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अयोध्या विवाद पर सुनवाई LIVE: SC ने पूछा- क्या राम के वंश का कोई आज दुनिया में मौजूद है?

निर्मोही अखाड़ा ने अपना पक्ष रखते हुए विवादित जमीन पर अपना दावा पेश किया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने कुछ तीखे सवाल पूछे.

Hindi.news18.com | August 22, 2019, 2:09 PM IST
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Last Updated August 22, 2019

हाइलाइट्स

2:09 pm (IST)

वकील रंजीत कुमार ने कहा कि 1949 में मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि वह 1935 से वहां पर नमाज नहीं पढ़ रहे हैं, ऐसे में अगर जमीन को हिंदुओं को दिया जाता है तो कोई परेशानी नहीं होगी. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामे की वैधता को लेका पूछा कि क्या यह हलफनामे वेरिफाई हैं? जस्टिस बोबड़े ने कहा कि यह हलफनामा तब दिया गया था जब सरकार विवादित जमीन को रिसीवर को देना चाहती थी, क्या यह बातें कभी मजिस्ट्रेट के सामने साबित हो पाई थी?

12:18 pm (IST)

वकील रंजीत कुमार ने कुछ मुसलमानों द्वारा फैजाबाद जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष 1950 में दायर किये गए कुछ हलफनामों को रखा. जिसमें सभी ने कहा है कि विवादित जमीन पर मंदिर था और उसे मस्जिद बनाने के लिए तोड़ा गया.

11:45 am (IST)

रंजीत कुमार ने कहा- मेरी दलीलें वकील पराशरन और वैद्यनाथन द्वारा दिये गए उन तर्कों से सहमत हैं जो ये साबित करते हैं कि उक्त जमीन खुद में दैवीय भूमि है. भगवान राम का उपासक होने के नाते मेरा वहां पर पूजा करने का अधिकार है. यह मेरा सामाजिक अधिकार है, जिसे हटाया नहीं जा सकता. ये वो जगह है, जहां भगवान राम का जन्म हुआ था. मैं यहां पर पूजा करने का अधिकार मांग रहा हूं.

11:36 am (IST)

गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार ने अब्दुल गनी द्वारा दायर हलफनामे को कोर्ट के सामने रखते हुए कहा कि गनी ने अपने हलफनामे में कहा था कि मस्जिद का निर्माण राम मंदिर को तोड़कर किया गया था. मस्जिद के गिरने के बाद मुसलमानों ने वहां नमाज पढ़ना बंद कर दिया. लेकिन हिंदुओं ने जन्मस्थान की पूजा जारी रखी.

11:33 am (IST)

अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में 10वें दिन की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में शुरू. गोपाल सिंह विशारद की ओर से रखा जा रहा है पक्ष. विशारद की ओर से 1950 मे मुक़दमा दाखिल किया गया था. इनका मुक़दमा सूट नंबर एक है.

11:24 am (IST)

नौवें दिन शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि ये मामला किसी आस्था का नहीं है बल्कि विवादित जमीन से जुड़ा है. इस मामले पर अब गुरुवार को सुनवाई होगी.

4:03 pm (IST)

पीएन मिश्रा ने कहा कि हमारा मानना है कि कि बाबर ने वहां कभी कोई मस्जिद नहीं बनवायी और हिन्दू उस स्थान पर हमेशा पूजा करते रहे है. हम इसको जन्मभूमि कहते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम आस्था को लेकर लगातार दलीलें सुन रहे है, जिन पर हाईकोर्ट ने विश्वास भी जताया है. इस पर जो भी स्पष्ट साक्ष्य हैं वह बताएं. सीजेआई ने कहा कि मानचित्र में यह साफ करिए कि मूर्तियां कहां हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू ग्रंथों में आस्था का आधार विवादित नहीं है, हमको मंदिर के लिए दस्तावेजी सबूत पेश करिए.

3:36 pm (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि स्कंद पुराण कब लिखा गया था? राम जन्मस्थान पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि ब्रिटिश लिखक के अनुसार गुप्त समय मे लिखा गया, यह भी कहा जाता है 4-5 AD में लिखा गया.

 

3:29 pm (IST)

रामजन्म स्थान पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने स्कंद पुराण का जिक्र किया, जिसमें लोग सरयू नदी में स्नान करने के बाद जन्मस्थान का दर्शन करते थे. इसमें मंदिर का जिक्र नही है, लेकिन जन्मस्थान का दर्शन करते थे.

3:21 pm (IST)

रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने अपनी दलील पूरी की. रामजन्म स्थान पुनरोधान समिति के वकील पीएन मिश्रा ने दलील रखना शुरू किया. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या आप इस में पार्टी हैं? पीएन मिश्रा ने कहा कि हां, मैं सूट नम्बर 4 में प्रतिवादी नम्बर 20 हूं. मिश्रा ने कहा कि मैं तर्क दूंगा कि वह हमारे सिद्धांत, आस्था और विश्वासों के आधार पर एक मंदिर है. मैं अथर्व वेद से आरंभ करूंगा.

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अयोध्या मामले में मध्यस्थता की कोशिश नाकाम होने के बाद मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट में नियमित सुनवाई शुरू हो गई है. 6 अगस्त से शुरू हुई रोजाना सुनवाई का शुक्रवार को चौथा दिन है. पहले तीन दिन सर्वोच्च अदालत में निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान ने अपना पक्ष रखा. आज मुस्लिम पक्ष अपना पक्ष रख रहे हैं. मुस्लिम पक्ष की ओर से वकील राजीव धवन ने सफ्ताह के पांच दिन सुनवाई का विरोध किया. इस मामले में गुरुवार को भी सुनवाई हुई और निर्मोही अखाड़ा के साथ रामलला विराजमान की तरफ से भी पक्ष रखा गया. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्‍या रामजन्‍मभूमि को ज्‍यूरिस्टिक पर्सन माना जा सकता है? इस पर रामलला विराजमान के वकील ने जवाब दिया हां रामजन्‍मभूमि को ज्‍यूरिस्टिक पर्सन माना जा सकता है. वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता परासरन ने सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर कहा कि रामजन्मभूमि भी ज्यूरिस्टिक पर्सन हो सकता है और रामलला भी, क्योंकि वो एक मूर्ति नहीं बल्कि देवता हैं. हम उन्हें सजीव मानते हैं. बता दें कि यहां ज्‍यूरिस्टिक पर्सन का तात्‍पर्य इंसान या इंसानों के समूह से है, जिन्‍हें न्‍याय की परिधि में रखा जा सके. मंगलवार को भी निर्मोही अखाड़ा ने अपना पक्ष रखते हुए विवादित जमीन पर अपना दावा पेश किया था. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के सामने सबसे पहले पक्ष रखते हुए निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि विवादित जमीन पर मुस्लिम पक्ष का दावा नहीं बनता. वर्ष 1934 के बाद रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद ढांचे में मुस्लिमों को प्रवेश की अनुमति नहीं थी. अखाड़े ने कहा कि विवादित जमीन पर सैकड़ों वर्षों तक उसका कब्जा रहा, लिहाजा उसे कब्ज़ा प्रबंधन दिया जाए. निर्मोही अखाड़े की तरफ से वकील सुशील जैन ने पक्ष रखा.

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