शबनम के कृत्‍य से मनोवैज्ञानिक भी हैरान, हत्‍याकांड के पीछे ये हो सकती हैं वजहें

शबनम को फांसी दिए जाने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.

शबनम मामले पर मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि यह एक सामान्‍य घटना नहीं है कि प्रेमी ने उसे समझाया और उसने परिवार के लोगों को कत्‍ल करने का फैसला कर लिया हो. इसके पीछे शबनम की खुद की मनोदशा जिम्‍मेदार रही होगी. इस प्रकार के मामलों में देखा गया है कि कुछ लोगों के अंदर आपराधिक प्रवृत्तियां होती हैं जो हिंसा के दौरान इस हद तक चली जाती हैं.

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नई दिल्‍ली. उत्‍तर प्रदेश के अमरोहा (Amroha) की शबनम (Shabnam) को जल्‍द ही फांसी लगने वाली है. प्रेम प्रसंग के चलते सात लोगों के परिवार को कुल्‍हाड़ी से काटकर मौत के घाट उतारने वाली शबनम के दो अलग-अलग चेहरे सामने आ रहे हैं. यही वजह है कि प्रेम के वशीभूत लिखी गई इस खूनी दास्‍तां को लेकर मनोवैज्ञानिक भी हैरान हैं. उनका कहना है कि प्रेम के चलते प्रेमी या प्रेमिका को मौत के घाट उतारने के कई मामले सामने आए हैं लेकिन शबनम का मामला सामान्‍य घटना नहीं है. ऐसी घटना को एकाएक भी अंजाम नहीं दिया जा सकता. इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं.

दिल्‍ली के जाने माने मनोचिकित्‍सक डॉ. संदीप बोहरा का कहना है कि शबनम (Shabnam) का मामला एकदम असामान्‍य (रेयरेस्‍ट ऑफ द रेयर) केस है. ऐसी किसी भी घटना को सिर्फ प्रेम प्रसंग (Love Affair) के चलते अंजाम दे दिया गया, ऐसा नहीं कहा जा सकता. प्रेम संबंध को लेकर मनाही के अलावा इस घटना के पीछे एकदम सटीक क्‍या कारण था वह तो इसके जीवन को करीब से देखने या समझने वाला ही बता सकता है लेकिन अभी तक जो जानकारी सामने आई है उससे एक बात की पूरी संभावना है कि यह उसकी आपराधिक या हिंसक प्रवृत्ति के कारण हुआ है. बहुत संभव है कि शबनम के जीवन में कोई ऐसी घटना घटी हो जिससे इसके अंदर घृणा (Hate) भर गई हो या फिर यह कुदरती रूप से परिवार से डिटैच्‍ड रहती हो या फिर उसके अंदर किसी बात को लेकर गुस्‍से और बदले की भावना का भरना जो धीरे-धीरे इकठ्ठा होकर ऐसे घिनोने अपराध (Heinous Crime) में बदल जाता है.



वे कहते हैं कि यह एक सामान्‍य घटना नहीं है कि प्रेमी ने उसे समझाया और उसने परिवार के लोगों को कत्‍ल करने का फैसला कर लिया हो. इसके पीछे शबनम की खुद की मनोदशा जिम्‍मेदार रही होगी. इस प्रकार के मामलों में देखा गया है कि कुछ लोगों के अंदर आपराधिक प्रवृत्तियां होती हैं जो हिंसा के दौरान इस हद तक चली जाती हैं. जहां तक शबनम के महिला होने की बात है तो ऐसे मामलों में जेंडर का कोई लेना-देना नहीं है. यह महिला हो या पुरुष कोई भी कर सकता है. कहा जा रहा है कि इस प्रेम संबंध के लिए इसके माता-पिता ने मना किया था लेकिन यह भारत में एक सामान्‍य बात है. माता-पिता यहां प्रेम संबंध को लेकर खिलाफ होते हैं, ऐसी स्थिति में या तो मां-बाप से या फिर प्रेमी अथवा प्रेमिका से अलग होने के मामले सामने आते  हैं लेकिन जिन लोगों के अंदर बहुत रंजिश या कुंठा भरी हुई हो, बदले की भावना और उग्रता भरी हो, वे शबनम जैसा अपराध करते हैं.

Amroha News, Shabnam and saleem to be hangwed
शबनम ने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने सात परिजनों की कुल्‍हाड़ी से काटकर हत्‍या कर दी थी.


वहीं मनोवैज्ञानिक निशा खन्‍ना कहती हैं कि शबनम सामान्‍य लड़की तो नहीं हो सकती. प्रेम में हिंसा (Violence in love) और आक्रामकता के मामले तो सामने आते रहे हैं लेकिन यह अलग है. यह डिसोसिएटिव पर्सनैलिटी डिसऑर्डर (dissociative personality disorder) का मामला भी हो सकता है. जिसमें प्रेम और नफरत में से कोई भी हिस्‍सा ज्‍यादा हाईलाइट हो जाता है. वहीं इसमें एक पहलू ब्रेन वॉश (Brain wash) भी हो सकता है. उसके प्रेमी सलीम (Saleem) ने उसका ब्रेन वॉश इस हद तक किया हो. हालांकि इस ब्रेन वॉश के इतना घिनोना बनने के पीछे संभव है कि उसका परिवार के प्रति कोई रोष या आक्रोश रहा हो. सामाजिक स्‍तर पर या सामने से देखने में जो बात सभी को अच्‍छी लगती है, जरूरी नहीं कि वह व्‍यक्ति विशेष को भी पसंद हो. जैसे कि शबनम (Shabnam) एक पढ़ी-लिखी लड़की थी. मुस्लिम परिवार से होने के बावजूद उसने एमए तक पढ़ाई की. उसे अपने घरवालों से बहुत प्‍यार मिला. लेकिन यहां सवाल उठता है कि क्‍या वो पढ़ना चाहती थी. हो सकता है उसे पढ़ाई के बजाय सिर्फ शादी ही करनी हो या और कुछ काम करना हो. उसने आठवीं पास व्‍यक्ति से प्‍यार किया तो इसमें पढ़ाई तो कहीं नहीं है. यह पूरी तरह से मानसिकता और प्रभाव पर निर्भर है.

पढ़ाई-लिखाई का नहीं अपराध से संबंध

निशा खन्‍ना कहती हैं कि कई मामलों में देखा गया है कि पढ़ाना-लिखाना जीवन के लिए सबसे अच्‍छे कामों में से एक है जो निश्‍चित ही किया जाना चाहिए लेकिन कई बार होता है कि अपराधी इसके लिए तैयार नहीं होता और इसे यातना के रूप में लेता है. जो उसे और भी ज्‍यादा उग्र बना देता है. हो सकता है कि शबनम पढ़ाई न करना चाहती तो कुछ और चाहती हो. इसलिए अपराध को देखें तो अपराधी सही गलत से परे सिर्फ उस चीज पर भरोसा करता है और उसे ही सही समझता है जिसे वह हासिल करना चाहता है. वहीं डॉ. संदीप कहते हैं कि जैसा कहा जा रहा है कि वह पढ़ी लिखी थी, उसके परिवार ने उसे एमए तक पढ़ाया फिर वह शिक्षामित्र बनी तो यहां यह कहना होगा कि पढ़ाई-लिखाई का अपराध न करने से कोई संबंध नहीं है. एक पढ़ा-लिखा क्‍वालीफाइड व्‍यक्ति भी अपराध कर सकता है.

अन्‍य मामलों से ऐसे अलग है यह केस

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