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अयोध्या विवाद पर सुनवाई LIVE: SC ने पूछा- क्या राम के वंश का कोई आज दुनिया में मौजूद है?

निर्मोही अखाड़ा ने अपना पक्ष रखते हुए विवादित जमीन पर अपना दावा पेश किया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कुछ तीखे सवाल पूछे.

Hindi.news18.com | August 9, 2019, 3:59 PM IST
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Last Updated August 9, 2019

हाइलाइट्स

अयोध्या मामले में मध्यस्थता की कोशिश नाकाम होने के बाद मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हो गई है. 6 अगस्त से शुरू हुई रोजाना सुनवाई का शुक्रवार को चौथा दिन है. पहले तीन दिन सर्वोच्च अदालत में निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान ने अपना पक्ष रखा. आज मुस्लिम पक्ष अपना पक्ष रख रहे हैं. मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील राजीव धवन ने सफ्ताह के पांच दिन सुनवाई का विरोध किया. इस मामले में गुरुवार को भी सुनवाई हुई और निर्मोही अखाड़ा के साथ रामलला विराजमान की तरफ से भी पक्ष रखा गया. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्‍या रामजन्‍मभूमि को ज्‍यूरिस्टिक पर्सन माना जा सकता है? इस पर रामलला विराजमान के वकील ने जवाब दिया हां रामजन्‍मभूमि को ज्‍यूरिस्टिक पर्सन माना जा सकता है. वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता परासरन ने सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर कहा कि रामजन्मभूमि भी ज्यूरिस्टिक पर्सन हो सकता है और रामलला भी, क्योंकि वो एक मूर्ति नहीं बल्कि देवता हैं. हम उन्हें सजीव मानते हैं. बता दें कि यहां ज्‍यूरिस्टिक पर्सन का तात्‍पर्य इंसान या इंसानों के समूह से है, जिन्‍हें न्‍याय की परिधि में रखा जा सके. मंगलवार को भी निर्मोही अखाड़ा ने अपना पक्ष रखते हुए विवादित जमीन पर अपना दावा पेश किया था. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के सामने सबसे पहले पक्ष रखते हुए निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि विवादित जमीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा नहीं बनता. वर्ष 1934 के बाद रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद ढांचे में मुस्लिमों को प्रवेश की अनुमति नहीं थी. अखाड़े ने कहा कि विवादित जमीन पर सैकड़ों वर्षों तक उसका कब्जा रहा, लिहाजा उसे कब्ज़ा प्रबंधन दिया जाए. निर्मोही अखाड़े की तरफ से वकील सुशील जैन ने पक्ष रखा.
4:57 pm (IST)

अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में आज की सुनवाई पूरी. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट फिर से मामले की सुनवाई करेगा. रामलला विराजमान अपना पक्ष जारी रखेगें. रामलला की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में एक नक्शा पेश किया गया. 1950 में शिव शंकर लाल ने सूट नंबर 1 में बतौर कमिश्नर ये नक्शा पेश किया था. जिसमें विवादित ढांचे का पूरा विवरण है. उसमें 14 पिलर है. जिसमें शंकर देवता तांडव नृत्य, हनुमान जी आदि देवताओं के चित्र हैं. इसमें 2 पिलर नस्ट किया गया. रामलला की तरफ से बहस शुक्रवार को भी जारी रहेगी.

4:00 pm (IST)

गुप्त काल यानी ईसा पूर्व 6ठी सदी से लेकर उत्तर मध्य युग तक रामलला के वकील ने रामजन्मभूमि की सर्वकालिक महत्ता और महात्म्य को बताया. उन्होंने कहा- कभी साकेत के नाम से मशहूर नगर ही अब अयोध्या है. यहीं सदियों से लोग राम के प्रति श्रद्धा निवेदित करते रहे हैं. यहां तक कि बौद्ध, जैन और इस्लामिक काल मे भी श्रद्धा के स्रोत का ये स्थान राम जन्मस्थान के रूप में ही लगातार प्रसिद्ध रहा. इस अजस्र लोकश्रद्धा की वजह से ही सनातन हिन्दू धर्म का पुनर्जागरण हुआ. इस विवादित स्थान पर हमारे दावे का आधार भी यही है कि ये पूरा स्थान ही देवता है. लिहाज़ा इसका दो तीन हिस्सों में बंटवारा नहीं हो सकता.

