अयोध्या: योगी सरकार के लिए एयरपोर्ट विस्तारीकरण की राह नहीं आसान, ये रही वजह
Ayodhya News in Hindi

अयोध्या: योगी सरकार के लिए एयरपोर्ट विस्तारीकरण की राह नहीं आसान, ये रही वजह
सपा नेता पंडित समरजीत का विरोध प्रदर्शन

अयोध्या एयरपोर्ट के विस्तारीकरण को लेकर तीन गांव की ज़मीनों का अधिग्रहण हो रहा है. जबकि इसमे से एक गांव के किसान जमीन देने को तैयार नहीं है.

  • Share this:
अयोध्या. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार का दावा है कि अयोध्या (Ayodhya) में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एयरपोर्ट (Ayodhya Airport) दिसंबर 2021 तक यानी 15 महीने में तैयार हो जाएगा, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है. क्योंकि एयरपोर्ट के विस्तारीकरण को लेकर तीन गांव की ज़मीनों का अधिग्रहण हो रहा है. जबकि इसमे से एक गांव के किसान जमीन देने को तैयार नहीं है. वजह है जो मुआवजा दो अन्य गांवों को मिल रहा है वह मुआवजा उनको नहीं मिल रहा है. किसानों के उचित मुआवजे को लेकर समाजवादी पार्टी व कांग्रेस पार्टी किसानों के समर्थन में उतर आयी है और कई बार धरना प्रदर्शन भी कर चुकी है.  बुधवार को सपा के दिव्यांग नेता पंडित समरजीत अपनी ट्राई साईकल पोस्टर लगवा कर एक दिन के भूख हड़ताल का ऐलान कर शहर में घूम रहा है.

ये है मुद्दा

पंडित समरजीत का कहना है कि जब तक किसानों को उनकी जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिल जाता तब तक वह किसानों के पक्ष में लड़ाई लड़ते रहेंगे. मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एयरपोर्ट के विस्तारीकरण में अब सियासत शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी दोनों अलग-अलग अपने तरीकों से किसानों के पक्ष में खड़े होकर आंदोलन की राह पर चल पड़े हैं. कांग्रेस पार्टी धर्मपुर गांव पहुंचकर किसानों के पक्ष में सभा की तो समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपने पार्टी कार्यालय पर जबरदस्त प्रदर्शन किया.



ये मामला
दरअसल सारा मामला केवल मुआवजे में असमानता को लेकर है. जनौरा और नंदापुर गांव की जमीनों का सर्किल रेट 116 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है तो वही धर्मपुर गांव का सर्किल रेट मात्र 21 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर है. मुआवजे में जमीन आसमान का अंतर नजर आता है. इसको लेकर धर्मपुर के किसान जमीन देने को तैयार नहीं है. उनका कहना है कि समान कार्य के लिए समान मुआवजा मिलना चाहिए. वहीं जिला प्रशासन की माने तो पिछले 6 साल में धर्मपुर गांव में किसी भी जमीन का बैनामा नहीं हुआ है जिसके कारण इन 6 सालों में सर्किल रेट रिवाइज भी नहीं हुआ. रेवेन्यू कानून के मुताबिक 6 साल के अंदर जमीन की रजिस्ट्री होना अनिवार्य होता है तभी सर्किल रेट रिवाइज होता है. इसी कारण धर्मपुर गांव के सर्किल रेट में जमीन आसमान का अंतर है. अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन धर्मपुर गांव के ग्रामीणों को किस तरह मना कर उनकी जमीन का अधिग्रहण करता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज