अयोध्या में भगवान रामलला को भोग नहीं चढ़ा पा रहे श्रद्धालु, सरकार और प्रशासन से की यह मांग...

अयोध्या में भगवान रामलला के दर्शनों को आने वाले श्रद्धालु और भक्त इस बात से दुखी हैं कि वो न तो अपने आराध्य को प्रसाद चढ़ा सकते हैं और ना ही यहां से कुछ ले जा सकते हैं

अयोध्या में भगवान रामलला के दर्शनों को आने वाले श्रद्धालु और भक्त इस बात से दुखी हैं कि वो न तो अपने आराध्य को प्रसाद चढ़ा सकते हैं और ना ही यहां से कुछ ले जा सकते हैं

रामलला के पुजारी और पूर्व मुस्लिम पक्षकार ने प्रशासन और मुख्यमंत्री से अपील की है कि रामलाल को श्रद्धालुओं को भोग चढ़ाने के लिए अनुमति दी जाए. फिलहाल सुरक्षा कारणों से रामलला (Ramlala) के परिसर में बाहरी सामान ले जाना वर्जित है इस वजह से भक्त अपने आराध्य रामलला को प्रसाद नहीं चढ़ा पाते नहीं लगा पाते

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 21, 2021, 5:26 PM IST
  • Share this:
अयोध्या. अयोध्या में भगवान श्रीरामलला के मंदिर (Ram Temple) में श्रद्धालुओं के द्वारा प्रसाद नहीं चढ़ाया जा पा रहा है. दूर-दराज से अयोध्या (Ayodhya) आने वाले श्रद्धालुओं को रामलला (Ramlala) के दरबार में प्रसाद ले जाने की अनुमति नहीं है. वो रामलला का प्रसाद न तो चढ़ा पाते हैं और ना ही यहां से ले जा पाते हैं. इसकी वजह है कि रामलला के दरबार में अभी प्रसाद चढ़ाने की अनुमति नहीं है. पूर्व में सुरक्षा कारणों से पारदर्शी थैली में मिश्री और इलायची दाना ले जाने की अनुमति थी. लेकिन कोरोना वायरस (Corona Virus) संक्रमण के चलते पिछले वर्ष से रामलला को लगाया जाने वाला प्रसाद बंद कर दिया गया है जिसके चलते अब श्रद्धालु अपने आराध्य को प्रसाद नहीं चढ़ा पा रहे हैं.

राम जन्मभूमि में प्रसाद चढ़ाए जाने का काम वर्ष 1992 से 2000 तक नियमित रूप से चल रहा था. भगवान के दर्शन को आने वाले श्रद्धालु रामलला के दरबार में अपनी श्रद्धा अनुसार प्रसाद चढ़ाते थे. लेकिन वर्ष 2000 के बाद रामलला के दरबार में सुरक्षा कारणों से किसी भी तरीके के प्रसाद या वस्तु को ले जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी. केवल पारदर्शी थैले में ही इलायची दाना और मिश्री ले जाने की अनुमति थी लेकिन अब इस पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है.

अब अयोध्या के पक्षकार, संत समाज और श्रद्धालु सभी रामलला के दरबार में प्रसाद चढ़ाए जाने के लिए ट्रस्ट और प्रशासन से मांग कर रहे हैं. अब आलम यह है कि अयोध्या आने वाले श्रद्धालु अपने आराध्य के दरबार में खाली हाथ जाते हैं. उनके मन में अपने घर रामलला का प्रसाद नहीं ले जा पाने का मलाल रहता है. श्रद्धालुओं और संतों तक सभी ने एक सुर में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से निवेदन किया है कि रामलला के दरबार में प्रसाद और फूल-मालाएं चढ़ाने के लिए अनुमति दी जाए. क्योंकि वर्षों से चला आ रहा विवाद खत्म हो चुका है, और ट्रस्ट के हाथों में ही रामलला के मंदिर का संचालन है.

कोरोना संक्रमण के चलते रामलला को प्रसाद चढ़ाने पर लगी रोक
रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास का कहना है कि पूर्व में रामलला के दरबार में सभी तरीके के प्रसाद चढ़ाए जाते थे. मगर वर्ष 2000 से किसी भी तरीके के समान को रामलला के परिसर में ले जाए जाने पर पाबंदी लगा दी गई थी. श्रद्धालु 2000 से वर्ष 2019 कोरोना काल तक पारदर्शी थैले में मिश्री और इलायची दाना भगवान को श्रद्धालु चढ़ा रहे थे. लेकिन कोरोना काल में उस पर भी रोक लगा दी गई. उन्होंने कहा कि अब रामलला के परिसर में जो भी भक्त पहुंचते हैं वो खाली हाथ दर्शन करते हैं और उन्हें खाली हाथ ही वापस कर दिया जाता है. प्रधान पुजारी ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और शासन से मांग की है कि श्रद्धालुओं को राम जन्मभूमि परिसर में यथाशक्ति प्रसाद का भोग लगाने की अनुमति मिले.

वहीं, मुस्लिम पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने भी रामलला के परिसर में श्रद्धालुओं को प्रसाद ना चढ़ाए जाने पर दुख जताया है. उन्होंने शासन-प्रशासन और ट्रस्ट से यह मांग की है कि श्रद्धालुओं को रामलला के परिसर में प्रसाद चढ़ाने की अनुमति दी जाए जिससे वो अपने आराध्य को प्रसाद चढ़ा सकें और अपने घर प्रसाद ले जा सकें.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज