यूपी सरकार ने HC में पेश किया प्रवासी श्रमिकों के रोजगार का ले आउट प्लान
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यूपी सरकार ने HC में पेश किया प्रवासी श्रमिकों के रोजगार का ले आउट प्लान
HC में पेश किया प्रवासी श्रमिकों के रोजगार का ले आउट प्लान (file photo)

कोर्ट (Court) ने यह भी पूछा था कि बाहर से लौट कर आये मजदूरों (Labours) को जीविकोपार्जन के लिए दूसरे राज्यों में जाने में कमी लाने के लिए प्रदेश में पुनर्वास की क्या योजना है.

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प्रयागराज. लॉकडाउन (Lockdown) में बड़ी तादात में बाहरी राज्यों से आ रहे प्रवासी मजदूरों (Migrant Workers) के पुनर्वास और गावों में कोरोना का संक्रमण फैलने (Corona Epidemic)  से रोकने को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) में सोमवार को सुनवाई हुई. राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपना ले आउट प्लान पेश किया. सरकार ने ले आउट प्लान में प्रवासी कामगारों के पुनर्वास और कोरोना का संक्रमण को रोकने के लिए अब तक उठाये गये कदमों की जानकारी दी है. राज्य सरकार के श्रम विभाग और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने दूसरे राज्यों से आये मजदूरों के पुनर्वास और कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के उठाये गये कदमों की जानकारी दी.

जिसके बाद कोर्ट ने याची से सरकार द्वारा पेश की गई जानकारी पर जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई अब 9 जून को होगी. अधिवक्ता ऋतेश श्रीवास्तव व गौरव त्रिपाठी की ओर से दाखिल पत्र याचिका पर जनहित याचिका कायम कर सुनवाई के बाद चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर और जस्टिस रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने ये आदेश दिया है. गौरतलब है कि कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि दूसरे राज्यों से आ रहे मजदूरों एवं उनके परिवार के इलाज और पुनर्वास सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना वायरस फैलने से रोकने की नीति और मानक क्या है.

कोर्ट ने यह भी पूछा था कि बाहर से लौट कर आये मजदूरों को जीविकोपार्जन के लिए दूसरे राज्यों में जाने में कमी लाने के लिए प्रदेश में पुनर्वास की क्या योजना है. जिसके जवाब में राज्य सरकार की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने अदालत में दस्तावेज दाखिल किये हैं. पत्र याचिका में कहा गया है कि प्रत्येक नागरिक को देश के किसी कोने में जीविकोपार्जन के लिए जाने और निवास का संवैधानिक अधिकार है. मजदूरों की मेहनत के बल पर विकास करने वाले राज्यों का वैधानिक दायित्व है कि वे उन्हें भूखे बेहाल होकर राज्य छोड़ने को विवश न करें. उनके रहने खाने का इंतजाम करें.



याचीगणों का कहना है कि मजदूर सडकों पर भूखे प्यासे परिवार सहित अपने राज्य के लिए निकल पडे़ है. ऐसे में ट्रेनों में उनके खाने पीने का उचित इंतजाम नहीं है. खाने को लेकर स्टेशनों पर अफरा तफरी मचाने की घटनाएं हुई हैं. याचिका में मजदूरों के मानव गरिमा के साथ भोजन की व्यवस्था करने का सामान्य आदेश जारी करने की भी मांग की गयी है.



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First published: June 2, 2020, 8:44 AM IST
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