संतों ने कहा पुराने मॉडल पर ही बनेगा राम मंदिर, RSS नेता पहुंच रहे हैं अयोध्या
Ayodhya News in Hindi

संतों ने कहा पुराने मॉडल पर ही बनेगा राम मंदिर, RSS नेता पहुंच रहे हैं अयोध्या
संतों ने कांग्रेस पर लगाया गंभीर आरोप

संतों ने यह आशंका भी जताई कि राम मंदिर निर्माण को रोकने के लिए कांग्रेस राजनीतिक रूप से अंतिम बॉल तक खेलने की कोशिश कर रही है और इसके लिए अलग-अलग लोगों को आगे लाया जा रहा है.

  • Share this:
  • fb
  • twitter
  • linkedin
अयोध्या.  राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Ram Janambhoomi Teerth Kshtra Trust) के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास (Nritya Gopal Das) के जन्मोत्सव को लेकर देश के बड़े-बड़े संत और आरएसएस (RSS) में नंबर दो का दर्जा रखने वाले भैया जी जोशी अयोध्या (Ayodhya) पहुंचे रहे हैं. इस दौरान विश्व हिंदू परिषद (VHP) के मंदिर मॉडल और राम मंदिर (Ram Temple) निर्माण को लेकर भी चर्चा होनी है. बुधवार को अयोध्या पहुंचे कुछ संतों ने इसके संकेत दिए और कई चीजें बिल्कुल साफ कर दी. जैसे कि विहिप के राम मंदिर मॉडल पर ही राम मंदिर का निर्माण होगा और उसमें कोई मूलभूत परिवर्तन होने वाला नहीं है. दूसरी बात यह कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यकाल में ही राम मंदिर का अधिकतर निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा, जिससे बाद में कोई व्यवधान ना आए. संतों ने यह आशंका भी जताई कि राम मंदिर निर्माण को रोकने के लिए कांग्रेस राजनीतिक रूप से अंतिम बॉल तक खेलने की कोशिश कर रही है और इसके लिए अलग-अलग लोगों को आगे लाया जा रहा है. उनका आरोप है कि कोरोना वायरस के नाम पर राम जन्मभूमि पर बनने वाले राम मंदिर निर्माण और काशी विश्वनाथ के विस्तारीकरण के कार्य को रोकने की साजिश की जा रही है

यही नहीं पाकिस्तान में राम मंदिर निर्माण रोकने की हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी संत नाराज हैं और कह रहे हैं कि चाहे देश के बाहर का कोई या देश के भीतर का कोई इस तरह की आवाज उठाता है तो वह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना कर रहा है. साफ जाहिर है कि नृत्य गोपाल दास के गुरुवार को होने वाले जन्मोत्सव से जुड़ने वाले देश के बड़े संत, आरएसएस और विहिप के बड़े चेहरे राम मंदिर निर्माण को लेकर भी चर्चा करेंगे और इसके बाद राम मंदिर निर्माण के कार्य को तेज किया जाएगा.

शंकराचार्य ने पूछा- संगमरमर का पत्थर कहां है?



जगतगुरु शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा जिस मॉडल को पूरे भारत की जनता ने स्वीकार किया और सवा सवा रुपया मंदिर निर्माण के लिए अपना योगदान दिया है उसी मॉडल के अनुसार मंदिर बनेगा. उन्होंने कहा कि संगमरमर का पत्थर आजकल है कहां? मांग करने वाले मकराना बताएं पत्थर कहां से आएगा. मकराना में पत्थर नहीं है. उदयपुर का पत्थर भी कच्चा है. जबलपुर का पत्थर भी कच्चा है. वह टिकने वाला नहीं है. 10 साल भी नहीं टिकेगा. मार्बल कहां से लाएं और पत्थर कहां से लाएंगे? कौन है जो यह सवाल उठा रहे हैं? मैं उनको जानता नहीं हूं. राम मंदिर बनना शुरू होगा तो रामलला की कृपा होगी. बनने में शीघ्रता होगी क्योंकि गाढ़ा लगाकर चुनाई करके उसको सुखाना नहीं पड़ेगा. केवल पत्थर जमाते हुए चले जाएंगे और निर्माण होगा. सरकार बनती रहती है. सरकार बनेगी और मंदिर का कार्य भी चलेगा और प्रदेश का विकास भी होगा.



