अयोध्या: तीन महीने बाद शुरू हो सकता है मस्जिद निर्माण, दिलों जान से स्वीकारेगा मुस्लिम समाज
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अयोध्या: तीन महीने बाद शुरू हो सकता है मस्जिद निर्माण, दिलों जान से स्वीकारेगा मुस्लिम समाज
तीन महीने बाद शुरू हो सकता है मस्जिद निर्माण कार्य

बहुत सारे लोगों की जिज्ञासा है कि वहां पर मस्जिद (Mosque) का निर्माण किस तरह शुरू होगा, किस तरह वहां पर मस्जिद बनेगी और मस्जिद के साथ-साथ हॉस्पिटल और तमाम दूसरी चीजों को बनाए जाने की प्रक्रिया क्या होगी?

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अयोध्या. रौनाही में मिली 5 एकड़ जमीन पर सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड (Sunni Waqf Board) मस्जिद (Mosque) के साथ-साथ एक हॉस्पिटल, एक इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) और एक कम्युनिटी किचन बनाने जा रहा है. जमीन की नपाई का काम पूरा हो चुका है और जमीन सरकार की तरफ से वक्फ बोर्ड को हस्तांतरित की जा चुकी है. अब वहां पर इंतजार निर्माण कार्य के शुरू होने का है. बहुत सारे लोगों की जिज्ञासा है कि वहां पर मस्जिद का निर्माण किस तरह शुरू होगा, किस तरह वहां पर मस्जिद बनेगी और मस्जिद के साथ-साथ हॉस्पिटल और तमाम दूसरी चीजों को बनाए जाने की प्रक्रिया क्या होगी? इस पर न्यूज18 ने सुन्नी वक्फ बोर्ड द्वारा गठित इंडो इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के सचिव और प्रवक्ता अतहर हुसैन से बात की.

मस्जिद का निर्माण कब से शुरू हो रहा है और मस्जिद कब तक बनकर पूरी होगी?

अतहर हुसैन ने कहा इस जमीन का हस्तांतरण सरकार द्वारा किया जा चुका है. हमने इसकी नापाई भी कर ली है. अतहर हुसैन ने कहा इस 5 एकड़ जमीन का मिलना उस समय हुआ है जब कोरोना काल है. इस मेडिकल इमरजेंसी की वजह से हम अभी वहां पर काम पूरी तरह शुरू नहीं कर पाए हैं. इसी हफ्ते हम लोगों को जमीन पूरी तरह मिली है. कागजी कार्रवाई पूरी हो चुकी हैं. मौजूदा दौर में वहां पर अभी धान की फसल लगी हुई है. लिहाजा 3 महीने तक अभी वहां पर काम शुरू हो पाना संभव नहीं.



कैसी होगी मस्जिद की भव्यता?
अतहर हुसैन ने कहा कि मस्जिद की भव्यता को लेकर हम लोग तमाम तरह के विचार विमर्श कर रहे हैं. समाज के हर तबके से हम लोगों को राय मिल रही है. ट्रस्ट के मेंबर भी अपने विचार रख रहे हैं. अभी हम लोग इस मामले में सिर्फ वर्चुअल मीटिंग ही कर रहे हैं. देश और दुनिया की तमाम खूबसूरत मस्जिदों को भी देखा जा रहा है. रौनाही में बनने वाली मस्जिद की भव्यता का पूरा ख्याल रखा जाएगा. लेकिन अभी मस्जिद की शक्ल कैसी होगी यह बता पाना मुमकिन नहीं है. हम आर्किटेक्ट से भी बात कर रहे हैं. ज़मीन का नक्शा उन्हें सौंप दिया जाएगा. फिर उसपर वो मस्जिद और हॉस्पिटल का डिजाइन फाइनल करेंगे.

उस 5 एकड़ जमीन पर शुरुआत में कई विवाद भी उठे

अतहर हुसैन ने कहा क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में ही था. सुप्रीम कोर्ट ने ही राज्य सरकार को जमीन उपलब्ध कराने को कहा था. लिहाजा वहां पर विवाद की कोई बात नहीं हो सकती थी. हालांकि शुरुआत में कुछ लोगों ने इस जमीन पर अपनी कब्जेदारी भी ठोकी थी, लेकिन बाद में जमीन हम लोगों को पूरी तरह गैर विवादित मिली.

देश और प्रदेश की राजनीति पर मस्जिद निर्माण का क्या असर होगा?

अतहर हुसैन ने कहा कि हमारी कोशिश यही है कि मस्जिद निर्माण हो और देश दुनिया से मंदिर मस्जिद के राजनीतिक झगड़े का अंत हो. उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि वहां पर अल्लाह का घर बने और लोग इबादत करें, अच्छे काम करें और जकात दें. जिससे मंदिर-मस्जिद की सियासत पर अंकुश लग सके और हमें उम्मीद है कि हम उसी तर्ज पर आगे बढ़ रहे हैं.

मस्जिद निर्माण के बाद मुस्लिम समाज में इसकी कितनी स्वीकार्यता होगी?

अतहर हुसैन ने कहा कि मुस्लिम समाज भलाई की राह पर आगे बढ़ना चाहता है. मस्जिद निर्माण के साथ ही तमाम विवादों का अंत हो रहा है. मुस्लिम समाज में बेहतरी को अपनाने वाले लोगों के लिए यह एक हर्ष का विषय है और मुझे लगता है कि मुस्लिम समाज इसे दिलो जान से स्वीकार करेगा.
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