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Glacier Burst: जानिए, उत्तराखंड में हुए जल तबाही का पानी कितने दिनों में पहुंचेगा प्रयागराज

Glacier Burst: जानिए, उत्तराखंड में हुए जल तबाही का पानी कितने दिनों में पहुंचेगा प्रयागराज

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्‍लेशियर फटने से भारी तबाही मची है. यहां का मलारी ब्रिज भी टूट गया है. जबकि 170 से ज्‍यादा लोग लापता हैं.

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्‍लेशियर फटने से भारी तबाही मची है. यहां का मलारी ब्रिज भी टूट गया है. जबकि 170 से ज्‍यादा लोग लापता हैं.

Uttarakhand Glacier Burst: अशोक सिंह ने न्यूज़ 18 को बताया कि हरिद्वार से प्रयागराज तक गंगा के पानी के पहुंचने में 7 दिन का समय लगता है. आम तौर पर एक किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बहता है, लेकिन बाढ़ के समय इसकी रफ्तार दूनी हो जाती है.

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प्रयागराज. उत्तराखंड के तपोवन में ग्लेशियर फटने (Glacier Burst) के बाद आई बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर जानमाल का नुकसान हुआ है. उत्तराखंड से निकलने वाली ज्यादातर नदियां यूपी से होकर बहती हैं, ऐसे में उत्तराखंड में बाढ़ (Flood) आने के बाद हर बार इस बात की आशंका बढ़ जाती है कि उत्तर प्रदेश में भी इसका असर होगा? हालांकि इस बार अफसरों ने आशंका कम जताई है. फिर भी सावधानियां पूरी बरती जा रही हैं क्योंकि प्रयागराज (Prayagraj) में माघ मेला चल रहा है. वहां हजारों श्रद्धालु गंगा के किनारे अस्थायी शहर में बसे हुए हैं.

इन सभी पहलुओं पर न्यूज़ 18 ने बातचीत की है उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग में बाढ़ नियंत्रण के प्रमुख अभियंता अशोक सिंह से. अशोक सिंह ने न्यूज़ 18 को बताया कि हरिद्वार से प्रयागराज तक गंगा के पानी के पहुंचने में 7 दिन का समय लगता है. आम तौर पर एक किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पानी बहता है, लेकिन बाढ़ के समय इसकी रफ्तार दूनी हो जाती है. ऐसे में रविवार की रात या सोमवार की सुबह हरिद्वार से निकलने वाला पानी अगले रविवार या सोमवार तक प्रयागराज पहुंचेगा. बाढ़ से जुड़े और कई सवालों के जवाब दिए अशोक सिंह ने.

अफसरों का दावा, यूपी में कहीं भी नहीं होगा असर

यूपी सिंचाई विभाग की मानें तो उत्तराखंड में आई बाढ़ का उत्तर प्रदेश के किसी भी हिस्से पर कोई असर नहीं होगा. अशोक सिंह ने बताया कि तपोवन में ग्लेशियर फटने के बाद नदी के बहाव में जो तीव्रता आई थी, उसे बहुत हद तक उत्तराखंड के श्रीनगर में बने जीवीके पॉवर प्रोजेक्ट पर ही नियंत्रित कर लिया जाएगा. यहां 10-15 घंटे तक पानी को रोका जा सकता है. उसके बाद यदि पानी और आगे बढ़ता है तो हरिद्वार में उसे रोकने का पूरा इंतजाम है. हरिद्वार से चले पानी को पहले बिजनौर बैराज में और फिर बुलंदशहर के नरोरा बैराज में बने बांध पर नियंत्रित किया जा सकता है. उसके बाद भी यदि जरूरत पड़ी तो कानपुर बैराज में भी उसे नियंत्रित किया जा सकता है.

श्रद्धालुओं को परेशान होने की जरूरत नहीं

अशोक सिंह ने यह भी बताया कि हरिद्वार तक नदी के जलस्तर में बिल्कुल भी बदलाव नहीं आया है. उम्मीद इसी बात की है कि नदी का जलस्तर जिस तरह से पहले चल रहा था वैसे ही चलता रहेगा. प्रयागराज तो बहुत दूर की बात है, हरिद्वार, बिजनौर और कानपुर में भी नदी के जलस्तर में कोई परिवर्तन देखने को नहीं मिलेगा. बता दें कि हरिद्वार में गंगा नदी पर बाढ़ नियंत्रण का काम यूपी सिंचाई विभाग ही करता है. उन्होंने कहा कि प्रदेश की सीमा में गंगा नदी के किनारे बसे लोगों को किसी भी तरीके से चिंता करने की कोई बात नहीं है. साथ ही साथ प्रयागराज में लगे माघ मेले में कल्पवास करने आए लोगों को और दूसरे श्रद्धालुओं को भी किसी तरीके की चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है.

फिर भी सिंचाई विभाग अलर्ट पर

प्रमुख अभियंता अशोक सिंह ने यह भी कहा कि बाढ़ की आशंका को देखते हुए पूरे यूपी में सिंचाई विभाग के अफसर और कर्मचारी अलर्ट मोड पर हैं. हरिद्वार से लेकर प्रयागराज तक दिन-रात कंट्रोल रूम के जरिए निगरानी की जा रही है. खतरा भले ही ना हो लेकिन सावधानी जरूरी है.

Tags: Uttarakhand Glacier, Uttarakhand Glacier burst

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