो, न्याय व्यवस्था हो या फिर प्रशासनिक सेवा हो. अपने अनगिनत कीर्तिमान के चलते \’पूरब का ऑक्सफोर्ड\’ कहा जाता था.

लेकिन आज तस्वीर बदल गई है, उपलब्धियों पर धूल जमने लगी है. विश्वविद्यालय के भूतकाल और वर्तमान की स्थितियों पर विचार करें तो बहुत कुछ बदल गया है. इसी में से एक है यहां के छात्रों का प्रशासनिक सेवाओं में तुलनात्मक रूप से कम चयनित होना. जी हां.. एक समय था, जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रों का प्रशासनिक सेवाओं में दबदबा हुआ करता था. परिणाम आने पर पता चलता था कि यहां के छात्रों का अधिक संख्या में चयन हुआ है. जिसके चलते इलाहाबाद विश्वविद्यालय को \’आईएएस-पीसीएस का गढ़\’ या फैक्ट्री कहा जाता था. यहां ऐसा माहौल हुआ करता था कि आधे से अधिक छात्र आईएएस पीसीएस बनने का सपना लेकर यहां आया करते थे, तंग-तंग गलियों के छोटे-छोटे से कमरे में रहकर, यहां शिक्षा लेकर सफल भी होते थे.ऐसे अनेकों उदाहरण है. अगर ज्यादा दूर ना जाए तो नृपेंद्र मिश्र (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रमुख सचिव), ए.मी.सक्सेना (योजना आयोग के पूर्व सदस्य), विकास स्वरूप (प्रवक्ता विदेश मंत्रालय) जैसे कई नाम है.

पर अफसोस धीरे-धीरे हालात बदलने लगे और छात्र कम चयनित होने लगे, जिसके कई कारण हैं. यह क्रम 2011 से शुरू हुआ, जब केवल 7 छात्रों का चयन हुआ और धीरे-धीरे संख्या घटने ही लगी. ऐसा नहीं है कि अब यहां के छात्र-छात्राओं की आंखों में सपने नहीं है, या संकल्प नहीं है.. बस आज कुछ कसर छात्र-छात्राओं की तरफ से रह जाती है तो कुुुछ उदासीनता विश्वविद्यालय भी दिखाता है. अब छात्र-छात्राएं दिल्ली की तरफ रुख करते हैं. आपको बता दें कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय 2021 में लगातार तीसरी बार भी 200 विश्वविद्यालयों की सूची से बाहर है. जो यहां की शिक्षा व्यवस्था, माहौल,शोध आदि पर प्रश्नचिन्ह लगाता है.

गिरती साख का यह है प्रमुख कारण
विश्वविद्यालय अभी भी छात्रों की पसंद है लेकिन वक्त के साथ उसने कई स्तर पर खुद को अपडेट नहीं किया है. अब यहां के छात्रों का प्रशासनिक सेवा में अधिक संख्या में चयनित ना होने के कई कारण हैं.
पहला तो, सीसैट (CSAT) लागू होने के बाद से सिविल सेवा परीक्षा का कोर्स पूरी तरह से बदल गया है लेकिन विश्वविद्यालय में स्नातक का पाठ्यक्रम अभी भी पुराना है. पढ़ाई का माध्यम हिंदी होने के कारण भी परीक्षा में अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है.
इसके साथ ही विश्वविद्यालय के हॉस्टलों में पहले शिक्षा का माहौल हुआ करता था लेकिन अब उद्दंडता और राजनीति ज्यादा देखने को मिलती है. विश्वविद्यालय मौजूदा समय शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा है जिससे छात्र छात्राओं को सटीक मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है.

महंत नरेंद्र ग‍िरी बेड पर स्टूल रखकर कैसे चढ़े, क्‍यों कमरे के बाहर का CCTV था खराब? CBI तलाश रही है इन 12 सवालों के जवाब

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु के मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है

Narendra Giri suicide Case: महंत नरेंद्र गिरि की मौत के मामले की जांच सीबीआई ने शुरू कर दी है. जांच एजेंसी के सामने इस केस की जांच शुरू करने से पहले सीसीटीवी खराब, सुसाइड नोट और सूचना और एफआईआर में अंतर समेत इन 12 सवालों के जवाब तलाश रही है जो अभी तक की पुल‍िस जांच में अनसुलझे या अधूरे हैं.

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अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि की मृत्यु के मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने की उत्तर प्रदेश सरकार की अनुशंसा को केन्‍द्र सरकार ने गुरुवार को स्‍वीकार कर ल‍िया है. अब इस मामले की जांच सीबीआई करेगी, पर जांच एजेंसी के सामने इस केस की जांच शुरू करने से पहले सीसीटीवी खराब, सुसाइड नोट और सूचना और एफआईआर में अंतर समेत इन 12 सवालों के जवाब तलाश रही है जो अभी तक की पुल‍िस जांच में अनसुलझे या अधूरे हैं. गौरतलब हैं कि महंत नरेंद्र गिरि सोमवार को अपने मठ के एक कमरे में मृत पाये गए थे. पुलिस के मुताबिक, गिरि ने कथित तौर पर पंखे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली थी.

