अमेठी: दो मुस्लिम परिवार ने PM आवास योजना का लाभ लेने से किया इनकार, यह है वजह

जायस नगर पालिका के चेयरमैन कहते हैं कि ये परिवार दीन के कारण आवास योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं. वहीं परिवार का कहना है कि दीन की कोई बात नहीं है. हमें योजना की पूरी किश्त एकमुश्त जारी की जाए.

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 3, 2018, 5:12 PM IST
अमेठी: दो मुस्लिम परिवार ने PM आवास योजना का लाभ लेने से किया इनकार, यह है वजह
प्रधानमंत्री आवास योजना पर बोलते सैयद मोजिज मेहंदी. Photo: News 18
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Updated: September 3, 2018, 5:12 PM IST
उत्तर प्रदेश के अमेठी में प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ा एक मामला सामने आया है. यहां जायस कस्बे में रहने वाले दो मुस्लिम परिवारों ने प्रधानमंत्री योजना आवास का लाभ लेने से साफ इनकार कर दिया है. जब न्यूज 18 ने इस पूरे मामले की पड़ताल की तो जायस नगर पालिका के चेयरमैन कहते हैं कि ये परिवार दीन के कारण आवास योजना का लाभ नहीं ले रहे हैं. वहीं परिवार का कहना है कि दीन की कोई बात नहीं है. हमें योजना की पूरी किश्त एकमुश्त जारी की जाए.

एक परिवार ने कैमरे पर बोलने से साफ मना कर दिया, जबकि दूसरे परिवार ने प्रधानमंत्री की योजना को ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी हुई बताया. इनका कहना था कि सरकार पहली किस्त 50,000 रुपए दे देती है. उसके बाद अधिकारी और कर्मचारी जबरन इन्हें परेशान करते हैं. उनके परिवार की स्थिति भी ऐसी नहीं है कि बाजार से उधार लेकर इस योजना को पूरा करें. ऐसे में ये लोग इस योजना से ही किनारा काट लेने में ही अपनी भलाई समझते हैं. वह अपने टूटे फूटे मकान में ही गुजर बसर करना चाहते हैं.

'परिवार कहते हैं कि जकात या दान का पैसा नहीं चाहिए'

Amethi muslim family on PM Awas yojana
जायस नगर पालिका के चेयरमैन महेश सोनकर. Photo: News 18


दरअसल जायस कस्बे के सैदाना पुलिस चौकी के पड़ोस में रहने वाले दो मुस्लिम परिवारों ने प्रधानमंत्री आवास योजना लेने से मना कर दिया है. जायस नगर पालिका के चेयरमैन महेश सोनकर कहते हैं कि हमारी जानकारी में दो लोग ऐसे है जो पैसा लेना नहीं चाहते हैं. ये कह रहे हैं कि हमें दीन का सहारा है, जकात या दान का पैसा नहीं चाहिए. महेश सोनकर कहते हैं कि हमने कई बार जाकर उनको समझाया कि ये जकात नहीं है. ये प्रधानमंत्री मोदी की महत्वकांक्षी योजना हैं कि हर कच्ची कोठरी वालों और झुग्गी-झोपड़ी वाले को मकान दिया जाए. लेकिन वे तैयार नहीं हो रहें है.

वह कहते हैं कि ये उनकी व्यक्तिगत सोच है जबकि अन्य मुस्लिम परिवार अपने घरों पर छत डलवा रहे हैं. अपने को महफूज कर रहे हैं. चेयरमैन ने बताया कि हमारे यहां 809 प्रधानमंत्री आवास आए हैं और सभी का आवास बन रहे हैं. झुग्गी-झोपड़ी और कच्चे मकान वालों को आवास दिए गए हैं.

दीन की बात नहीं, पूरी किश्त मिले तो बना लें कमरा
वहीं इनमें से एक परिवार के लाभार्थी सैयद मोजिज मेंहदी कुछ अलग ही बात बयां करते हैं. वह कहते हैं कि हम आवास लेना चाहते हैं ​लेकिन 50 हजार रुपए हम उसमें लगाएंगे या बच्चों को भूखा मारेंगे. हमने पीएम को लिखा है कि या तो हमें डेढ़ लाख रुपए दिया जाए या हमसे पूरा पैसा वापस ले लिया जाए.
वह कहते हैं कि उनके पास बाथरूम और शौचालय बना हुआ है. डेढ़ लाख दिया जाए जिससे हम एक दीवार और एक कमरा बनवा लेंगे.

मोजिज मेहंदी कहते हैं कि हमें 50 हजार रुपए मिला है लेकिन उसको हम खर्च नहीं कर सकते हैं. अगर हम उसमें से 10 हजार रुपए भी खर्च कर देंगे तो हमारे बच्चे भूखे मर जाएंगे. वह कहते हैं कि ये दीन का मामला नहीं है. हमें डेढ़ लाख रुपए मिल जाएं तो हम कल कमरा बनवा दें. पूरी किश्त एक साथ मिले.

'हम बस उधार से घबराते हैं'

Amethi muslim on PM Awas Yojana
कुशनुमा नकवी. Photo: News 18


सैयद मोजिज मेहंदी की पत्नी कुशनुमा नकवी कहती हैं कि हमारे पास कोई आमदनी नहीं है इसलिए हम आवास नहीं बना पा रहें हैं. हमारे यहां एक दीवार और एक कमरे की जरूरत है, अगर बन जाएगा तो ठीक हैं नहीं तो कोई बात नहीं है. उधार पैसे कोई देगा भी नहीं और हम किससे उधार लेंगे. दीन की बात पर कुशनुमा कहती हैं कि ऐसा कुछ नहीं हैं. हम बस उधार से घबराते हैं. कर्जदार घर आकर घेरेंगे तो हम कैसे रुपए ले लें? वह कहती हैं कि हमारे पति ने इसी को लेकर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और डीएम को पत्र लिखा गया हैं कि हमें पैसा एक साथ मिल जाए.

(रिपोर्ट: पप्पू पांडेय)

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