अयोध्या विवाद: SC ने पूछा- क्या भगवान राम या जीसस ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है?
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अयोध्या विवाद: SC ने पूछा- क्या भगवान राम या जीसस ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है?
अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में हो रही दिलचस्प बहस

बहस के दौरान मालिकाना हक़ से लेकर कब्जे तक पर बहस हुई. इतना ही नहीं बाल्मीकि रामायण और जीसस का भी जिक्र आया.

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अयोध्या भूमि विवाद में मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम होने के बाद मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुई नियमित सुनवाई बुधवार को भी जारी रही. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ के समक्ष सबसे पहले निर्मोही अखाड़े की तरफ से दलील पेश की गई. इसके बाद रामलला विराजमान की तरफ से दलील पेश की गई. इस दौरान मालिकाना हक़ से लेकर कब्जे तक पर बहस हुई. इतना ही नहीं बाल्मीकि रामायण और जीसस का भी जिक्र आया.

सबसे पहले सुप्रीम कोर्ट में निर्मोही अखाड़े की तरफ से वकील सुशील जैन अपना पक्ष रख रहे हैं. वकील सुशील जैन ने कहा यह मालिकाना हक़ की लड़ाई नहीं है. ये कब्जे की लड़ाई है. इस विवादित जमीन पर शुरू से अखाड़े का कब्ज़ा रहा है. लिहाजा मामला कब्जे का है.

निर्मोही अखाड़े ने शुरू की बहस



जस्टिस बोबड़े ने निर्मोही अखाड़े के वकील से पूछा- क्या निर्मोही अखाड़े को सेक्शन 145 सीआरपीसी के तहत राम जन्मभूमि पर दिसंबर 1949 के सरकार के अधिग्रहण के आदेश को चुनौती देने का अधिकार है? क्योंकि उन्होंने इस आदेश को लिमिटेशन अवधि समाप्त होने के बाद चुनौती दी. अखाड़ा ने लिमिटेशन अवधि (6 साल) समाप्त होने पर 1959 में आदेश को चुनौती दी. निर्मोही अखाड़े के वकील जैन ने कोर्ट के एक पुराने फैसले का उदाहरण दिया और कहा कि उनका केस लिमिटेशन एक्ट 1908 के तहत आर्टिकल 47 के दायरे में आता है. अगर अंतिम आदेश सेक्शन 145 के तहत आता है तो लिमिटेशन अवधि जारी रहेगी.



चीफ जस्टिस ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि आप जिस फैसले का उदाहरण अपनी दलीलें में दे रहे हैं, वो SCR (सुप्रीम कोर्ट वीकली रिपोर्ट किताब) से लिया गया है या फिर SCC (सुप्रीम कोर्ट केसेस) के आधार पर दे रहे हैं. जो दस्तावेज सुप्रीम कोर्ट में उपलब्ध ही नहीं है, उसका उदाहरण न दें.
वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने कहा कि जैन जिस फैसले का उदाहरण अपनी दलीलों में दे रहे हैं, उसकी प्रति हमें नहीं दी गई है. CJI ने जैन को कहा कि वो इसकी प्रति मुस्लिम पक्षकारों को भी दे दें.

कोर्ट ने मांगे दस्तावेज

सीजीआई ने निर्मोही आखड़े के वकील से राम जन्मभूमि के सरकारी कब्जे से पहले के रिकॉर्ड के बारे में पूछा. सीजीआई ने कहा कि इस मामले से संबंधित रेकॉर्ड हमारे समाने रखें. निर्मोही आखड़े के वकील ने कहा कि 1982 में एक डकैती के दौरान यह दस्तावेज नष्ट हो गए. सीजीआई ने फिर सवाल किया कि अगर आपके पास इस मुद्दे से जुड़े कोई दूसरे साक्ष्य है तो वो कोर्ट के समक्ष रखें.

जस्टिस चंद्रचूड़ ने निर्मोही आखड़े के वकील से कहा कि अपनी देवदारी को लेकर तमाम दस्तावेज लेकर आइए और उसका एक चार्ट बनाएं. उसके बाद हम आपको सुनेंगे. निर्मोही आखड़े की दावेदारी से सम्बंधित दस्तावेज को देना है. सुप्रीम कोर्ट में राम लला विराजमान की तरफ से दलीले शुरू वरिष्ठ वकील के परासरन ने अपना पक्ष रखना शुरू किया. परासरन ने कहा कि जब कोर्ट किसी संपत्ति को जब्त करता है तो कब्जाधारी के अधिकार को मामले के निपटारे तक छीना नहीं जाता.

विष्णु ने कहा था वे अयोध्या में पैदा होंगे

परासरन ने कहा "श्रीराम का जन्म होने के कारण ही हिंदुओ के लिए ये जगह ज्यादा पूज्य है. वाल्मीकि रामायण का उदहारण देते हुए कहा कि स्वयं विष्णु ने देवताओं से कहा कि वो अयोध्या में दशरथ राजा के यहां मानव रूप में जन्म लेंगे. परासरन ने कहा ऐसे उदाहरण पौराणिक ग्रंथों में कई जगह मिलते हैं, जिनमें ये साक्ष्य पुष्ट होता है कि यही वो स्थान है जहां राम ने जन्म लिया. ब्रिटिश राज में भी ईस्ट इंडिया कम्पनी ने जब इस स्थान का बंटवारा किया तो मस्जिद की जगह को राम जन्म स्थान का मन्दिर माना.

क्या भगवान राम या जीजस ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है?

कोर्ट ने पूछा जिस तरह से रामलला विराजमान का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया है. इस तरह का मामला दुनिया में कभी आया है, जब भगवान राम या जीजस ने अदालत का दरवाजा खटखटाया हो? इस पर परासरन ने कहा इस बारे में जानकारी नहीं है. पता करना पड़ेगा.

परासरन ने कहा कि इतने सदियों के बाद में हम यह साबित नही कर सकते हैं कि प्रभु राम उसी जगह पर पैदा हुए थे, लेकिन करोड़ों लोगों की यह आस्था अपने आप में एक सबूत है.
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