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नेहरू की कर्मभूमि फूलपुर की महिलाएं कर रही पीएम नरेंद्र मोदी का सपना साकार

News18 Uttar Pradesh
Updated: December 11, 2019, 12:58 PM IST
नेहरू की कर्मभूमि फूलपुर की महिलाएं कर रही पीएम नरेंद्र मोदी का सपना साकार
प्रयागराज के फूलपुर में महिलाएं स्वावलंबी बन रही हैं.

प्रयागराज (Prayagraj) शहर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर बहरिया ब्लाक के कांदी गांव की महिलाएं आजीविका मिशन से जुड़कर समृद्धि की तरफ अपने कदम को बढ़ा रही हैं.

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प्रयागराज. भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू (Jawahar Lal Nehru), वीपी सिंह और जनेश्वर मिश्र जैसे कद्दावर नेताओं की कर्मभूमि रही फूलपुर (Phulpur) की महिलाएं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) के सपनों का भारत बना रही है. यहां की महिलाएं नारी सशक्तिकरण की नई इबारत लिख रही हैं. प्रयागराज शहर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर बहरिया ब्लाक के कांदी गांव की महिलाएं आजीविका मिशन से जुड़कर समृद्धि की तरफ अपने कदम को बढ़ा रही हैं. उन्होंने समूह के माध्यम से खुद को सशक्त ही नहीं बनाया है, बल्कि स्लीपर उद्योग लगाकर गांव की बेरोजगार या मजदूरी करने वाली महिलाओं को स्वावलंबी भी बना रही हैं.

ग्रामीण परिवेश की ये महिलाएं किसी मिसाल से कम नहीं हैं. कुछ साल पहले तक यह महिलाएं बेहद मुश्किलों भरे दौर से गुजर रही थीं. कोई मजदूरी कर रहा था तो कोई खेती किसानी कर रहा था. लेकिन उससे उनकी आर्थिक स्थिति सुधरने के बजाय बदहाल होती जा रही थी. आज वह आजीविका मिशन से जुड़कर ख़ुद ही नहीं बल्कि दूसरी महिलाओं को भी स्वालम्बी बना रही हैं. यहां पर काम करने वाली महिलाओं ने बताया कि पहले वह मजदूरी करती थीं, जिस पर दिन भर काम करने पर बमुश्किल उन्हें 2 जून की रोटी किसी तरह से नसीब हो पाती थी. जिसमें कभी उन्हें काम मिलता भी था तो कभी नहीं मिलता था. जिससे उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी, उन्हे अगर बेटी की शादी करनी पड़ जाती तो साहूकारों से उन्हे ब्याज पर रूपए लेने पड़ते थे.

लेकिन वह जब से इस मिशन से जुड़ी हैं उसके बाद से उनकी जिंदगी में जो बदलाव आए हैं वह किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. लेकिन इस समूह से जुड़ कर आज उनकी आर्थिक स्थिति में तो सुधार आया ही है साथ ही वह दूसरों को ख़ुद कर्ज देने की हालत में है.

महिलाओं को आर्थिक तंगी से दूर करने का लक्ष्य: ब्लॉक प्रभारी

समूह के ब्लॉक प्रभारी ने बताया कि इस योजना का मकसद सिर्फ यह है कि ग्रामीण या फिर शहरी क्षेत्रों में जो महिलाएं आर्थिक तंगी या फिर बेरोजगारी बेबसी की जिंदगी गुजार रही है. उनकी जिंदगी में कैसे खुशहाली और समृद्धि लाई जाए इसको लेकर सरकार प्रतिबद्ध है. इसी के तहत आजीविका मिशन में तमाम योजनाएं हैं, जिसका लाभ आज महिलाओं को समूह के माध्यम से मिल रहा है. इसमें उन्हें पहले ज़रूरत या व्यवसाय के अनुसार ट्रेंड किया जाता है. योजनांतर्गत आने वाले व्यवसाय के लिए पूरी तरह से ट्रेंड करने के बाद सहूलियतों के मुताबिक़ रोज़गार के संसाधन उपलब्ध कराया जाता है.

बाजार में बेहद कम दामों में बिक जाती हैं ये चीजें

संसाधन के माध्यम से समूह की महिलाएं जिन वस्तुओं का निर्माण करतीं हैं, उसे बाज़ार में बेहद कम दामों में दुकानों पर सेल किया जाता है. जो दुकानदार पहले दूसरे शहरों का सफ़र करके सामानों की ख़रीदारी करते थे, उन्हें वही सामान अब बेहद आसानी से औऱ कम दाम में उन्ही के शॉप पर उपलब्ध हो जाता है. जिससे उनकी आमदनी में तो इजाफा हो ही रहा है, साथ वह दूसरी महिलाओं को भी स्वावलम्बी बना रहीं हैं.ये भी पढ़ें:

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First published: December 11, 2019, 12:56 PM IST
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