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चिन्मयानंद केस : हाईकोर्ट की टिप्पणी- किसने किसका शोषण किया, कहना बहुत मुश्किल है
Allahabad News in Hindi

भाषा
Updated: February 4, 2020, 6:21 PM IST
चिन्मयानंद केस : हाईकोर्ट की टिप्पणी- किसने किसका शोषण किया, कहना बहुत मुश्किल है
यौन शोषण मामले में चिन्मयानंद को जमानत मिल चुकी है (File Photo)

स्वामी चिन्मयानंद मामले (Chinmayanand Case) में मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि दोनों ही पक्षों ने अपनी मर्यादा लांघी हैं, ऐसे में यह निर्णय करना बहुत मुश्किल है कि किसने किसका शोषण किया.

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प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने स्वामी चिन्मयानंद मामले (Chinmayanand Case) में मंगलवार को कहा कि दोनों ही पक्षों (चिन्मयानंद और पीड़िता छात्रा) ने अपनी मर्यादा लांघी हैं, ऐसे में यह निर्णय करना बहुत मुश्किल है कि किसने किसका शोषण किया, वास्तव में दोनों ने एक-दूसरे का इस्तेमाल किया है. न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने छात्रा के यौन शोषण के मामले में सोमवार को चिन्मयानंद को सशर्त जमानत दी थी. इससे पूर्व शिकायतकर्ता के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति चतुर्वेदी ने 16 नवंबर, 2019 को चिन्मयानंद की जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था.

अदालत ने अपने आदेश में कहा, "फिरौती के मामले में छात्रा को इस अदालत की एक समन्वय पीठ द्वारा पहले ही जमानत दी जा चुकी है और याची चिन्मयानंद की जमानत मंजूर करने से मना करने का कोई न्यायसंगत कारण नहीं बनता."

'किसी लाभ के बदले कुछ काम करने का मामला है'
अपने फैसले में अदालत ने कहा, "यह दिख रहा है कि पीड़ित छात्रा के परिजन आरोपी व्यक्ति के उदार व्यवहार से लाभान्वित हुए. वहीं, यहां कोई भी ऐसी चीज़ रिकॉर्ड में नहीं है, जिससे यह साबित हो कि छात्रा पर कथित उत्पीड़न की अवधि के दौरान, उसने अपने परिजनों से इसका जिक्र भी किया हो. इसलिए अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि यह मामला पूरी तरह से 'किसी लाभ के बदले कुछ काम करने' का है."

हालांकि, एक समय के बाद अधिक हासिल करने के लालच में लगता है कि छात्रा ने अपने साथियों के साथ आरोपी के खिलाफ षड़यंत्र रचा और अश्लील वीडियो के जरिए उसे ब्लैकमेल करने का प्रयास किया.


बीते साल सितंबर महीने में हुई थी चिन्मयानंद की गिरफ्तारी
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद बीते साल सितंबर महीने में चिन्मयानंद की गिरफ्तारी हुई थी. एसआईटी ने यूपी पुलिस के साथ मिलकर चिन्मयानंद को मुमुक्षु आश्रम से गिरफ्तार किया था. चिन्मयानंद पर उनके ही कॉलेज में पढ़ने वाली एलएलएम की एक छात्रा ने दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग का आरोप लगाया था. बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो सदस्यीय विशेष पीठ गठित करवा कर पूरे मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया था.बता दें कि, इस मामले में पीड़िता एलएलए छात्रा को चार दिसंबर 2019 को अदालत से जमानत मिल चुकी है. जस्टिस एसडी सिंह की एकलपीठ ने पीड़िता को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था. कोर्ट ने इस आधार पर पीड़िता की जमानत मंजूर की थी कि मामले की जांच कर रही एसआईटी ने चार नवंबर 2019 को चार्जशीट दाखिल कर दी है. जिसके बाद कोई और विवेचना करनी शेष नहीं है और पीड़िता को जेल में रखने का भी कोई औचित्य नहीं है.

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First published: February 4, 2020, 4:11 PM IST
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