हाथरस केस: पीड़िता की जांच करने वाले डॉक्टरों को नौकरी से निकाले जाने के खिलाफ एसोसिएशन ने खोला मोर्चा

एसआईटी और सीबीआई की वजह से किसान को पुलिस ने खेत में पानी नहीं लगाने दिया.
एसआईटी और सीबीआई की वजह से किसान को पुलिस ने खेत में पानी नहीं लगाने दिया.

एएमयू मेडिकल कॉलेज (AMU medical college) ने डॉक्टर अज़ीम और डॉक्टर ओबैद का कार्यकाल अचानक खत्म कर दिया. इससे अस्‍पताल के डॉक्‍टरों में नाराजगी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 2:44 PM IST
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नई दिल्ली. हाथरस कांड (Hathras Case) की पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट बनाने वाले डॉक्टरों के खिलाफ हुई कार्रवाई को वापस लेने की मांग उठ रही है. अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन (Resident doctors association) ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर तारिक मंसूर को पत्र लिखकर मेडिकल रिपोर्ट बनाने वाले दोनों डॉक्टरों को नौकरी पर दोबारा बहाल करने की मांग की है. कार्रवाई को लेकर एसोसिएशन में खासा रोष है. सूत्रों की मानें तो डॉक्टरों के खिलाफ वाइस चांसलर (Vice Chancellor) की इस कार्रवाई को रेप पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट जोड़कर से देखा जा रहा है.

उत्तर प्रदेश के हाथरस में पिछले महीने एक दलित युवती से कथित गैंगरेप के बाद उसकी हत्‍या करने का मामला सामने आया था. इस मामले में एफएसएल रिपोर्ट पर सवाल उठाने वाले अलीगढ़ के डॉक्टर अजीम मलिक को जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की नौकरी से निकाल दिया गया. डॉ. मलिक अस्पताल में इमरजेंसी एंड ट्रॉमा सेंटर में मेडिकल ऑफ़िसर के पद पर तैनात थे.

हाथरस पीड़िता की एमएलसी रिपोर्ट भी इन्हीं की टीम ने बनाई थी. डॉ. मलिक के अलावा उनकी टीम के सहयोगी डॉ ओबेद हक़ को भी पद से हटा दिया गया है. डॉ हक़ ने पीड़िता की मेडिकल लीगल केस रिपोर्ट पर दस्तख़त किए थे.




क्‍या कहते हैं एएमयू मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर
डॉक्टर अज़ीम ने मीडिया से बात करके बताया था कि पीड़ित की जांच हादसे के दस दिन के बाद हुई, जिससे ज़्यादातर सबूत नष्ट हो गए थे. डॉक्टरों का आरोप है कि इससे वाइस चांसलर तारिक मंसूर खासे नाराज़ हुए थे. उसके बाद दोनों डॉक्टरों का कार्यकाल अचानक ख़त्म कर दिया था.
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