चहेते नेता की अर्थी को श्मशान तक ले गईं स्मृति ईरानी, मां से बोलीं-आज से मैं आपका बेटा

स्मृति ईरानी ने शव को घर से श्मशान तक अपने कंधों पर उठाए रखा. 300 मीटर की दूरी और हजारों की भीड़. तमाम लोगों ने कहा कि दीदी हटो हम पकड़ते हैं, लेकिन बिना कुछ बोले स्मृति ईरानी चुपचाप अर्थी थामे श्मशान की ओर बढ़ती रहीं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: May 27, 2019, 11:48 AM IST
चहेते नेता की अर्थी को श्मशान तक ले गईं स्मृति ईरानी, मां से बोलीं-आज से मैं आपका बेटा
स्‍मृति ईरानी श्‍मशान तक ले गईं अर्थी, चहेते नेता की मां से बोलीं- आज से मैं आपका बेटा
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Updated: May 27, 2019, 11:48 AM IST
अमेठी की नई सांसद स्मृति ईरानी रविवार को दिवंगत पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह के घर पहुंचीं. उन्होंने सुरेंद्र सिंह की मां की गोद में अपना सिर रख कर कहा कि आज से मैं ही आपका बेटा हूं. स्मृति ने जहां बड़े भाई नरेंद्र के पैर छूकर बहन होने का अहसास कराया, तो दिवंगत कार्यकर्ता की पत्नी को बांहों में भर अपनत्व का मरहम लगाने की भी कोशिश की. शादीशुदा बेटी पूजा व प्रतिमा के सिर पर अपना हाथ फेरा और कहा हर पल साथ रहेगी तेरे पापा की दीदी.

बेटे को खिलाई कसम- 'कुछ गलत नहीं करोगे'


सुरेंद्र सिंह का 21 वर्षीय बेटा अभय नवनिर्वाचित सांसद स्मृति ईरानी को देख रो पड़ा, तो उन्होंने उसे गले लगा लिया. उसका हाथ थामकर कहा, ‘कसम खाओ मेरी कि तुम कुछ गलत नहीं करोगे’. उन्होंने कहा- 'तुमने अपने पापा को और हमने अपना भाई खोया है.' इतना सुन वहां खड़ा हर शख्स सन्न रह गया.

स्मृति अभय का हाथ पकड़ घर से बाहर आईं और कहा आओ कांधा देते हैं. एक तरफ स्मृति ने अर्थी में कांधा लगाया तो दूसरी ओर बेटे अभय ने. पिता के गम में सुधबुध खो बैठा बेटा कुछ कदम चलकर लड़खड़ाया, तो भाजपा के दूसरे बड़े नेताओं ने अर्थी थाम ली.

श्मशान तक गईं स्मृति ईरानी
स्मृति ईरानी ने शव को घर से श्मशान तक अपने कंधों पर उठाए रखा. 300 मीटर की दूरी और हजारों की भीड़. तमाम लोगों ने कहा कि दीदी हटो हम पकड़ते हैं, लेकिन बिना कुछ बोले स्मृति ईरानी चुपचाप अर्थी थामे श्मशान की ओर बढ़ती रहीं. उन्होंने अर्थी को हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार रास्ते में पांच जगह जमीन पर रखा और उठाया और अंतिम बार चिता के करीब ही उसे छोड़ा.

गुस्से में थे लोग
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स्मृति ईरानी ने दिवंगत भाई सुरेंद्र सिंह की अर्थी उठाई, तो पूरा का पूरा बरौलिया व अमरबोझा गांव 'जब तक सूरज- चांद रहेगा सुरेंद्र तेरा नाम रहेगा' के नारे से गूंज उठा.

इससे पहले दिल्ली से सीधे पूर्व प्रधान के घर जब स्मृति ईरानी पहुंची, तो संवेदनाएं उफान पर थी. लोग गुस्से से भरे बैठे थे. शव को देखते ही स्मृति की आंखें नम हो गईं और वह निशब्द हो गईं. उन्होंने अपने जुझारू कार्यकर्ता को मन भर के देखा और उसके चरणों में अपने सिर रख दिया.

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