सीबीआई ने जो जानकारी के तौर सवाल यूपी पुलिस से पूछे—-

पहला सवाल-
सूचना और एफआईआर में अंतर क्यों? अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि की मौत के बाद आधिकारिक सूचना दी गई कि दरवाजा तोड़कर अंदर घुसे शिष्यों ने फांसी का फंदा काट कर शव नीचे उतारा, जबकि उनके शिष्य अमर गिरि ने एफआईआर दर्ज कराई है कि धक्का देकर दरवाजा खोला गया.

दूसरा सवाल-
भारी शरीर गठिया का रोग, फिर महंत नरेंद्र गिरि कैसे चढ़े? उनके लिए यह आसान नहीं था कि बेड पर स्टूल रखकर चढ़ जाएं. बिना किसी की मदद के उन्होंने पंखे से फांसी का फंदा लगाया. कैसे, अकेले ही सब कुछ किया और फांसी के फंदे पर झूलकर जान दे दी?

तीसरा सवाल-
पुलिस के आने से पहले शव क्यों उतारा गया? सबसे अहम सवाल यह है कि कमरे के अंदर संदिग्ध परिस्थिति में नरेंद्र गिरि की मौत हो गई. ऐसे में बिना पुलिस को बताए उनके शव को नीचे क्यों उतारा गया? फोन से संपर्क न होने पर उनके शिष्य परेशान थे. ऐसे में पुलिस के पहुंचने का इंतजार क्यों नहीं किया गया?

चौथा सवाल-
सुसाइड नोट को वसीयत की तरह क्यों लिखा गया? सुसाइड नोट को टुकड़ों में लिखा गया है.एक तरफ नरेंद्र गिरि ने अपनी मौत के लिए आनंद गिरि, मंदिर के पूर्व पुजारी आद्या तिवारी और उनके बेटे को मौत के लिए जिम्मेदार बताया है. वहीं दूसरी ओर मठ की संपत्ति के लिए वसीयतनामा लिखा है. उनका नाम कई बार इस्तेमाल किया गया है.

पांचवां सवाल-
आत्महत्या उस कमरे में क्यों, जहां महंत कम रहते थे? नरेंद्र गिरि अपने विश्राम कक्ष में आराम करते थे. अतिथि गृह में वह तभी जाते थे जब कोई व्यक्ति बाहर से मिलने आता था. ऐसे में यह अहम सवाल है कि उन्होंने अपने एकांत कमरे को छोड़ कर बाहर बने अतिथि गृह में फांसी क्यों लगाई?

छठा सवाल-
कमरे के पास का सीसीटीवी कैमरा खराब क्यों? मठ बाघंबरी गद्दी परिसर की सीसीटीवी कैमरे से निगरानी की जाती है. नरेंद्र गिरि के एक करीबी ने आरोप लगाया कि उनके कमरे के पास लगा सीसीटीवी खराब क्यों था? क्या इसे साजिश के तहत खराब किया गया.

सातवां सवाल-
पहले भी कई आरोप लगे फिर इस आरोप पर ऐसा कदम क्यों? नरेंद्र गिरि पर कई बार संगीन आरोप लगे. प्रॉपर्टी के विवाद में पूर्व विधायक ने आरोप लगाया. नरेंद्र गिरि के शिष्य आनंद गिरि ने दो शिष्यों की हत्या का आरोप लगाया. इसके बाद ऐसा क्या हुआ कि एक फर्जी आरोप में उन्होंने अपनी जान दे दी?

आठवां सवाल-
लिखने में हिचकते थे तो इतना बड़ा नोट कैसे लिखा? नरेंद्र गिरि से जुड़े संतों ने आरोप लगाया है कि वह अपना हस्ताक्षर करने में भी दस मिनट का समय लगाते थे. कोई भी काम होता था तो शिष्य ही लिखते थे. आखिर में वह हस्ताक्षर कर देते थे. ऐसे में सवाल उठना स्वभाविक है कि उन्होंने कब और कहां बैठकर 12 पेज लिख डाले?

नौवां सवाल-
कौन कह रहा था कि वीडियो वायरल होगा, उसका जिक्र क्यों नहीं? नरेंद्र गिरि के सुसाइड नोट में लिखा है कि हरिद्वार के एक व्यक्ति ने बताया कि आनंद गिरि उनकी फोटो एक महिला के साथ गलत काम करते हुए बनाकर वायरल करने जा रहा है. सवाल यह है कि उस व्यक्ति का नाम सामने क्यों नहीं आया?

दसवां सवाल-
सुसाइड नोट से इतर एफआईआर क्यों कराई गई? नरेंद्र गिरि की मौत के बाद ही सुसाइड नोट मिल गया. सुसाइड नोट के आधार पर पुलिस अफसरों ने अपना बयान जारी किया. इसके बाद आधी रात को सुसाइड नोट से इतर जार्जटाउन थाने में सिर्फ आनंद गिरि के खिलाफ ही क्यों मुकदमा दर्ज कराया गया?

11वां सवाल
नरेंद्र गिरी की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी घटना के वक्त कहां थे. सभी के फोन के डिटेल्स और किसकी क्या लोकेशन थी? इसका भी जवाब लिया.

12वां सवाल
सीबीआई ने पूछा पिछले एक हफ्ते में कौन-कौन पुलिसकर्मी उनके साथ थे. किन-किन लोगों ने उनसे मुलाकात की मुलाकात के दौरान जो पुलिसकर्मी मौजूद थे क्या बातें हुई? इसके सवाल पूछे

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