3:55 pm (IST)

जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा परिस्थितियों से लगता है कि वहां हिन्दू, मुस्लिम, बौद्ध और जैन धर्म का प्रभाव रहा है. जिसपर रामलला विराजमान की तरफ से कहा गया कि इन धर्मों का प्रभाव था, लेकिन जन्मभूमि पर हिंदू धर्म का पुनर्जीवन हुआ. एक बात जो हमेशा स्थिर रही वो थी राम जन्मभूमि के लिए लोगों की आस्था और उनका विश्वास.

3:53 pm (IST)

जस्टिस बोबड़े ने मुस्लिम पक्ष के वक़ील राजीव धवन से पूछा विवादित स्थल को लेकर शिया और सुन्नी के बीच क्या विवाद है? राजीव धवन ने कहा जो विवाद है उससे सूट पर कोई असर नही पड़ेगा. इस बाबत राजीव धवन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले का उदाहरण दिया.

3:53 pm (IST)

रामलला की तरफ से कहा गया कि हिन्दू धर्म हमेशा पुनर्जीवित हुआ है. कैसे भी बदलाव हुए हों, परिस्थिति कुछ भी हो, लेकिन रामजन्मभूमि को लेकर हिन्दुओं का विश्वास अटूट रहा है.

3:52 pm (IST)

रामलला विराजमान के वकील वैद्यनाथन ने कहा- मंदिर के खंडहर होने के लिए पुरातात्विक साक्ष्य हैं. यदि मस्जिद मंदिर के खंडहर पर बनाई गई थी, तो शरीयत कानून इसे मस्जिद के रूप में मान्यता नहीं देता है.

12:43 pm (IST)
 वैद्यनाथन ने पी कार्नेज्ञ को कोट करते हुए कहा कि जिस तरह मुस्लिमों की तरह मक्का है, उसी तरह हिंदुओं के लिए अयोध्या "राम जन्मभूमि" है.

12:37 pm (IST)

वैद्यनाथन ने कहा कि स्थान को हमेशा से ही जन्मस्थान माना गया है. लोगों की जन्मस्थान को लेकर अतिप्राचीन काल से आस्था है और विश्वास है. इसलिए इसमें कोई विवाद ही नहीं. वैद्यनाथन ने कहा, " इस पर भ्रम है कि मस्जिद निर्माण किसने कराया? बाबरनामा में इसका जिक्र नहीं है. इस पर मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा, " बाबरनामा के 2 पन्ने मौजूद नहीं हैं. उनमें जिक्र रहा होगा." जिसके जवाब में वैद्यनाथन ने कहा, " साफ नहीं कि निर्माण बाबर के आदेश पर हुआ या औरंगजेब के, लेकिन जगह श्रीराम जन्मस्थान मानी जाती रही है.

12:00 pm (IST)
वैद्यनाथन ने Joseph Tiefenthale जैसे लेखकों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा इन सभी ने अपने यात्रा वृत्तांत में भगवान राम का जिक्र किया है. साथ ही ये भी कहा कि कैसे मंदिर को नष्ट किया गया.

11:58 am (IST)

वैद्यनाथन ने 19 सदी के ब्रिटिश सर्वेक्षक मोंट्गोमेरी मार्टिन के किताब का जिक्र किया. वैद्यनाथन ने कहा कि बाबर ने मस्जिद बनाई थी इसका जिक्र पहली बार मोंट्गोमेरी मार्टिन के किताब से हुआ.

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