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लोकसभा चुनाव रिजल्ट 2019: कहां चूक हो गई राहुल गांधी से, राफेल का मुद्दा बेअसर रहा?

लोकसभा के रुझानों और नतीजों ने कांग्रेस खेमे में खलबली मचा दी है. कांग्रेस के कई दिग्गज इस चुनाव में धाराशाई हो गए हैं. पिछले कई महीनों से कांग्रेस पार्टी राफेल के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही थी.

लोकसभा के रुझानों और नतीजों ने कांग्रेस खेमे में खलबली मचा दी है. कांग्रेस के कई दिग्गज इस चुनाव में धाराशाई हो गए हैं. पिछले कई महीनों से कांग्रेस पार्टी राफेल के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही थी.

लोकसभा के रुझानों और नतीजों ने कांग्रेस खेमे में खलबली मचा दी है. कांग्रेस के कई दिग्गज इस चुनाव में धाराशाई हो गए हैं. पिछले कई महीनों से कांग्रेस पार्टी राफेल के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही थी.

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लोकसभा चुनाव 2019 के परिणाम ने विपक्षी पार्टियों की जमीन खिसका दी है. बीजेपी पिछले लोकसभा चुनाव में किए अपने प्रदर्शन से कहीं ज्यादा जबरदस्त प्रदर्शन किया है. अकेली बीजेपी 300 का आंकड़ा पार करने वाली है. वहीं कांग्रेस पार्टी इस बार भी दहाई का आंकड़ा पार करते नहीं दिख रही है. मोदी लहर ने इस बार भी कांग्रेस पार्टी को जमीन से उठने नहीं दिया. ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर वे कौन-कौन से कारण हैं, जिनकी वजह से कांग्रेस पार्टी का इस चुनाव में बुरा हस्र हुआ है.

बता दें कि लोकसभा के रुझानों और नतीजों ने कांग्रेस खेमे में खलबली मचा दी है. कांग्रेस के कई दिग्गज इस चुनाव में धाराशाई हो गए हैं. पिछले कई महीनों से कांग्रेस पार्टी राफेल के मुद्दे को जोर-शोर से उठा रही थी. कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को राफेल के अलावा कोई और मुद्दा नजर नहीं आ रहा था. देश की सबसे बड़ी अदालत में भी राफेल का मुद्दा गया. सुप्रीम कोर्ट ने भी राफेल मामले पर मोदी सरकार को क्लीनचिट दे दी. इधर राहुल गांधी राफेल के मुद्दे को लगातार उठाते रहे. चुनाव की घोषणा के बाद से भी राहुल गांधी को लगा कि राफेल मसले पर वह मोदी सरकार को घेर लेंगे, लेकिन राहुल गांधी का यह दांव उल्टा पड़ा.

पीएम मोदी की फाइल फोटो




इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अपनी हर रैली में राफेल का मुद्दा उठा रहे थे, लेकिन ऑपरेशन बालाकोट के बाद बीजेपी राष्ट्रवाद की लहर पर सवार हो गई और कांग्रेस राफेल मुद्दे को छोड़ नहीं पाई. चुनाव के नतीजों ने साबित कर दिया है कि बालाकोट स्ट्राइक पर कांग्रेस पार्टी का सबूत मांगना जनता को नागवार गुजरा.
बता दें कि पीएम मोदी ने इस चुनाव को बीजेपी और राष्ट्रवाद को एक साथ जोड़ दिया. मोदी अपनी हर रैलियों में ऑपरेशन बालाकोट के मुद्दे को खूब भुनाया. मोदी ने इस तरह का माहौल पैदा कर दिया जिससे यह लगने लगा कि बीजेपी का विरोध मतलब सेना का विरोध.

राहुल गांधी चुनाव के अंत तक पीएम मोदी की रैलियों का तोड़ नहीं निकाल पाए. बता दें कि बीते 2 सालों से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राफेल डील में पीएम मोदी पर सीधे घोटाले के आरोप लगाते आ रहे थे. चुनाव के नतीजों ने साबित कर दिया है कि राहुल गांधी का सीधे पीएम मोदी पर घोटाले का आरोप लगाना पसंद नहीं.

कांग्रेस रणनीतिकारों की सबसे बड़ी चुक हुई कि वह यूपी की 80 सीटों पर अपना प्रत्याशी उतार दिया. इससे नतीजा यह हुआ कि ज्यादातर जगहों की एनडीए और गठबंधन की हार में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवारो ने अहम रोल अदा किया.

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