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भगवान श्रीराम की मूर्ति को लेकर अयोध्या में 300 परिवारों पर लटक रही 'वनवास' की तलवार
Ayodhya News in Hindi

News18 Uttar Pradesh
Updated: January 29, 2020, 4:49 PM IST
भगवान श्रीराम की मूर्ति को लेकर अयोध्या में 300 परिवारों पर लटक रही 'वनवास' की तलवार
अयोध्या में श्रीराम की मूर्ति के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर कई परिवार परेशान हैं.

मजिस्ट्रेट ने कहा कि स्थानीय लोगों का कहना है कि महर्षि योगी की यह जमीन है. लेकिन यह लोग सैकड़ों वर्षों से यहां पर बसे हुए हैं. सर्वे और चकबंदी की प्रक्रिया न हो पाने के कारण आबादी नहीं दर्ज हो पाई. स्थानीय लोगों ने ज्ञापन में मांग रखी है कि चकबंदी कराकर इन लोगों का नाम दर्ज किया जाए. उसके बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया की जाए.

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अयोध्या. त्रेता युग में माता कैकेई के हठ के चलते भगवान श्रीराम को राजपाट छोड़ वनवास जाना पड़ा था, लेकिन कलयुग में राम नगरी में राम की ही खातिर सैकड़ों लोग 'बनवासी' होने के कगार पर हैं. दरअसल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के ड्रीम प्रोजेक्ट विश्व की सबसे ऊंची श्रीराम की मूर्ति (Statue of Lord Ram) लगाने के लिए जो जमीन चिन्हित की गई है, वही इन परिवारों का घर-बार है. सरकार ये जमीन लेगी लेकिन इन परिवारों को मुआवजा नहीं मिलेगा क्योंकि जमीन इनके नाम नहीं है.

माझा बरहटा के 300 परिवारों पर जमीन के अधिग्रहण का ग्रहण लगता नजर आ रहा है. दरअसल अयोध्या में विश्व की सबसे ऊंची 251 मीटर की मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की मूर्ति लगनी है. पहले यह मूर्ति नयाघाट के बगल फोरलेन सरयू पुल और राजघाट रेलवे पुल के बीच मीरापुर दोआबा क्षेत्र में प्रस्तावित थी, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते इस प्रोजेक्ट को मीरापुर दोआब से स्थानांतरित करना पड़ा. अब प्रदेश सरकार ने गयापुर दोआब की सीमा पर माझा बरेहटा की 86 हेक्टेयर जमीन पर श्रीराम की विशाल प्रतिमा और डिजिटल म्यूजियम तथा फूड प्लाजा आदि बनाने के लिए स्वीकृत दी है.

कवायद के तहत जिला प्रशासन की ओर से जमीन अधिग्रहण को लेकर आपत्ति हासिल करने को गजट नोटिफिकेशन कराया गया है. योजना के तहत क्षेत्र के 260 किसानों की जमीन ली जानी है. जिनसे गजट नोटिफिकेशन में जिला प्रशासन ने आपत्ति मांगी है. हालांकि इस क्षेत्र में ऐसे तमाम परिवार हैं, जो जमीन पर दशकों से खेती-बाड़ी तो कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर मालिकाना हक राजस्व विभाग के कागजातों में इनके नाम दर्ज नहीं है.

कागज पर मालिकाना हक नहीं पर वर्षों से कर रही खेती

स्थानीय लोग बताते हैं कि कई वर्षों पूर्व महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ की ओर से भारी तादाद में क्षेत्र में जमीन की खरीद की गई थी. इसी दौरान उनकी ओर से खेती-बाड़ी की जा रही जमीन के कागजात की लिखा पढ़ी रजिस्ट्री कार्यालय में महर्षि वेद विज्ञान विद्यापीठ के पक्ष में हो गई. वह लोग अभी जमीन पर खेती-बाड़ी कर रहे हैं लेकिन कागज में मालिकाना हक नहीं है. इसी के चलते जिला प्रशासन की ओर से जारी किए गए गजट नोटिफिकेशन में भी इन लोगों का जिक्र नहीं किया गया है. जबकि इन परिवारों के भरण-पोषण का माध्यम बनी जमीन सरकार की ओर से अधिग्रहित की जानी है.

पीड़ित सैकड़ों परिवारों ने बैठक कर हालात पर चर्चा की और शासन प्रशासन तथा अदालत के माध्यम से पुनर्वास की व्यवस्था हासिल करने का निर्णय लिया है. मामले में न्यायालय ने जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि अधिग्रहण की कार्रवाई सहमति के साथ हो. अधिग्रहण में पारदर्शिता बरती जाए. इस बीच आज स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन पर जबरदस्ती का आरोप लगाते हुए स्थानीय नेताओं के साथ एक बैठक की और छह सूत्रीय ज्ञापन जिलाधिकारी को संबोधित रेजिडेंटल मजिस्ट्रेट अयोध्या को दिया है.

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जमीन अधिग्रहण को लेकर बैठक करते किसान
जमीन हमारे नाम की जाए: स्थानीय नागरिक
स्थानीय लोग न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि उनकी जमीन उनके नाम की जाए. उस पर आवासीय दर्ज हो और उसका उचित मुआवजा सरकार इनको दे. इसको लेकर जिलाधिकारी संबोधित ज्ञापन प्रशासन को सौंपा है, स्थानीय लोगों की मानें तो वह यहां 4 पीढ़ी से निवास कर रहे हैं. न्यायालय की शरण में जाने वाले अरविंद कुमार यादव ने कहा कि बिना हम लोगों के सहमति के हमारी जमीनों का अधिग्रहण हो रहा है. इसलिए हम माननीय उच्च न्यायालय का सहारा लेना पड़ा.

3 पीढ़ी से रह रहे, 50 साल से जमीन पर बंदोबस्त नहीं
अरविंद ने आरोप लगाया है कि पिछले 3 पीढ़ी से यहां पर निवास कर रहे हैं और 50 साल से यहां पर जमीन पर बंदोबस्त नहीं किया गया और न ही आबादी दर्ज की गई है. हमने प्रशासन से मांग की है कि इन जमीनों पर आबादी दर्ज की जाए. हमें अपने भूमि का स्वामित्व दिया जाए. उचित मुआवजा मिले. उच्च न्यायालय की शरण में जाने वाली अरविंद ने कहा कि राम हमारे भी आराध्य हैं हम राममूर्ति का विरोध नहीं कर रहे हैं. प्रशासन की नीतियों का विरोध कर रहे हैं.

जमीन हमारे नाम की जाए: स्थानीय निवासी
वहीं स्थानीय रामचरण ने भी अपना दुख व्यक्त किया और उन्होंने कहा कि हमारी यहां पर चौथी पीढ़ी है. प्रशासन यहां पर मूर्ति लगाने की कवायद कर रही है. हम प्रशासन से आग्रह कर रहे हैं कि हमारा जमीन हमारे नाम कर दी जाए और अधिग्रहण न किया जाए. स्थानीय बुजुर्ग ने बताया कि पूर्व में भू-माफियाओं ने इस जमीन को अपने नाम करा रखा लिया था. बुजुर्ग रामचरण ने मांग की है कि अधिग्रहण की कार्रवाई में पारदर्शिता बरती जाए और ग्रामीणों का पुनर्वास कराया जाए.

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मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपते स्थानीय लोग


पूर्व राज्यमंत्री बोले- सभी को संतुष्ट कर हो अधिग्रहण
वहीं ग्रामीणों के पक्ष में पहुंचे समाजवादी पार्टी के पूर्व राज्य मंत्री तेज नारायण पांडे पवन ने सरकार से मांग की है कि ग्रामीणों का उत्पीड़न किसी सूरत में न हो. यहां पर चार पुस्तों से रह रहे स्थानीय की जमीनों और मकान उनके नाम किया जाए. साथ ही उचित मुआवजा देकर ही उनको संतुष्ट करके ही जमीनों का अधिग्रहण हो.

अधिग्रहण प्रक्रिया में किसी का नहीं होगा नुकसान: मजिस्ट्रेट
वहीं ज्ञापन लेने वाले मजिस्ट्रेट ने कहा कि स्थानीय लोगों का कहना है कि महर्षि योगी की यह जमीन है. लेकिन यह लोग सैकड़ों वर्षों से यहां पर बसे हुए हैं. सर्वे और चकबंदी की प्रक्रिया न हो पाने के कारण आबादी नहीं दर्ज हो पाई. स्थानीय लोगों ने ज्ञापन दिया है. ज्ञापन में मांग रखी है कि चकबंदी कराकर इन लोगों का नाम दर्ज किया जाए. उसके बाद अधिग्रहण की प्रक्रिया की जाए. जिससे किसानों का नुकसान न हो. जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन दिया गया है. उस ज्ञापन को जिलाधिकारी को दिया जाएगा साथ ही यथासंभव उचित मुआवजा भी स्थानीय ग्रामीणों को दिलाया जाएगा.

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First published: January 29, 2020, 4:45 PM IST
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