अयोध्‍या केस पर सुनवाई: वकील का दावा- ज़मीन कभी मुसलमानों के कब्जे में नहीं रही

Ayodhya Dispute वकील पीएन मिश्रा ने भी बताया कि आखिरी बार 16 दिसंबर 1949 को वहां नमाज़ अदा की गई थी. उन्होंने कहा कि इसके बाद ही दंगे (Riot) हुए और प्रशासन ने वहां नमाज़ बंद करा दी.

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Updated: August 30, 2019, 5:38 PM IST
अयोध्‍या केस पर सुनवाई: वकील का दावा- ज़मीन कभी मुसलमानों के कब्जे में नहीं रही
सुप्रीम कोर्ट
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Updated: August 30, 2019, 5:38 PM IST
अयोध्या (Ayodhya) मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ (Constitution bench) में सुनवाई चल रही है. शुक्रवार को 16वें दिन की सुनवाई में हिन्‍दू पक्षों की बहस पूरी होने की उम्‍मीद है. श्री रामजन्म भूमि पुनरुत्थान समिति के वकील पी.एन. मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी है कि ज़मीन कभी मुसलमानों के कब्जे में नहीं रही. उन्होंने ये भी कहा कि आखिरी बार 16 दिसंबर 1949 को वहां नमाज़ अदा की गई. फिलहाल सुनवाई चल रही है.

वकील पी. एन. मिश्रा ने कोर्ट में कहा, ''संबंधित ज़मीन कभी मुसलमानों के कब्जे में नहीं रही. वो हमारे कब्जे में थी. मुसलमान शासक होने की वजह से जबरन वहां नमाज़ अदा करते थे. 1856 से पहले वहां कोई नमाज नहीं होती थी.''

वकील पी. एन. मिश्रा ने यह भी बताया कि आखिरी बार 16 दिसंबर 1949 को वहां नमाज़ अदा की गई थी. उन्होंने कहा कि इसके बाद ही दंगे हुए और प्रशासन ने वहां नमाज़ बंद करा दी. 1934 से 1949 के बीच जिस इमारत में मस्जिद थी वहां की चाभी मुसलमानों के पास रहती थी लेकिन पुलिस अपने पहरे में जुमे की नमाज़ के लिए खुलवाती थी, सफाई होती और नमाज़ होती. फिर तनाव बढ़ता था. वकील ने कोर्ट में कहा कि 22-23 दिसंबर की रात जुमा के लिए नमाज़ की तैयारी तो हुई लेकिन नमाज़ नहीं हो पाई थी.

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First published: August 30, 2019, 2:29 PM IST
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