अयोध्या सुनवाई का चौथा दिन, पढ़िए 5 बड़ी बातें

अयोध्या मामले (Ayodhya case) में मध्यस्थता की कोशिश नाकाम होने के बाद मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में नियमित सुनवाई शुरू हो गई है. 6 अगस्त से शुरू हुई रोजाना सुनवाई (five days hearing) का शुक्रवार को चौथा दिन था.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 9, 2019, 7:09 PM IST
अयोध्या सुनवाई का चौथा दिन, पढ़िए 5 बड़ी बातें
रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हो गई है.
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Updated: August 9, 2019, 7:09 PM IST
अयोध्या मामले (Ayodhya case) में मध्यस्थता की कोशिश नाकाम होने के बाद मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में नियमित सुनवाई शुरू हो गई है. 6 अगस्त से शुरू हुई रोजाना सुनवाई (five days hearing) का शुक्रवार को चौथा दिन था. पहले तीन दिन सर्वोच्च अदालत में निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान ने अपना पक्ष रखा. आज मुस्लिम पक्ष ने अपना पक्ष रखा. मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील राजीव धवन ने सप्ताह के पांच दिन सुनवाई का विरोध किया. इस मामले में गुरुवार को भी सुनवाई हुई और निर्मोही अखाड़ा के साथ रामलला विराजमान की तरफ से भी पक्ष रखा गया.

मुस्लिम पक्ष की मांग नामंजूर
1) अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में पांच दिनों की लगातार सुनवाई का मुस्लिम पक्ष ने विरोध किया. मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा कि इस मामले में इस तरह सुनवाई नहीं होनी चाहिए. राजीव धवन ने कहा कि ये पहली अपील है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपने जो आपत्ति जाहिर की है उसपर हम गौर करेंगे.

मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली . सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो मामले की सुनवाई रोजाना करेगा. संवैधानिक पीठ सोमवार से शुक्रवार तक मामले की सुनवाई करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को कहा कि जब आपका बहस करने का नंबर आए और अगर आपको बीच में ब्रेक चहिये होगा तो हमें बताएं. सुप्रीम कोर्ट ने धवन से कहा अगर वह आराम करना चाहें तो किसी भी दिन अदालत को बता कर छुट्टी कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सप्ताह में 5 दिन ही सुनवाई होगी. इस अवधि में कोई कटौती नहीं की जाएगी और रोजाना सुनवाई जारी रहेगी.

राजीव धवन ने कहा कि इस पूरे मामले में 5 दिन तक वह कोर्ट को असिस्ट नहीं कर सकते हैं. (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)


राजीव धवन रोजाना सुनवाई का कर रहे हैं विरोध
राजीव धवन ने कहा कि इस पूरे मामले में 5 दिन तक वह कोर्ट को असिस्ट नहीं कर सकते हैं. लिहाजा इस पूरे मामले की सुनवाई 5 दिन न की जाए, क्योंकि इस पूरे मामले में कुछ दस्तावेज उर्दू में है. जिसको ट्रांसलेट करने में समय लगेगा और उसके साथ-साथ बहस करना काफी मुश्किल होगा. हालांकि हिंदू महासभा की तरफ से इस पर विरोध जताया गया. उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 5 दिन की सुनवाई कर रहा है इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद. लेकिन मुस्लिम पक्षकारों द्वारा इस मामले की सुनवाई लंबी चले इसलिए इस सुनवाई का वो विरोध कर रहे है.
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जल्द निपटारे की मांग
2) रामलला विराजमान के वकील परासरन ने कहा, 'राम जन्मभूमि विवाद एक अरसे से चला आ रहा है. अब इसका निपटारा होना चाहिए. पुरातत्व विभाग की खुदाई में जो सबूत मिले हैं, उससे ये साफ़ पता चलता है कि वहां मस्ज़िद से पहले मंदिर था.'

कोर्ट ने पूछा, 'एक देवता को न्यायिक व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)


कोर्ट ने पूछा, 'एक देवता को न्यायिक व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? इस पर रामलला विराजमान के वकील परासर ने कहा- देवता हर कण में है, उसके रूप की जरूरत नहीं. यहां तक कि पहाड़ों को देवताओं के रूप में पूजा जाता है, तिरुवनमलाई और चित्रकूट में "परिक्रमा" की जाती है. जस्टिस भूषण ने पूछा 'सबूत हैं कि अयोध्या में जन्मस्थान के आसपास एक 'परिक्रमा' होती है. क्या वह जन्मस्थान को कुछ पवित्रता प्रदान करेगा? इस पर परासरन ने कहा गोवर्धन में भी परिक्रमा होती है. यही तीर्थयात्रा है.

