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मकर संक्रांति से सोने के भव्य मंदिर में रहेंगे रामलला: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

News18 Uttar Pradesh
Updated: December 1, 2019, 8:11 AM IST
मकर संक्रांति से सोने के भव्य मंदिर में रहेंगे रामलला: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि इसके लिए इसके लिए कलाकार से संपर्क भी किया गया है. (फाइल फोटो)

Ayodhya Ram Temple: अविमुक्तेश्वरानंद कहते हैं कि चेन्नई के बड़े कास्ट कलाकार से संपर्क किया गया है. वह कई पीढ़ियों से मंदिर निर्माण का काम कर रहे हैं.

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अयोध्या. अयोध्या विवाद (Ayodhya Dispute) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का फैसला आने के बाद शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रविवार को कहा कि अयोध्‍या पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद रामलला अब टेंट में नहीं रहेंगे. अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भगवान राम अब स्वर्ण मंदिर में रहेंगे. मंदिर निर्माण में जितना समय लगेगा, तब तक उनके लिए स्वर्ण मंदिर की व्यवस्था की जाएगी. उन्होंने कहा कि हमलोगों ने यह तय किया है कि एक सोने का भव्य मंदिर बनाकर उसमें रामलला को विराजमान कराया जाए.

अविमुक्तेश्वरानंद कहते हैं कि चेन्नई के बड़े कास्ट कलाकार से संपर्क किया गया है. वह कई पीढ़ियों से मंदिर निर्माण का काम कर रहे हैं. एक नक्शा भी उन्होंने बना कर दिया है, उस पर विचार-विमर्श होगा. हमारा प्रयास होगा कि मकर संक्रांति के दिन से ही भगवान उस मंदिर में विराजमान हो जाएं. वहीं, राम मंदिर निर्माण पर भी उन्होंने कहा कि मंदिर उत्तर-दक्षिण की शैलियों में शामिल हो. वास्तु विधान और शास्त्र विधि का विचार करके भव्य मंदिर बनाया जाए. 1008 फुट ऊंचा शिखर होना चाहिए. रसोई हॉल ऐसा हो जिसमें एक लाख से ज्यादा व्यक्ति एक बार में सीता रसोई में भोजन कर सकें.

VHP पर हमलावर
विश्व हिंदू परिषद पर हमलावर होते हुए उन्‍होंने कहा कि संतों की पूर्व में राय थी कि प्लाट मिल जाए तब नक्शा बनवाया जाए, लेकिन उसके बावजूद पत्थर खरीद कर उसका मॉडल बनवा दिया गया. अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि जो मौजूदा मॉडल है वह 130 फीट ऊंचा है और अमित शाह कह रहे हैं कि जो भगवान राम का मंदिर का शिखर होगा, वह आकाश शिखर का होगा. राम जन्मभूमि न्यास की कार्यशाला में रखे मंदिर मॉडल पर प्रश्नचिन्ह उठाते हुए कहा कि इसमें राम भक्तों की भावनाएं शामिल हैं. इसलिए इस मॉडल को उसमें शामिल जरूर किया जाएगा, लेकिन इसको और भव्यता और दिव्यता दी जाएगी. वहीं, अयोध्या एक्ट के आधार पर ट्रस्ट में भागीदारी का दावा भी अविमुक्तेश्वरानंद ने ठोका है. उन्होंने कहा कि सरकार को पत्र भेज दिया गया है. साल 1993 के अधिग्रहण कानून के अनुसार इसे किसी ट्रस्ट को देना है. अब जो दूसरे टेस्ट हैं वह उस रूप में नहीं है. अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह मंदिर 500 वर्षों के संघर्ष के बाद मिला है तो यह हमारी प्राथमिकता होगी कि इसका जो स्वरूप हो और भव्य और दिव्य हो.


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First published: December 1, 2019, 7:45 AM IST
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