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अयोध्या विवाद सुनवाई: मुस्लिम पक्ष की आपत्ति पर CJI ने कहा- हमें कोई जल्दबाजी नहीं

गत शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की तरफ से हफ्ते में पांच दिन की सुनवाई का विरोध किया गया था, लेकिन उन्हें सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कोई राहत नहीं मिली थी.

Hindi.news18.com | August 14, 2019, 4:00 PM IST
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Last Updated August 14, 2019

हाइलाइट्स

अयोध्या मामले (Ayodhya case) में मध्यस्थता की कोशिश नाकाम होने के बाद मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में नियमित सुनवाई शुरू हो गई है. 6 अगस्त से शुरू हुई रोजाना सुनवाई (five days hearing) मंगलवार को भी जारी रहेगी. हालांकि गत शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष की तरफ से हफ्ते में पांच दिन की सुनवाई का विरोध किया गया था, लेकिन उन्हें सुप्रीम कोर्ट की तरफ से कोई राहत नहीं मिली थी. पहले चार दिन की सुनवाई में निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान ने अपना पक्ष रखा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो मामले की सुनवाई रोजाना करेगा. संवैधानिक पीठ सोमवार से शुक्रवार तक मामले की सुनवाई करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को कहा कि जब आपका बहस करने का नंबर आए और अगर आपको बीच में ब्रेक चहिये होगा तो हमें बताएं. सुप्रीम कोर्ट ने धवन से कहा अगर वह आराम करना चाहें तो किसी भी दिन अदालत को बता कर छुट्टी कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सप्ताह में 5 दिन ही सुनवाई होगी. इस अवधि में कोई कटौती नहीं की जाएगी और रोजाना सुनवाई जारी रहेगी. बुधवार को बहस के दौरान रामलला विराजमान के वकील ने गवाह हाशिम के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट में तर्क दिया कि जिस तरह मुसलमानों के लिए मक्‍का पवित्र है, उसी तरह हिन्‍दुओं के लिए अयोध्‍या है.
2:09 pm (IST)

वकील रंजीत कुमार ने कहा कि 1949 में मुस्लिम पक्ष ने कहा था कि वह 1935 से वहां पर नमाज नहीं पढ़ रहे हैं, ऐसे में अगर जमीन को हिंदुओं को दिया जाता है तो कोई परेशानी नहीं होगी. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामे की वैधता को लेका पूछा कि क्या यह हलफनामे वेरिफाई हैं? जस्टिस बोबड़े ने कहा कि यह हलफनामा तब दिया गया था जब सरकार विवादित जमीन को रिसीवर को देना चाहती थी, क्या यह बातें कभी मजिस्ट्रेट के सामने साबित हो पाई थी?

12:18 pm (IST)

वकील रंजीत कुमार ने कुछ मुसलमानों द्वारा फैजाबाद जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष 1950 में दायर किये गए कुछ हलफनामों को रखा. जिसमें सभी ने कहा है कि विवादित जमीन पर मंदिर था और उसे मस्जिद बनाने के लिए तोड़ा गया.

11:45 am (IST)

रंजीत कुमार ने कहा- मेरी दलीलें वकील पराशरन और वैद्यनाथन द्वारा दिये गए उन तर्कों से सहमत हैं जो ये साबित करते हैं कि उक्त जमीन खुद में दैवीय भूमि है. भगवान राम का उपासक होने के नाते मेरा वहां पर पूजा करने का अधिकार है. यह मेरा सामाजिक अधिकार है, जिसे हटाया नहीं जा सकता. ये वो जगह है, जहां भगवान राम का जन्म हुआ था. मैं यहां पर पूजा करने का अधिकार मांग रहा हूं.

11:36 am (IST)

गोपाल सिंह विशारद के वकील रंजीत कुमार ने अब्दुल गनी द्वारा दायर हलफनामे को कोर्ट के सामने रखते हुए कहा कि गनी ने अपने हलफनामे में कहा था कि मस्जिद का निर्माण राम मंदिर को तोड़कर किया गया था. मस्जिद के गिरने के बाद मुसलमानों ने वहां नमाज पढ़ना बंद कर दिया. लेकिन हिंदुओं ने जन्मस्थान की पूजा जारी रखी.

11:33 am (IST)

अयोध्या राम जन्मभूमि मामले में 10वें दिन की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में शुरू. गोपाल सिंह विशारद की ओर से रखा जा रहा है पक्ष. विशारद की ओर से 1950 मे मुक़दमा दाखिल किया गया था. इनका मुक़दमा सूट नंबर एक है.

11:24 am (IST)

नौवें दिन शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि ये मामला किसी आस्था का नहीं है बल्कि विवादित जमीन से जुड़ा है. इस मामले पर अब गुरुवार को सुनवाई होगी.

4:03 pm (IST)

पीएन मिश्रा ने कहा कि हमारा मानना है कि कि बाबर ने वहां कभी कोई मस्जिद नहीं बनवायी और हिन्दू उस स्थान पर हमेशा पूजा करते रहे है. हम इसको जन्मभूमि कहते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम आस्था को लेकर लगातार दलीलें सुन रहे है, जिन पर हाईकोर्ट ने विश्वास भी जताया है. इस पर जो भी स्पष्ट साक्ष्य हैं वह बताएं. सीजेआई ने कहा कि मानचित्र में यह साफ करिए कि मूर्तियां कहां हैं? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हिंदू ग्रंथों में आस्था का आधार विवादित नहीं है, हमको मंदिर के लिए दस्तावेजी सबूत पेश करिए.

3:36 pm (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि स्कंद पुराण कब लिखा गया था? राम जन्मस्थान पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने कहा कि ब्रिटिश लिखक के अनुसार गुप्त समय मे लिखा गया, यह भी कहा जाता है 4-5 AD में लिखा गया.

 

3:29 pm (IST)

रामजन्म स्थान पुनरुद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने स्कंद पुराण का जिक्र किया, जिसमें लोग सरयू नदी में स्नान करने के बाद जन्मस्थान का दर्शन करते थे. इसमें मंदिर का जिक्र नही है, लेकिन जन्मस्थान का दर्शन करते थे.

3:21 pm (IST)

रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन ने अपनी दलील पूरी की. रामजन्म स्थान पुनरोधान समिति के वकील पीएन मिश्रा ने दलील रखना शुरू किया. सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि क्या आप इस में पार्टी हैं? पीएन मिश्रा ने कहा कि हां, मैं सूट नम्बर 4 में प्रतिवादी नम्बर 20 हूं. मिश्रा ने कहा कि मैं तर्क दूंगा कि वह हमारे सिद्धांत, आस्था और विश्वासों के आधार पर एक मंदिर है. मैं अथर्व वेद से आरंभ करूंगा.

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