अयोध्या के 9 मुस्लिमों ने ट्रस्ट को पत्र लिखकर पूछा- क्या कब्रिस्तान पर बनेगा राममंदिर?
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अयोध्या के 9 मुस्लिमों ने ट्रस्ट को पत्र लिखकर पूछा- क्या कब्रिस्तान पर बनेगा राममंदिर?
श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट की बैठक में तय होगी भूमि पूजन की तारीख (फाइल फोटो)

पत्र में कहा गया है कि विवादित जमीन अर्थात पूर्व में बाबरी ढांचा तीन तरफ से कब्रगाह से घिरा था.

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अयोध्या. रामनगरी अयोध्या (Ayodhya) निवासी नौ मुसलमानों की ओर से नवगठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Ram Temple Trust) को पत्र लिखा गया है. पत्र में सवाल किया गया है कि क्या कब्रगाह पर राम मंदिर बनाया जाएगा? पत्र में कहा गया है कि विवादित जमीन अर्थात पूर्व में बाबरी ढांचा तीन तरफ से कब्रगाह से घिरा था. देश की सर्वोच्च अदालत ने विवादित जमीन का फैसला रामलला के पक्ष में दिया है और शेष जमीन का निर्णय केंद्र सरकार के ऊपर छोड़ दिया. केंद्र सरकार ने पूरी 67 एकड़ जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए नवगठित ट्रस्ट को सौंप दी है.

इन्होंने लिखा पत्र
मुसलमानों की ओर से सवाल उठाया गया है कि क्या मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का मंदिर कब्रगाह पर बनाया जाएगा? सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता एमआर शमशाद के माध्यम से भेजे गए इस पत्र में ट्रस्ट सदस्यों से विचार की अपील की गई है. यह पत्र सद्दाम हुसैन, नदीम, मोहम्मद आजम कादरी, गुलाम मोइनुद्दीन, हाजी अच्छन खान, हाजी मोहम्मद लईक, खालिक अहमद खान, मोहम्मद इमरान और एहसान अली की ओर से भेजा गया है.

गंज शहीदान के नाम से मशहूर था इलाका
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केंद्र सरकार की ओर से नवगठित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्यों ने वरिष्ठ अधिवक्ता के परासरण के साथ सभी सदस्यों और कन्वेनर जिलाधिकारी अयोध्या अनुज कुमार झा को भेजे गए इस पत्र में कहा है कि फैजाबाद गैजेटियर में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि बाबरी मस्जिद तीन तरफ से कब्रगाह से घिरी थी और यह इलाका 'गंज शहीदान' के नाम से जाना जाता था. 1855 के युद्ध के बाद 75 मुस्लिमों को इसी 'गंज शहीदान' में दफनाया गया था. वर्ष 1949 में बाबरी मस्जिद में मूर्तियां रखे जाने के बाद यहां दफन किए जाने का काम बंद कर दिया गया. इस जमीन पर धार्मिक रूप से इबादत और मस्जिद निर्माण की मनाही है.



उठाए ये सवाल
पत्र में दावा किया गया है कि रामलला विराजमान मुकदमे में यह भी हिस्सा था. यह इकलौता सूट था, जिसे इलाहाबाद हाई कोर्ट के 3 जजों ने स्वीकार किया था. 1994 में सुप्रीम कोर्ट के इस्माइल फारुकी मुकदमे में विवाद केवल 1480 स्क्वायर यार्ड का बचा था, जिसका फैसला 9 नवंबर 2019 को हुआ. तत्कालीन केंद्र सरकार ने कानून व्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द के मद्देनजर पूरी जमीन का अयोध्या एक्ट के तहत अधिग्रहण कर लिया था. सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार की ओर से इसका हवाला दिए जाने के बाद कोर्ट ने अधिग्रहण को सही ठहराया था, न कि धार्मिक क्रियाकलाप के लिए दिए जाने के लिए.

ट्रस्ट से कब्रगाह की जमीन मुस्लिमों को सौंपने की अपील
पत्र में सवाल उठाया गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित 1480 स्क्वायर यार्ड जमीन का फैसला किया है, बाकी का निर्णय केंद्र सरकार के ऊपर छोड़ दिया. केंद्र सरकार ने अयोध्या एक्ट के तहत गैर विवादित अधिग्रहित जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए नवगठित ट्रस्ट को सौंप दी. पत्र में ट्रस्ट के सदस्यों से अपील की गई है कि वह इस बात पर विचार करे कि क्या कब्रगाह पर श्री राम के मंदिर का निर्माण किया जाए? साथ ही मांग की गई है कि कब्रगाह की चार पांच एकड़ जमीन मुस्लिमों को सौंप दी जाए.

अयोध्या डीएम ने किया इनकार
अयोध्या के जिलाधिकारी अनुज झा ने कहा कि फिलहाल 67 एकड़ के परिसर के भीतर कोई कब्र नहीं है. अंग्रेजी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, डीएम अनुज कुमार झा ने कहा, 'वर्तमान में राम जन्मभूमि के 67 एकड़ के परिसर में कोई कब्रिस्तान नहीं है.' डीएम अयोध्या ने कहा, 'चिट्ठी में लिखे गए सभी तथ्यों से सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को  अवगत कराया गया. यह मुद्दा सुनवाई के दौरान भी आया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले में (9 नवंबर, 2019 को) इन सभी तथ्यों का भी स्पष्ट उल्लेख है.'

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