राम जन्मभूमि ट्रस्ट की अनुबंधित जमीन को मुस्लिम वक्फ बोर्ड ने बताया अपनी, PM से जांच कराने की मांग

श्रीराम जन्म भूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा अनुबंध कराई गई जमीन के सौदे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है

मुस्लिम वक्फ बोर्ड (Muslim Waqf Board) ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से इस विषय पर जांच करा कर वक्फ की जमीन को बचाने का कष्ट करने की मांग की है. इस जमीन पर दाखिल खारिज को लेकर भी आपत्ति लगाई गई थी जिसको सुल्तान अंसारी और रवि मोहन के नाम बैनामा होने के पूर्व ही खारिज कर दिया गया

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अयोध्या. उत्तर प्रदेश के अयोध्या (Ayodhya) के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Sri Ram janam Bhoomi Trust) के ऊपर जिस जमीन को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं उस पर अब मुस्लिम समाज (Muslim Society) का पक्ष सामने आया है. दावा किया जा रहा है कि वर्ष 2017 से पहले उपरोक्त जमीन मुस्लिम वक्फ बोर्ड (Muslim Waqf Board) की थी जिस पर मुस्लिम समाज के ही कुछ लोगों ने विरासत के आधार पर अपना नाम चलाया और फिर 2017 में वार्षिक जमीन हरीश पाठक और कुसुम पाठक के नाम बैनामा हुआ. इस पूरे विवाद में वक्फ बोर्ड की तरफ से कमिश्नर की अदालत में आपत्ति लगाई गई थी जिसके बावजूद संपत्ति का बैनामा कुसुम पाठक और हरीश पाठक के पक्ष में हुआ.

बाद में यह दाखिल खारिज पर आपत्ति लगाई गई थी जो वर्ष 2017 से 2021 तक बरकरार थी. कुसुम पाठक के द्वारा रवि मोहन और सुल्तान अंसारी को बनावा किया गया था. जबकि कुसुम पाठक और हरीश पाठक के द्वारा खरीदी गई संपत्ति पर दाखिल खारिज पर आपत्ति लगाई गई थी. वक्फ बोर्ड के लोगों का दावा है कि रजिस्ट्री ऑफिस में कर्मचारियों की मिलीभगत से उनकी दाखिल खारिज भी हो गई और उसी जमीन को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के हक में अनुबंधित किया गया है.

केयरटेकर ने विरासत के आधार पर जमीन अपने नाम करायी

वक्फ बोर्ड के सदस्य इकबाल ने बताया कि वर्ष 1924 में इस जमीन को वक्त की संपत्ति में शामिल किया गया था. वक्त बोर्ड में दफा 37 में समस्त जमीन की एंट्री कराई गई किसी कारणवश या जमीन तहसील में वक्त की संपत्ति चढ़ने से रह गई. इसका फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने विरासत के आधार पर अपने नाम दर्ज कराया जो इस जमीन के केयरटेकर थे. इस संपत्ति को उन्हीं लोगों के द्वारा कुसुम पाठक और हरीश पाठक को बैनामा किया गया, और जिस दिन इस संपत्ति को बैनामा किया गया उस समय उपरोक्त संपत्ति पर कमिश्नर के यहां से स्टे था.

स्टे के बावजूद हरीश पाठक और कुसुम पाठक के हक में जमीन बैनामा हो जाती है. इसमें वक्फ बोर्ड के कुछ लोग शामिल थे जिन्होंने पहले तो इसको वक्फ बोर्ड का माना और बाद में उसको मना कर दिया कि वक्फ बोर्ड की संपत्ति नहीं है. इसमें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट किस तरीके से आया इससे हमें कोई लेना-देना नहीं या वक्फ की प्रॉपर्टी है. हमारा प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से निवेदन है कि इस विषय पर जांच करा कर वक्फ की जमीन को बचाने का कष्ट करें. इस जमीन पर दाखिल खारिज को लेकर भी आपत्ति लगाई गई थी जिसको सुल्तान अंसारी और रवि मोहन के नाम बैनामा होने के पूर्व ही खारिज कर दिया गया.

तहसील कर्मचारियों को मिला कर वक्फ की संपत्ति अपने नाम करवाया

जमीन पर पहुंचे मुस्लिम समाज के लोगों ने कहां कि वक्फ बोर्ड की विवादित जमीन को कूटरचित ढंग से कराया गया बैनामा बनाने के दरम्यान मुकदमा न्यायालय में लंबित था. वक्फ बोर्ड के सदस्य वाहिद ने कहा कि नूर आलम आदि ने वक्फ की संपत्ति को तहसील कर्मचारियों को मिला कर के कूटरचित ढंग से विरासत के आधार पर अपने नाम करवा लिया था. इन्हीं लोगों ने वर्ष 2017 में कुसुम पाठक और हरीश पाठक को बैनामा किया. जमीन की बिक्री के समय अपर आयुक्त के यहां स्टे था. हम लोगों के दाखिल खारिज पर वक्फ की तरफ से आपत्ति लगाई गई थी. वर्ष 2017 से 2021 तक आपत्ति दर्ज रही बावजूद इसके रवि मोहन और अंसारी के नाम बैनामे के पूर्व आपत्ति खारिज कर दी गई.

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