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पंचायत चुनाव से पहले अमेठी में एक परिवार की बेबसी की तस्वीर आई सामने, जर्जर पंचायत भवन में रहने को मजबूर

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में अधिकारियों की लापरवाही से एक दलित महिला अपने परिवार के साथ पिछले चार सालों से गांव के बाहर बने जर्जर पंचायत भवन में रहने को मजबूर है
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में अधिकारियों की लापरवाही से एक दलित महिला अपने परिवार के साथ पिछले चार सालों से गांव के बाहर बने जर्जर पंचायत भवन में रहने को मजबूर है

Uttar Pradesh Panchayat Chunav 2021: योगी सरकार जहां केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना चलाकर गरीबों को छत देने की कवायद में जुटी है, वहीं केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में अधिकारियों की लापरवाही से एक महिला अपने परिवार के साथ पिछले चार सालों से गांव के बाहर बने जर्जर पंचायत भवन में रहने को मजबूर है.

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एक तरफ प्रदेश की भाजपा सरकार 2022 तक हर गरीब के सर पर छत देने की बात कर रही है, तो वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी में अधिकारियों की लापरवाही से एक महिला अपने परिवार के साथ पिछले चार सालों से गांव के बाहर बने जर्जर पंचायत भवन में रहने को मजबूर है. केंद्र सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना तो वहीं प्रदेश सरकार मुख्यमंत्री आवास योजना चलाकर गरीबों को छत देने की कवायद में जुटी है, लेकिन जब ऐसी तस्वीर निकल कर सामने आती है तो सरकार के सभी दावों पर पानी फिर जाता है. साथ ही उसके सरकारी नुमाइंदों की इंसानियत मिट्टी में मिल जाती है और उस परिवार के लिए बचती है तो सिर्फ उम्मीद की एक किरण.

दिहाड़ी मजदूरी कर परिवार का पेट पाल रहा है बेबस परिवार
ये पूरा मामला मुसाफिरखाना तहसील के पलिया चंदापुर गांव का है. जहां की रहने वाली एक महिला गीता अपने पति उदयराज और अपने बच्चे के साथ पिछले 4 सालों से गांव के बाहर बने जर्जर हो चुके पंचायत भवन में रह रही है. गीता का पति दिहाड़ी मजदूरी कर अपने और अपने बीवी बच्चे का पेट पालता है. महिला की माने तो वो अपने पति और बच्चे के साथ पिछले चार पांच सालों ने इसी पंचायत भवन में रह रही है. उसका पति दिहाड़ी मजदूरी करता है जिससे उसके परिवार का खर्चा चलता है. गीता आवास के लिए प्रधान के पास भी गई लेकिन उसे आवास नही मिला.

ग्रामीणों ने बतायी बेबस परिवार की कहानी
वही गांव की ही महिला ने कहा कि ये महिला पिछले तीन सालों से इसी पंचायत भवन में रह रही है. कालोनी के लिए ये प्रधान के पास भी गई थी लेकिन प्रधान ने कहा कि तुम्हे कालोनी नही मिलेगी.



ग्राम प्रधान की सफाई कहा गांव गांव में नहीं था पीड़ित का परिवार
वहीं पूरे मामले पर निवर्तमान ग्राम प्रधान ने कहा कि उसके पुश्तैनी मकान पर पटीदारों ने कब्जा कर रखा है. कुछ खेत उसके पास है लेकिन उस पर भी मुकदमा चल रहा है. खेत मे मकान बनाकर ये लोग रही भी रहे थे लेकिन कुछ समय बाद ये अपने ननिहाल चला गया जिसके बाद पाटीदारों ने उस पर कब्जा कर लिया. ये पिछले एक साल से पंचायत भवन में रह है. इसे आवास दिलवाने के प्रयास भी किया गया लेकिन सब आवास के लिए सूची बन रही थी तब ये गायब हो गया था.

डीएम अरुण कुमार ने CDO से मामले की जांचकर कराने के दिए निर्देश
वहीं पूरे मामले पर अमेठी डीएम ने कहा कि मीडिया के माध्यम से ये मामला मेरे संज्ञान में आया है. बताया जा रहा है कि कोई परिवार पंचायत भवन के निवास कर रहा है. प्रारंभिक जांच के लिए मुख्य विकास अधिकारी को कहा गया है कि तत्काल वो इस मामले पर रिपोर्ट मंगवाए और पात्रता के आधार पर आवास आवंटन की कार्यवाही करें और अगर उन्हें और कोई सहायता चाहिए वो भी उन्हें उपलब्ध करवाए.

सरकार की आवास योजना की पात्रता सूची पर सवाल
अब सवाल ये उठता है जिले में हर गरीबों तक पीएम आवास योजना के पात्र लाभार्थियों तक पक्के आवास पहुचाने का दावा करने वाले सरकार और प्रसाशन की योजनाएं आखिर कहां चली जाती है. जो इस गरीब परिवार को चार सालों से जर्जर पंचायत भवन में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है. सवाल प्रसाशन से भी है कि क्या ये परिवार इस योजना के पात्र नही है. अगर है तो लाभ क्यों नही मिला और नही है तो किस तरह होती है पात्रता एक बड़ा सवाल जरूर खड़ा करता है.
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