कांग्रेस राजनीतिक रूप से अंतिम बाल तक खेलने की कर रही है कोशिश

स्वामी जितेंन्द्रा नंद सरस्वती ने कहा मैं बेशक कह सकता हूं कि कांग्रेस राजनैतिक रूप से अंतिम बॉल तक खेलने की कोशिश कर रही है. जिस प्रकार प्रशांत भूषण, कपिल सिब्बल, विवेक तनखा आगे बढ़ कर के दलित विचारक के नाम पर कांग्रेसी नेता उदित राज, दिलीप मंडल और नया को आगे किया है कि कोरोनावायरस काल में मंदिर निर्माण को रोक दिया जाए. इसके साथ श्री राम जन्मभूमि के साथ ही काशी विश्वनाथ के जो विस्तारीकरण का कार्य है उसको भी रोकने की मांग कर रहे हैं. दरअसल कुछ रामालय न्यास के न्यासी लोग हैं. एक-दो संत हैं उन्हीं लोगों ने अयोध्या में भी ट्रस्ट पहले से बना रखे थे. अपनी मंशा सफल न होते देख अयोध्या से लेकर काशी तक मंदिर निर्माण के कार्य को रोकने की बात कर रहे हैं. वास्तव में वह उन खतरों से खेल रहे हैं कि जैसे  दंगे अमेरिका के अंदर हो रहे हैं ऐसे दंगे भारत में क्यों नहीं हो रहे? यह वही लोग हैं जो ट्विटर पर उकसा करके पीएफआई द्वारा अनुदानित है. जब भारत में उनकी कोई नहीं सुन रहा तो ऐसी दशा में पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण रोक दिया जाए इसके लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करता है. श्री राम जन्मभूमि का फैसला सुप्रीम कोर्ट के 5 सदस्य संविधान बेंच के सर्वसम्मति का फैसला है. इसलिए इस संबंध में कोई विदेशी राष्ट्र बोलता है अथवा भारत के अंदर कोई अन्य व्यक्ति बोलता है तो मेरा मानना है कि यह सुप्रीम कोर्ट की अवमानना है.

योगी आदित्यनाथ सरकार की तारीफ़

निश्चित तौर से अगर यहां पर योगी आदित्यनाथ की सरकार नहीं रही होती तो 20000 पेज का अनुवाद सुप्रीम कोर्ट में को नहीं मिलता. सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई नहीं शुरू हो सकती थी. क्योंकि 2014 में सरकार बन गई थी. 2017 तक वह सुनवाई क्यों नहीं शुरू हो पाई. इसलिए नहीं शुरू हो पाई क्योंकि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार किसी भी कीमत पर अनुवाद करा कर देने को तैयार नहीं थी. इस नाते पूर्व के अनुभवों से सबक लेते हुए हम यह मानकर के चलते हैं कि जब तक भगवान राम लला के सेवक योगी आदित्यनाथ बैठे हैं तब तक हम मंदिर निर्माण के कार्य को पूरा कर लेंगे.

ये भी पढ़ें:

Cyclone Nisarg: आज से लखनऊ में 3 दिन होगी बारिश, चेतावनी जारी

बिजली कटने पर रिटायर्ड फौजी का हाई वोल्टेज ड्रामा, SDO को कुचलने की कोशिश
First published: June 3, 2020, 3:43 PM IST
अगली ख़बर

फोटो

corona virus btn
corona virus btn
Loading