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इकबाल अंसारी ने कहा- फैसला जो कुछ भी हो हम उसका सम्मान करेंगे

News18 Uttar Pradesh
Updated: November 9, 2019, 7:57 AM IST
इकबाल अंसारी ने कहा- फैसला जो कुछ भी हो हम उसका सम्मान करेंगे
इकबाल अंसारी बोले- फैसला जो कुछ भी हो हम उसका सम्मान करेंगे

राम जन्म भूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले (Ram Janmbhoomi Babri Masjid Dispute Case) में शनिवार सुबह सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का ऐतिहासिक फैसला आएगा.

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अयोध्या. अयोध्या भूमि विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) शनिवार सुबह 10:30 बजे अपना फैसला सुनाएगा. फैसले से पहले बाबरी मस्जिद पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि फैसला जो कुछ भी होगा हम उसका सम्मान करेंगे. फैसले के मद्देनजर अंसारी ने कहा कि सभी नेता और समाज के प्रतिनिधित्व करने वाले वर्ग यही संदेश दे रहे हैं कि अदालत का फैसला माना जाएगा और उस फैसले को लेकर कोई भी ऐसी बात न की जाए जिससे किसी को तकलीफ हो.

बता दें कि यूपी सरकार ने फैसले के मद्देनजर अयोध्या समेत पूरे प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है. वहीं उत्तर प्रदेश के सभी स्कूल-कॉलेजों सहित सभी शिक्षण संस्थान को 9 से सोमवार 11 नवंबर तक बंद रखने का आदेश दिया गया है. इस संबंध में सभी डीएम को सूचना भेजी जा रही है. वैसे 12 नवंबर को गुरुनानक जयंती के उपलक्ष्य में छुट्टी होने के कारण स्कूल-कॉलेज अब 13 नवंबर को ही खुल पाएंगे. हालांकि बताया जा रहा है कि प्रदेश में स्थिति को देखते हुए ये छुट्टी बढ़ाई भी जा सकती है.

सुप्रीम कोर्ट में 2017 में शुरू हुई सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट में 2017 में सुनवाई की प्रक्रिया शुरू हुई. उस समय चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा थे. दीपक मिश्रा के बाद रंजन गोगोई CJI हुए. 8 जनवरी, 2019 को रंजन गोगोई ने ये मामला पांच जजों की एक खंडपीठ के सुपुर्द किया. 8 मार्च, 2019 को अदालत ने सभी मुख्य पक्षों को आठ हफ़्ते का समय देते हुए कहा कि वो आपसी बातचीत से मध्यस्थता की कोशिश करें. 13 मार्च को मध्यस्थता की कार्रवाई शुरू हुई. मई में कोर्ट ने इसका समय बढ़ाकर 15 अगस्त तक कर दिया. मगर मध्यस्थता की कोशिशें कामयाब नहीं हुईं. 6 अगस्त से कोर्ट ने फाइनल दलीलें सुननी शुरू कीं. 16 अक्टूबर को कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा. इस मामले पर 40 दिन तक सुनवाई चली थी. बता दें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं.

2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनाया था फैसला
बता दें अयोध्या जमीन विवाद पर तीन जजों की खंडपीठ, जस्टिस एस यू खान, जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस डी वी शर्मा ने 2:1 की मेजॉरिटी से फैसला सुनाया. कोर्ट ने 2.77 एकड़ की विवादित जमीन में रामलला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा और UP सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, तीनों का मालिकाना हक माना. इन तीनों के बीच जमीन का बंटवारा करने का निर्देश दिया. एक तिहाई रामलला को. एक तिहाई निर्मोही अखाड़ा को. और एक तिहाई मुस्लिम पक्ष को. जहां बाबरी मस्जिद का बीच वाला गुंबद हुआ करता था, वो जगह रामलला को मिली. राम चबूतरा और सीता रसोई निर्मोही अखाड़ा को दी गई. सभी पक्षों ने इस फैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में अपील की और इस पर स्टे लग गया.

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First published: November 9, 2019, 5:38 AM IST
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