अयोध्‍या केस: मुस्लिम पक्ष की रोज सुनवाई पर आपत्ति खारिज, कोर्ट ने पूछा- क्‍या मौजूद हैं राम के वंशज

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने पूछा कि क्‍या रामजन्‍मभूमि (Ayodhya land dispute) को ज्‍यूरिस्टिक पर्सन माना जा सकता है?

News18Hindi
Updated: August 9, 2019, 6:53 PM IST
अयोध्‍या केस: मुस्लिम पक्ष की रोज सुनवाई पर आपत्ति खारिज, कोर्ट ने पूछा- क्‍या मौजूद हैं राम के वंशज
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Updated: August 9, 2019, 6:53 PM IST
रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद (Ayodhya land dispute) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में नियमित सुनवाई शुरू हो गई है. हालांकि चौथे दिन मुस्लिम पक्ष के पैरवीकार ने इसपर आपत्ति जताई है. पैरवीकार ने कहा कि अगर सप्‍ताह के पांचों दिन मामले पर सुनवाई की जाएगी और उसमें जल्‍दबादी की जाएगी तो हम कोर्ट की कार्रवाई में सहयोग नहीं कर पाएंगे. हालांकि पीठ ने मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्‍ठ वकील राजीव धवन की दलीलों पर राहत नहीं दी है. 6 अगस्‍त से शुरू हुई सुनवाई के पहले तीन दिन सर्वोच्च अदालत में निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान ने अपना पक्ष रखा. आज मुस्लिम पक्ष अपने कोर्ट के सामने दलील पेश की.

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्‍या रामजन्‍मभूमि को ज्‍यूरिस्टिक पर्सन माना जा सकता है? इस पर रामलला विराजमान के वकील ने जवाब दिया हां रामजन्‍मभूमि को ज्‍यूरिस्टिक पर्सन माना जा सकता है. वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता परासरन ने सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर कहा कि रामजन्मभूमि भी ज्यूरिस्टिक पर्सन हो सकता है और रामलला भी, क्योंकि वो एक मूर्ति नहीं बल्कि देवता हैं. हम उन्हें सजीव मानते हैं.

मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं
मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन की दलील सुनने के बाद भी सुप्रीम कोर्ट ने उन्‍हें राहत नहीं दी है. कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई रोजाना की जाएगी. संविधान पीठ सोमवार से शुक्रवार तक मामले की सुनवाई करेगा. सुप्रीम कोर्ट ने राजीव धवन को कहा कि जब आपका बहस करने का नंबर आये और अगर आपको बीच में ब्रेक चाहिए हो तो हमें बताएं. सुप्रीम कोर्ट ने धवन से कहा अगर वह आराम करना चाहें तो किसी भी दिन अदालत को बता कर छुट्टी कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सप्ताह में 5 दिन ही सुनवाई होगी. इस अवधि में कोई कटौती नहीं की जाएगी और रोजाना सुनवाई जारी रहेगी.

प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर


हिंदू धर्म नहीं जीवन पद्धति है
सुनवाई के दौरान रामलला के वकील के परासरण ने कहा, 'जब आप मंदिर जाते हैं तो आप उसे स्थल कहते हैं. उसे स्थान कहा जाता है. वो जन्मभूमि नही होती. 1966 के एक फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म 'एक वे ऑफ लाइफ है' यानी हिन्दू धर्म नहीं जीवन पद्धति है.'
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परासरन ने कहा, 'राम जन्मभूमि विवाद एक अरसे से चला आ रहा है. अब इसका निपटारा होना चाहिए. पुरातत्व विभाग की खुदाई में जो सबूत मिले हैं, उससे ये साफ़ पता चलता है कि वहां मस्ज़िद से पहले मंदिर था.'

क्‍या राम के वंश का कोई है?
वकील परासरन ने कोर्ट से कहा कि रामायण में उल्लेख है कि सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए और रावण का अंत करने की बात कही. तब विष्णु ने कहा कि इसके लिए उन्हें अवतार लेना होगा. इस बारे में जन्मभूमि का वर्णन किया गया है और इसका महत्व है. इस पर जस्टिस बोबड़े ने पूछा- क्या इस समय रघुवंश डाइनेस्टी में से कोई इस दुनिया में मौजूद है? इस सवाल के जवाब में परासरन ने कहा मुझे नहीं पता.

