अमेठी में जर्जर गाड़ियों से कैसे आग बुझाएगी फायर ब्रिगेड!

अमेठी जिले में कुल 6 फायर स्टेशन है और अग्निशमन के लिए ये वाहन कम है और जो हैं भी वो काफी पुराने जर्जर हो चुके है इसलिए आग की घटनाओं को रोकने में असफल सबित हो रहे हैं.

ETV UP/Uttarakhand
Updated: March 19, 2018, 8:26 PM IST
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Updated: March 19, 2018, 8:26 PM IST
यूपी के अमेठी में गर्मी शुरू होते ही आग लगने का सिलसिला शुरू हो गया है. राहुत गांधी के इस संसदीय क्षेत्र में फायर सर्विस की हालत बद से बद्तर है. जिला बने कई वर्षों का समय बीत गया है लेकिन अभी भी जिले की फायर सर्विस के पास बुनियादी सुविधाये नहीं हैं, जिससे कि समय पर आग पर काबू पाया जा सके. जो संसाधन है भी वी इतनी ज्यादा जर्जर स्थिती में है कि उनसे आग पर काबू पाना असंभव है.

दरअसल अमेठी में अग्निशमन विभाग को संचालित करने के लिए कुल 157 कर्मचारियों की आवश्यकता है और हैं मात्र 80 कर्मचारी. वहीं फायर सर्विस के अधिकारिओं का कहना है कि जिले में कुल 6 फायर सर्विस स्टेशन हैं जिनमें 37 वाहनों की आवश्यकता है. लेकिन पूरे अमेठी जिले में सिर्फ आठ गाड़ियां हैं. इतना ही नहीं जो हैं भी वो समय से घटना स्थल पर पहुंचते नहीं पाती हैं.

अमेठी के ग्रामीण लोगों की माने तो जब भी कोई आग की घटना होती है तो फायर सर्विस को फोन किया जाता है लेकिन जब तक वो मौके पर पहुंचते हैं तब तक आग अपनी तबाही से लाखों का नुकसान कर चुकी होती है. ऐसे में फायर विभाग का कोई फायदा नहीं मिल पाता है क्योंकि जिला मुख्यालय और अमेठी फायर सर्विस स्टेशन यहां से काफी दूर है. इसलिए गाड़ी पहुंचने में काफी वक्त लग जाता है. अगर हम लोग फायर विभाग के भरोसे रहें तो काफी नुकसान हो जाएगा.

वहीं अमेठी फायर सर्विस की बात करें तो जिले में कुल 6 फायर स्टेशन है और अग्निशमन के लिए ये वाहन कम है और जो हैं भी वो काफी पुराने जर्जर हो चुके है इसलिए आग की घटनाओं को रोकने में असफल सबित हो रहे हैं. अगर पिछले कुछ सालों के आग के आकड़ों पर नज़र डाले तो साल 2016 में कुल 393, 2017 में 513 और इस साल अब तक 59 आग की घटनाएं हो चुकी हैं. कुल मिलाकर 965 घटनाएं में किसानों और अलग-अलग गांवों में आग के कहर से करोंड़ो का नुकसान हुआ है, लेकिन अमेठी का फायर विभाग महकम है कि अभी भी अलर्ट मोड में नहीं दिखा रहा है.

(पप्पू पाण्डेय की रिपोर्ट)

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