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अमेठी लोकसभा सीट: जब राजीव गांधी के सामने मेनका गांधी की हुई थी जमानत जब्त

News18Hindi
Updated: April 27, 2019, 6:56 PM IST
अमेठी लोकसभा सीट: जब राजीव गांधी के सामने मेनका गांधी की हुई थी जमानत जब्त
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अमेठी लोकसभा सीट पर इस बार चुनाव 6 मई को होने हैं. मुख्य मुकाबला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और बीजेपी सरकार में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के बीच में है.

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  • Last Updated: April 27, 2019, 6:56 PM IST
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अमेठी लोकसभा सीट पर इस बार 6 मई को चुनाव होने हैं. मुख्य मुकाबला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और बीजेपी सरकार में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के बीच में है. दोनों के बीच वर्ष 2014 में मुकाबला हुआ था और राहुल गांधी महज एक लाख वोटों से ही जीत पाए थे. राहुल गांधी की इस कम वोटों से हुई जीत को बीजेपी ने बड़ा राजनीतिक संदेश माना था.

2014 के बाद अमेठी में स्मृति

बीजेपी उम्मीदवार स्मृति ईरानी 2014 में भले ही चुनाव हार गई थीं लेकिन उसके बाद वो कई बार इस क्षेत्र में जाती रही हैं. पिछले पांच सालों के दौरान उन्होंने क्षेत्र की जनता को यह संदेश देने की कोशिश की है कि अमेठी की असली हिमायती तो वो हैं. अब एक बार फिर चुनाव से पहले सघन चुनावी अभियान में व्यस्त हैं. वो लगातार में जनसंपर्क में व्यस्त हैं. स्मृति इरानी लोगों के बीच यह कह कर जनसमर्थन जुटाने की कोशिश कर रही हैं कि अमेठी पिछले 15 सालों से एक लापता सांसद के बोझ से दबी है.

राहुल का प्रचार अभियान

स्मृति ईरानी के इतर राहुल गांधी का चुनाव प्रचार सिर्फ अमेठी तक ही सिमटा हुआ नहीं है. राहुल कांग्रेस के स्टार प्रचारक हैं और देशभर में जा रहे हैं. हालांकि प्रियंका गांधी को पूर्वी यूपी का प्रभार सौंपा गया है और उनकी निगरानी लगातार इस विशेष सीट पर जारी है.



चुनावी इतिहास
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1967 में पहली बार इस सीट पर चुनाव हुए थे. इस चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी विद्याधर वाजपेयी ने जीत हासिल की. विद्याधर 1971 का चुनाव भी यहां से जीते. 1977 में जनता पार्टी की लहर थी और यहां से रविंद्र प्रताप सिंह ने बाजी मारी. 1980 में हुए लोकसभा चुनाव में यह सीट कांग्रेस ने फिर अपने कब्जे में कर ली. इस सीटे इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी जीते. बाद में संजय गांधी की बात के बाद जो उपचुनाव हुए तो राजीव गांधी ने इस सीट को चुना और जीते. इस उपचुनाव में राजीव गांधी के सामने लोकदल के टिकट पर शरद यादव लड़े. शरद को बुरी हार का सामना करना पड़ा था. 1984 में इस सीट पर गांधी परिवार के ही दो सदस्यों में मुकाबला हुआ. राजीव गांधी और मेनका गांधी एक-दूसरे के सामने थे. मेनका गांधी की बुरी हार हुई. फिर 89 में राजीव यहां से जीते. 1991 का चुनाव भी राजीव गांधी यहां से जीते लेकिन उनकी हत्या के बाद हुए उपचुनाव में कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा ने जीत हासिल की. फिर सतीश शर्मा ने 96 में भी यहां से चुनाव जीता. बीजेपी को यह सीट 1998 में पहली और आखिरी बार हासिल हुई. बीजेपी के टिकट पर संजय सिंह चुनाव जीते थे. उसके बाद ये सीट लगातार लगातार गांधी परिवार के ही पास है. 1999 में इस सीट पर सोनिया गांधी जीती थीं. बाद में 2004 से यहां राहुल गांधी जीतते आ रहे हैं.

जब संजय गांधी इस सीट से हारे

1977 में हुए लोकसभा चुनाव में संजय गांधी पहली बार इस सीट पर चुनाव लड़ने पहुंचे थे. लेकिन इमरजेंसी लगाने की वजह से इंदिरा गांधी सरकार की छवि इस तरह खराब हुई थी कि संजय गांधी को बुरी हार मिली थी. संजय गांधी को जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे रविंद्र प्रताप सिंह ने हराया था. हालांकि संजय ने इस हार का बदला तीन साल बाद हुए चुनाव में रविंद्र प्रताप सिंह को हरा कर चुकाया था.

जब राजीव शरद यादव को हराया

सांसद बनने के कुछ ही महीने बाद संजय गांधी की मौत हो गई थी. इसके बाद अमेठी सीट पर 1981 में उपचुनाव हुए. राजीव गांधी राजनीति में दाखिल हो चुके थे. उन्होंने अपने राजनीतिक पदार्पण के लिए अमेठी सीट का चुनाव किया था. राजीव के सामने चौधरी चरण सिंह की पार्टी लोकदल के प्रत्याशी के रूप में शरद यादव चुनाव लड़ने पहुंचे. चौधरी चरण सिंह प्रधानमंत्री रह चुके थे और उनका तब यूपी की राजनीति में काफी दखल माना जाता था. लेकिन चुनाव में राजीव गांधी ने बड़े अंतर से जीत हासिल की.

1984 का चुनाव

साल 1984 का चुनाव इस सीट का सबसे दिलचस्प चुनाव हुआ था. उस चुनाव में गांधी परिवार के ही दो सदस्य आमने-सामने थे. एक तरफ से राजीव गांधी और दूसरी तरफ मेनका गांधी. इस चुनाव में मेनका गांधी की जमानत जब्त हो गई थी. राजीव गांधी ने 3,65,041 वोट हासिल किए थे जो कुल पड़े वोटों का 83.67 प्रतिशत वोट हासिल किए थे. मेनका गांधी को कुल 50,163 वोट मिले थे.

सोनिया गांधी का स्वागत



राजीव गांधी की मौत के बाद लंबे समय तक सोनिया गांधी राजनीति से दूर रहीं. लेकिन उन्होंने वापस लौटने की सोची तो उसी सीट का चुनाव किया जिससे राजीव गांधी जीतते रहे थे. 1999 जब सोनिया गांधी ने पहला चुनाव लड़ा तो उनके सामने संजय सिंह थे. लेकिन संजय सिंह को सोनिया गांधी से जबरदस्त हार का सामना करना पड़ा था. सोनिया ने संजय को करीब तीन लाख वोटों से चुनाव हराया था.

चुनावी समीकरण

अमेठी लोकसभा क्षेत्र में तिलोई, सलोन, जगदीशपुर, गौरीगंज और अमेठी विधानसभा सीटें आती हैं. इस सीट पर दलित और मुस्लिम मतदाताओं की अच्छी तादाद है. मुस्लिम मतदाता करीब 4 लाख हैं और साढ़े तीन लाख के करीब दलित वोटर हैं. इसके अलावा इनमें पासी, यादव, राजपूत और ब्राह्मण भी इस सीट पर अच्छी संख्या में हैं.

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First published: April 27, 2019, 5:46 PM IST
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