Home /News /uttar-pradesh /

amid mosque and shiv temple issue know what british traveller peter mundy and skand purana says about gyanvapi

Gyanvapi Issue: प्राचीन किताबों में भी है ज्ञानवापी का जिक्र! जानें ब्रिटिश यात्री पीटर मंडी ने क्या-क्या लिखा

ब्रिटिश यात्री पीटर मंडी ने अपनी पुस्तक 'द ट्रेवल ऑफ़ पीटर मंडी इन यूरोप एंड एशिया 1608-1667' में अपनी बनारस यात्रा का जिक्र किया है.

ब्रिटिश यात्री पीटर मंडी ने अपनी पुस्तक 'द ट्रेवल ऑफ़ पीटर मंडी इन यूरोप एंड एशिया 1608-1667' में अपनी बनारस यात्रा का जिक्र किया है.

मुग़ल बादशाह शाहजहां के समय में भारत आए ब्रिटिश यात्री पीटर मंडी ने अपनी पुस्तक 'द ट्रैवल ऑफ़ पीटर मंडी इन यूरोप एंड एशिया 1608-1667' में अपनी बनारस यात्रा का जिक्र किया है और इसमें उन्होंने शिव पूजा को लेकर भी विस्तार से लिखा है.

अधिक पढ़ें ...

वाराणसी. शिव की नगरी वाराणसी में 390 साल पहले भी विश्वेश्वर शिवलिंग की पूजा की जाती थी. ब्रिटिश यात्री पीटर मंडी ने अपनी पुस्तक ‘द ट्रैवल ऑफ़ पीटर मंडी इन यूरोप एंड एशिया 1608-1667’ में अपनी बनारस यात्रा का जिक्र किया है और इसमें उन्होंने शिव पूजा को लेकर भी विस्तार से लिखा है.

मुग़ल बादशाह शाहजहां के समय में बनारस यात्रा पर आए पीटर मंडी ने इसका जिक्र करते हुए अपनी किताब में लिखा है कि ये क्षत्रिय, ब्राह्मण और बनियों की बस्ती है. काशी विश्वेश्वर महादेव का सबसे बड़ा मंदिर है, जिनकी पूजा करने दूर- दूर से लोग आते हैं.’

महादेव की मूर्ति का जिक्र
पीटर मंडी ने लिखा है कि ‘वो खुद मंदिर के अंदर गए, जहां बीच में एक ऊंची जगह पर बड़ा लंबोतरा, सादा बिना नक्काशी वाला पत्थर रखा है, जिस पर लोग गंगा नदी का पानी और दूध चढ़ाते हैं. इस मूर्ति को वहां के लोग महादेव बोलते हैं.’ मंडी ने इस पत्थर (महादेव) के ऊपर रेशमी चांदनी का ज़िक्र भी किया है.

पीटर मंडी ने अपनी इस पुस्तक में पूजा करने के विधि विधान के अलावा शिवलिंग के आस-पास गणेश चतुर्भुज मंदिर और देवी मंदिर सहित कई देव स्थानों का ज़िक्र किया है. इसके साथ ही उन्होंने लिखा है मंदिर के द्वार पर नंदी विराजमान रहते हैं.

ये भी पढ़ें- ज्ञानवापी मामले पर वाराणसी कोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला कल तक के लिए सुरक्षित

पीटर मंडी ने अपनी किताब में सीधे तौर पर ज्ञानवापी का नाम तो नहीं लिखा है, लेकिन उनके दिए विवरणों से इसका स्पष्ट संकेत मिलता है. इसके अलावा उन्होंने अपनी किताब में वर्ष 1632 में यहां फैली महामारी का भी जिक्र किया है.

‘स्कंद पुराण में भी ज्ञानवापी का जिक्र’
वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर के ट्रस्टी प्रोफ़ेसर ब्रजभूषण ओझा के मुताबिक़, स्कंद पुराण के काशी खंड में वर्णन है कि ज्ञानवापी काशी का मूल केंद्र है. ओझा स्कंद महापुराण को दिखाते हुए कहते हैं कि इस पुराण के काशी खंड के 34वें अध्याय में 36, 37, 38 एवं 39वां श्लोक ज्ञानवापी के माहात्म्य पर है. 36वें श्लोक में स्पष्ट लिखा है कि विश्वेश्वर के दक्षिण में ज्ञानवापी स्थित है. इसके साथ ही वह कहते हैं कि ‘वर्तमान स्थिति में यह काशी विश्वनाथ के उत्तर दिशा में हो गया है, क्योंकि मूल विश्वनाथ मंदिर के ध्वंस के बाद जब विश्वनाथ जी की पुन: स्थापना हुई और मंदिर निर्माण हुआ तो ज्ञानवापी और नंदी उत्तर भाग में हो गए.’

ओझा स्पष्ट करते हुए कहते हैं कि नंदी का मुंह मस्जिद की ओर होने का तात्पर्य ही है कि शिवलिंग वहां था और इस प्रकार ज्ञानवापी की भी स्थिति उस समय वहां स्थित विश्वेश्वर के दक्षिण दिशा में थी और यही स्कंद महापुराण के काशी खंड में लिखा हुआ है- ज्ञानवापीं ददर्शाथ श्री विश्वेश्वर दक्षिणे.

वह बताते हैं कि इसी अध्याय के 70वें श्लोक में भी स्पष्ट वर्णन है, जिसमें कहा गया है- इति ज्ञानं ममोद्भूतं ज्ञानवापीक्षणात्क्षणात्. इसका अर्थ है कि ज्ञानवापी के दर्शन मात्र से क्षण भर में मुझ में ज्ञान संचार हो गया. ज्ञानवापी का अर्थ ही है ज्ञान का कूप. वापी और ज्ञान संस्कृत के शब्द हैं.

Tags: Gyanvapi Masjid, Varanasi news

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर