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18 hand grenades found scattered like fruits near nirmali kund intersection in ayodhya military intelligence team reached immediately

अयोध्या में निर्मली कुंड चौराहे के पास बिखरे मिले 18 हैंड ग्रेनेड, तुरंत पहुंची मिलिट्री इंटेलिजेंस

मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम को यहां कुछ ही दूरी के भीतर पेड़ों और झाड़ियों के बीच 18 हैंड ग्रेनेड पड़े हुए मिले.

मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम को यहां कुछ ही दूरी के भीतर पेड़ों और झाड़ियों के बीच 18 हैंड ग्रेनेड पड़े हुए मिले.

अयोध्या कंटोनमेंट बोर्ड के चेयरमैन मिलन निषाद सवाल उठाते हैं कि आखिर जो सेना का हैंड ग्रेनेड ट्रेनिंग सेंटर है, वहां से लगभग ढाई से 3 किलोमीटर दूर यह हैंड ग्रेनेड आखिर वहां तक कैसे पहुंचा. इतनी दूर इन्हें हाथों से फेंका नहीं जा सकता और नजदीक केवल शूटिंग रेंज है, जहां इनको फेंकने की प्रैक्टिस नहीं होती है.

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कृष्णा शुक्ला
अयोध्या.
भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या स्थित डोगरा कंटोनमेंट बोर्ड क्षेत्र के निर्मली कुंड चौराहे के नजदीक एक नाले के पास हैंड ग्रेनेड फलों की तरह बिखरे हुए मिले. एक स्थानीय युवक की जानकारी पर जब यहां मिलिट्री इंटेलिजेंस की टीम पहुंची तो उसे कुछ ही दूरी के भीतर पेड़ों और झाड़ियों के बीच 18 हैंड ग्रेनेड पड़े हुए मिले. हालांकि गनीमत यह थी कि इन सारे ग्रेनेड से पिन निकले हुए थे.

दरअसल यह पूरा क्षेत्र सेना की निगरानी में रहता है और रात 10 बजे के बाद यहां से आवाजाही की भी मनाही हो जाती है. सेना का इस तरह का सेंटर जहां हैंड ग्रेनेड की प्रैक्टिस होती है वह इस स्थान से लगभग ढाई से तीन किलोमीटर दूर है. ऐसे में इतनी दूर इतने बड़ी मात्रा में हैंड ग्रेनेड का यूं मिलना बड़े सवाल खड़े करता है.

मिलिट्री इंटेलिजेंस की मानें तो पाए गए हैंड ग्रेनेड को रविवार दोपहर 2 बजे के आसपास नष्ट कर दिया गया है. इस बारे में अयोध्या पुलिस को भी जानकारी दी गई. अयोध्या के एसएसपी शैलेश पांडे कहते हैं कि उनके पास इस तरह के हैंड ग्रेनेड मिलने की सूचना डोगरा रेजिमेंटल सेंटर द्वारा एक पत्र के माध्यम से कैंट थाने में दी गई है. सभी हैंड ग्रेनेड्स को नष्ट कर दिया गया है. इससे अधिक उनके पास कोई जानकारी नहीं है.

वहीं अयोध्या कंटोनमेंट बोर्ड के चेयरमैन मिलन निषाद ने बताया कि निर्मली कुंड के रहने वाले एक स्थानीय युवक ने सबसे पहले इन हैंड ग्रेनेड को देखा. उसी ने यह जानकारी मिलिट्री इंटेलिजेंस को दी है. हैंड ग्रेनेड मिलने का यह मामला निर्मली कुंड चौराहे के बगल स्थित नाले के पास का है. जहां एक तरफ सेना ने फेंसिग की है उसी के दूसरी तरफ झाड़ियों और पेड़ों के बीच ये ग्रेनेड पड़े मिले. इनकी संख्या 18 है, जिसे डिफ्यूज कर दिया गया है.

बोर्ड के चेयरमैन मिलन निषाद भी सवाल करते हैं कि आखिर जो सेना का हैंड ग्रेनेड ट्रेनिंग सेंटर है, वहां से लगभग ढाई से 3 किलोमीटर दूर यह हैंड ग्रेनेड आखिर वहां तक कैसे पहुंचा. इतनी दूर इन्हें हाथों से फेंका नहीं जा सकता और नजदीक केवल शूटिंग रेंज है, जहां इनको फेंकने की प्रैक्टिस नहीं होती है.

बता दें कि सेना की गतिविधियों की सूचना आमतौर पर लोगों के पास नहीं होती और ना ही सेना इसे साझा करती है. हालांकि हर एक ऐसे मामले पर जांच कमेटी गहनता से मामले की जांच करती है और उस जांच रिपोर्ट पर एक्शन भी होता है. आम घटनाओं और जांचों की तरह सेना की कार्रवाई इक्का-दक्का मामलों को छोड़कर ना तो सुर्खियां बनती है और ना ही उसे प्रचारित ही किया जाता है.

उधर मिलिट्री इंटेलिजेंस (M.I) से जुड़े सूत्रों की मानें तो ट्रेनिंग और वास्तविक एक्शन के लिए अलग-अलग तरह के एम्युनेशन का प्रयोग होता है. ट्रेनिंग के जो हैंड ग्रेनेड होते हैं वह विध्वंसकारी नहीं होते. इससे अलग जो मिलिट्री एक्शन के लिए हैंड ग्रेनेड एलाट किए जाते हैं, वह बहुत घातक होते हैं. जब भी हैंड ग्रेनेड या इस तरह के हथियार इश्यू किए जाते हैं, उसपर एक नंबर अंकित होता है जो बता देता है किस लॉट में और इन्हें कब इश्यू किया गया. जांच के बाद यह साफ़ हो जाएगा इसे किसे और कब इश्यू किया गया था.

Tags: Army, Ayodhya News

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