वकील परासरन ने कोर्ट से कहा- रामायण में उल्लेख है कि सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए और रावण का अंत करने की बात कही. तब विष्णु ने कहा कि इसके लिए उन्हें अवतार.लेना होगा. इस बारे में जन्मभूमि का वर्णन किया.गया है और इसका महत्व है. इस पर जस्टिस बोबड़े ने पूछा- क्या इस समय रघुवंश डाइनेस्टी में कोई इस दुनिया में मौजूद है? इस सवाल के जवाब में परासरन ने कहा मुझे नहीं पता.

टूटेगी स्थापित परम्परा
3) सुप्रीम कोर्ट की कॉज लिस्ट के मुताबिक शुक्रवार को भी अयोध्या राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई जारी रह सकती है. सुप्रीम कोर्ट में अब तक की स्थापित परम्परा के मुताबिक संविधान पीठ सोमवार और शुक्रवार के अलावा बाकी तीन दिन यानी मंगल, बुध, गुरुवार को संविधान की व्याख्या से संबंधित मामलों की सुनवाई करती है.



देवता को कैसे मानें न्यायिक व्यक्ति?
4)
जस्टिस भूषण ने पूछा- क्या जन्मस्थान ज्यूरिस्टिक पर्सन है? उसी तर्ज पर जिस तरह से उत्तराखण्ड हाइकोर्ट ने गंगा को व्यक्ति माना था? इसके जवाब में रामलला विराजमान के वकील परासरण ने कहा, "हां, रामजन्मभूमि भी ज्यूरिस्टिक पर्सन हो सकता है और रामलला भी. क्योंकि वो एक मूर्ति नहीं बल्कि देवता हैं. हम उन्हें सजीव मानते हैं."

परासरन ने इस बात पर जोर दिया कि देवता की उपस्थिति एक न्यायिक व्यक्ति होने का एकमात्र परीक्षण नहीं है. नदियों की पूजा की जाती है. ऋग्वेद के अनुसार, सूर्य एक देवता है. सूर्य एक मूर्ति नहीं है, लेकिन वह अभी भी एक देवता है.- इसलिए हम कह सकते हैं कि सूर्य एक न्यायिक व्यक्ति है.

परासरन ने कहा "श्रीराम का जन्म होने के कारण ही हिंदुओ के लिए ये जगह ज्यादा पूज्य है. वाल्मीकि रामायण का उदहारण देते हुए कहा कि स्वयं विष्णु ने देवताओं से कहा कि वो अयोध्या में दशरथ राजा के यहां मानव रूप में जन्म लेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने रामलला की तरफ से पेश 92 साल के परासरन से कहा- आप चाहें तो बैठकर अपनी दलील रख सकते हैं. परासरन ने विनम्रता से कहा- परंपरा इसकी इजाजत नहीं देती. मैं खड़े होकर ही अपनी बात रखूंगा.

निर्मोही अखाड़े से मांगे गए दस्तावेज
5) जस्टिस चंद्रचूड़ ने निर्मोही आखड़े के वकील से कहा कि अपनी देवदारी को लेकर तमाम दस्तावेज लेकर आइए और उसका एक चार्ट बनाएं. उसके बाद हम आपको सुनेंगे. निर्मोही आखड़े की दावेदारी से सम्बंधित दस्तावेज को देना है. सुप्रीम कोर्ट में राम लला विराजमान की तरफ से दलीले शुरू वरिष्ट वकील के परासरन ने अपना पक्ष रखना शुरू किया. परासरन ने कहा कि जब कोर्ट किसी संपत्ति को जब्त करता है तो कब्जाधारी के अधिकार को मामले के निपटारे तक छीना नहीं जाता.



अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट ने अखाड़े से कहा कि आप हमें दस्तावेज दिखाएं कि अप का कब्जा वहां कैसे है. कोर्ट ने कहा कुछ तो दिखाएं. अखाड़े ने कहा कि 1985 ने हुई डकैती दस्तावेज चोरी हो गए, उनके दस्तावेजों को निचले कोर्ट ने फैसले में उल्लेख किया है. कोर्ट ने कहा ठीक है, आप अपने खतरे पर बहस करिए.​

सीजीआई ने निर्मोही आखड़े के वकील से राम जन्मभूमि के सरकारी कब्जे से पहले के रिकॉर्ड के बारे में पूछा. सीजीआई ने कहा कि इस मामले से संबंधित रेकॉर्ड हमारे समाने रखें. निर्मोही आखड़े के वकील ने कहा कि 1982 में एक डकैती के दौरान यह दस्तावेज नष्ट हो गए. सीजीआई ने फिर सवाल किया कि अगर आपके पास इस मुद्दे से जुड़े कोई दूसरे साक्ष्य है तो वो कोर्ट के समक्ष रखें.

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First published: August 9, 2019, 5:28 PM IST
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