अयोध्या: करीब 492 साल बाद श्रीराम जन्मभूमि पर साकार होगा भव्य दीपोत्सव का सपना, योगी खुद कर रहे निगरानी

करीब 492 साल बाद श्रीराम जन्मभूमि पर साकार होगा भव्य दीपोत्सव का सपना (file photo)
करीब 492 साल बाद श्रीराम जन्मभूमि पर साकार होगा भव्य दीपोत्सव का सपना (file photo)

हालांकि कोरोना के नाते इस अवसर पर अयोध्या (Ayodhya) में सीमित लोग ही जाएंगे, पर वर्चुअल रूप से हर कोई घर बैठे अयोध्या के भव्य और दिव्य दीपोत्सव का आनंद ले सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2020, 5:17 PM IST
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अयोध्या. प्रभु श्रीराम की नगरी अयोध्या (Ayodhya) में इस बार का दीपोत्सव और दिवाली ऐतिहासिक होगी. इसका मुख्य कारण है करीब पांच सदी बाद श्रीराम जन्म भूमि पर मन्दिर निर्माण शुरू होने के बाद पहली बार दीपोत्सव होने जा रहा है, जो लोगों के लिए किसी सपने से कम नहीं है. करीब 492 साल बाद यह पहला मौका होगा, जब श्री रामजन्म भूमि पर भी 'खुशियों' के दीप जलेंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या से गहरा जुड़ाव जगजाहिर है. लिहाज़ा 'अयोध्या दीपोत्सव' को वैश्विक उत्सव बनाने में वह कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. हर व्यस्था पर उनकी नजर है. कहां, कब क्या होना है इसका प्रस्तुतिकरण भी वह देख चुके हैं.

बता दें कि 11 से 13 नवम्बर तक आयोजित होने वाले दीपोत्सव की एक-एक तैयारी पर सीएम की नजर है. इस बार योगी सरकार का अयोध्या में यह चौथा दीपोत्सव है. अन्य दीपोत्सव की तरह इसमें भी दीपकों के मामले में रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है. मालूम हो कि करीब पांच शताब्दी पूर्व 1527 में मुगल सूबेदार मीरबांकी के अयोध्या जन्मभूमि पर कब्जा किया था. इसके बाद से अब देश ही नहीं, दुनिया के करोड़ों रामभक्तों का श्री राम जन्मभूमि पर मन्दिर निर्माण का सपना पूरा हो रहा है.

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ऐसे में इस दीपोत्सव को लेकर लोगों का उत्साह चरम पर है. हालांकि कोरोना के नाते इस अवसर पर अयोध्या में सीमित लोग ही जाएंगे, पर वर्चुअल रूप से हर कोई घर बैठे अयोध्या के भव्य और दिव्य दीपोत्सव का आनंद ले सकता है.
अग्रणी रही है गोरक्षपीठ की भूमिका
आजादी के पहले से लेकर अब तक मंदिर आंदोलन में गोरक्षपीठ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. मसलन 1949 को जब विवादित ढांचे के पास रामलला का प्रकटीकरण हुआ, तो पीठ के तत्कालीन पीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ कुछ साधु-संतों के साथ वहां संकीर्तन कर रहे थे. उनके शीष्य ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ 1984 में गठित श्रीरामजन्म भूमि मुक्ति यज्ञ समिति के आजीवन अध्यक्ष रहे. उनकी अगुआई में अक्टूबर 1984 में लखनऊ से अयोध्या तक धर्मयात्रा का आयोजन हुआ.
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