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CAA को लेकर यूपी में हिंसा: हाईकोर्ट में 25 मार्च को सभी याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई

सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान यूपी के कई जिलों में हिंसा हुई थी.
सीएए के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान यूपी के कई जिलों में हिंसा हुई थी.

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने सभी याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है. कोर्ट अब सभी याचिकाओं पर 25 मार्च को अंतिम सुनवाई करेगी. चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस समित गोपाल की डिवीजन बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई.

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प्रयागराज. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान उत्तर प्रदेश में दिसंबर 2019 में यूपी के कई शहरों में हिंसा हुई थी. इस हिंसा की की न्यायिक जांच की मांग को लेकर दाखिल याचिकाओं पर बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है. कोर्ट अब सभी याचिकाओं पर 25 मार्च को अंतिम सुनवाई करेगी.
बता दें मुंबई के वकील अजय कुमार के चीफ जस्टिस को लिखे पत्र पर हाईकोर्ट ने जनहित याचिका कायम की है. इसके साथ ही दर्जनभर अन्य याचिकाएं भी इस मामले में हाईकोर्ट में दाखिल की गई हैं. चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस समित गोपाल की डिवीजन बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई.

लखनऊ पोस्टर मामले में सरकार को मिली फौरी राहत
उधर लखनऊ हिंसा में सार्वजानिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के पोस्टर हटाने के मामले में योगी सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से फौरी तौर पर राहत मिल गई है. चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और राकेश सिन्हा की पीठ ने सरकार को 10 अप्रैल तक की मोहलत दी है. सरकार को यह राहत सोमवार को दाखिल की गई अर्जी पर मिली. इसमें अनुपालन रिपोर्ट पेश करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील का हवाला देकर अतिरिक्त समय मांगा गया था.
हाईकोर्ट ने दिया था पोस्टर हटाने का आदेश
बता दें कि मामले का स्वत:संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सभी आरोपियों के पोस्टर हटाने का आदेश दिया था. साथ ही 16 मार्च तक हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के समाक्ष अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा गया था. लेकिन, प्रदेश सरकार हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई. हालांकि, शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक नहीं लगाई और मामले को बड़ी पीठ के लिए रेफर कर दिया. पोस्टर हटाने की समय-सीमा ख़त्म होने के बाद सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने का हवाला देकर और वक्त मांगा था. हाईकोर्ट में अब 10 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई होगी. इस मोहलत को एक बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि यूपी सरकार पर अवमानना की कार्रवाई का खतरा मंडरा रहा था.



इनपुट: सर्वेश दुबे

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