कोर्ट ने पूछा, 'एक देवता को न्यायिक व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)


वकील ने कहा- हर कण में हैं देवता
कोर्ट ने पूछा, 'एक देवता को न्यायिक व्यक्ति कैसे माना जा सकता है? इस पर रामलला विराजमान के वकील परासर ने कहा- देवता हर कण में है, उसके रूप की जरूरत नहीं. यहां तक कि पहाड़ों को देवताओं के रूप में पूजा जाता है, तिरुवनमलाई और चित्रकूट में "परिक्रमा" की जाती है. जस्टिस भूषण ने पूछा 'सबूत हैं कि अयोध्या में जन्मस्थान के आसपास एक 'परिक्रमा' होती है. क्या वह जन्मस्थान को कुछ पवित्रता प्रदान करेगा? इस पर परासरन ने कहा गोवर्धन में भी परिक्रमा होती है. यही तीर्थयात्रा है.

हिंदू महासभा ने मुस्लिम पक्ष की दलील का किया विरोध
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्‍ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि इस पूरे मामले में 5 दिन तक वह कोर्ट को असिस्ट नहीं कर सकते हैं. लिहाजा इस पूरे मामले की सुनवाई 5 दिन न की जाए, क्योंकि इस पूरे मामले में कुछ दस्तावेज उर्दू में है. जिसको ट्रांसलेट करने में समय लगेगा और उसके साथ-साथ बहस करना काफी मुश्किल होगा. हालांकि हिंदू महासभा की तरफ से इस पर विरोध जताया गया. उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 5 दिन की सुनवाई कर रहा है इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद. लेकिन मुस्लिम पक्षकारों द्वारा इस मामले की सुनवाई लंबी चले इसलिए इस सुनवाई का वो विरोध कर रहे है.



जिस तरह गंगा सजीव, उसी तरह रामलला
रामलला विराजमान ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हिंदुओं को पूजा के अधिकार से वंचित रखना अपने आप में भगवान यानी रामलला को अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार प्रदान करता है. क्योंकि जिस तरह गंगा सजीव हैं, उसी तरह रामलला भी.

सुप्रीम कोर्ट ने दूसरे पक्षों से पूछा जो अपील फ़ाइल की गई है, उसमें से सूट 5 में क्या उनको अलग से सुना जाए? मुस्लिम पक्ष ने कहा कि जब वो अपनी अपील पर बहस करेंगे, तब वो अपना पक्ष रखेंगे. सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार भी मामले की सुनवाई जारी रहेगी. कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड अपनी अपील पर बहस करते समय सूट 5 को लेकर भी अपना पक्ष रखेगा.

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क्‍या जनमस्‍थान ज्‍यूरिस्टिक पर्सन?
जस्टिस भूषण ने पूछा- क्या जन्मस्थान ज्यूरिस्टिक पर्सन है? उसी तर्ज पर जिस तरह से उत्तराखण्ड हाइकोर्ट ने गंगा को व्यक्ति माना था? इसके जवाब में रामलला विराजमान के वकील परासरण ने कहा, "हां, रामजन्मभूमि भी ज्यूरिस्टिक पर्सन हो सकता है और रामलला भी. क्योंकि वो एक मूर्ति नहीं बल्कि देवता हैं. हम उन्हें सजीव मानते हैं."

क्‍या है ज्‍यूरिस्टिक पर्सन?
बता दें कि यहां ज्‍यूरिस्टिक पर्सन का तात्‍पर्य इंसान या इंसानों के समूह से है, जिन्‍हें न्‍याय की परिधि में रखा जा सके. मंगलवार को भी निर्मोही अखाड़ा ने अपना पक्ष रखते हुए विवादित जमीन पर अपना दावा पेश किया था. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के सामने सबसे पहले पक्ष रखते हुए निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि विवादित जमीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा नहीं बनता. वर्ष 1934 के बाद रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद ढांचे में मुस्लिमों को प्रवेश की अनुमति नहीं थी. अखाड़े ने कहा कि विवादित जमीन पर सैकड़ों वर्षों तक उसका कब्जा रहा, लिहाजा उसे कब्ज़ा प्रबंधन दिया जाए. निर्मोही अखाड़े की तरफ से वकील सुशील जैन ने पक्ष रखा.

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First published: August 9, 2019, 6:53 PM IST
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