अयोध्या विवाद: मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, सप्ताह में 5 दिन होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को कहा कि जब आपका बहस करने का नंबर आये और अगर आपको बीच में ब्रेक चहिये होगा तो हमें बताएं.

News18 Uttar Pradesh
Updated: August 9, 2019, 5:05 PM IST
अयोध्या विवाद: मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, सप्ताह में 5 दिन होगी सुनवाई
अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार से शुक्रवार तक सुनवाई करेगा.
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Updated: August 9, 2019, 5:05 PM IST
अयोध्या विवाद (Ayodhya Dispute) पर मध्यस्थता की कोशिशें नाकाम होने के बाद मामले की 6 अगस्त से नियमित सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की संविधान पीठ ने मुस्लिम पक्ष को राहत नहीं दी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वो मामले की सुनवाई रोजाना करेगी. संविधान पीठ सोमवार से शुक्रवार तक मामले की सुनवाई करेगा.

सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन को कहा कि जब आपका बहस करने का नंबर आये और अगर आपको बीच में ब्रेक चहिये होगा तो हमें बताएं. सुप्रीम कोर्ट ने धवन से कहा अगर वह आराम करना चाहें तो किसी भी दिन अदालत को बता कर छुट्टी कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि सप्ताह में 5 दिन ही सुनवाई होगी. इस अवधि में कोई कटौती नहीं की जाएगी और रोजाना सुनवाई जारी रहेगी.

मुस्लिम पक्ष ने किया था विरोध
दरअसल नियमित सुनवाई के चौथे दिन यानी शुक्रवार को मुस्लिम पक्ष के वकील ने राजीब धवन ने सफ्ताह में पांच दिन सुनवाई का विरोध किया. उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में 5 दिन तक वह कोर्ट को असिस्ट नहीं कर सकते हैं. लिहाजा इस पूरे मामले की सुनवाई 5 दिन न की जाए, क्योंकि इस पूरे मामले में कुछ दस्तावेज उर्दू में है. जिसको ट्रांसलेट करने में समय लगेगा और उसके साथ-साथ बहस करना काफी मुश्किल होगा.

हालांकि हिंदू महासभा की तरफ से इस पर विरोध जताया गया. उन्होंने कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 5 दिन की सुनवाई कर रहा है इसके लिए सुप्रीम कोर्ट को धन्यवाद. लेकिन मुस्लिम पक्षकारों द्वारा इस मामले की सुनवाई लंबी चले इसलिए इस सुनवाई का वो विरोध कर रहे है.

acharya satyendra das
रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास


आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा- बहस टालने का बहाना
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उधर रामलला के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि 70 वर्ष बीत गए, जितना भी विलंब हुआ  वह विपक्षियों के विरोध के कारण हुआ. कभी अनुवाद नहीं है और कभी मुकदमा तैयार नहीं है का बहाना बना कर टालते रहे हैं. अब कोर्ट इस समस्या का समाधान करने के लिए है तत्पर तब सुन्नी वक्फ बोर्ड ने एक और अवरोध लगा दिया कि 5 दिन सुनवाई न की जाए. दोनों पक्ष सबूत दे. सबूत के आधार पर होगा फैसला. सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास कोई सबूत नहीं है,  क्योंकि वहां पर राम जन्मभूमि है. राम की ही जमीन है और राम मंदिर ही विराजमान है. सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास न कोई तथ्य है न अधिकार है और न ही कोई सबूत है. केवल अवरोध करके समय बर्बाद करना है. कोर्ट किसी की भी बात न माने जो सबूत पेश करते हैं उनके पक्ष में फैसला जल्द कर दे.
First published: August 9, 2019, 4:22 PM IST
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