राम जन्‍मभूमि विवाद: मुस्लिम पक्ष बोला- कानून के हिसाब से चलेगा केस

News18 Uttar Pradesh
Updated: September 2, 2019, 3:30 PM IST
राम जन्‍मभूमि विवाद: मुस्लिम पक्ष बोला- कानून के हिसाब से चलेगा केस
सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या राम जन्‍मभूमि विवाद की सुनवाई रही है. (फाइल फोटो)

राजीव धवन ने कहा कि महाभारत (Mahabharat) एक इतिहास है और रामायण (Ramayana) एक काव्य है. इस पर जस्टिस बोबडे ने पूछा इन दोनों में क्या अंतर है?

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अयोध्या (Ayodhya) राम जन्मभूमि (Ramjanambhoomi) और बाबरी मस्जिद (Babri Mosque) विवाद की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में 17वें दिन भी जारी है. सोमवार को मुस्लिम पक्षकारों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील राजीव धवन (Rajeev Dhawan) ने दलीलें पेश कीं. उन्होंने हिंदू पक्ष की तरफ से पेश की गई दलीलों को काटते हुए कहा कि मुकदमा कानून अनुसार चलेगा, वेद और स्कंद पुराण के आधार पर नहीं. उन्होंने हिंदू पक्ष के परिक्रमा वाले दलील पर कहा कि लोगों का उस स्थान की परिक्रमा करना धार्मिक विश्वास को दिखाता है. यह कोई सबूत नहीं है. वर्ष 1858 से पहले के गजेटियर का हवाला देना भी गलत है. अंग्रेजों ने लोगों से जो सुना लिख लिया. इसका मकसद ब्रिटिश लोगों को जानकारी देना भर था. मुस्लिम पक्षकार के वकील ने रामायण को काल्‍पनिक काव्‍य करार दिया.

'अनुभवहीन इतिहासकार की बात को नहीं मान सकते'

राजीव धवन ने दलील देते हुए कहा, 'कहा जा रहा है कि विदेशी यात्रियों ने मस्ज़िद का ज़िक्र नहीं किया. लेकिन मार्को पोलो ने भी तो चीन की महान दीवार के बारे में नहीं लिखा था. मामला कानून का है. हम इस मामले में किसी अनुभवहीन इतिहासकार की बात को नहीं मान सकते हैं. हम सभी अनुभवहीन ही हैं.'

इस पर कोर्ट ने राजीव धवन से कहा कि आपने भी हाईकोर्ट में ऐतिहासिक तथ्य रखे थे. जस्टिस डीवाई चंद्रचूर्ण ने कहा कि आपने (राजीव धवन) भी कुछ ऐतिहासिक साक्ष्य दिए हैं. कोई ऐसा साक्ष्य है, जिसपर दोनों ने भरोसा जताया हो?

महाभारत इतिहास है और रामायण एक काव्य

इससे पहले राजीव धवन ने कहा कि महाभारत एक इतिहास है और रामायण एक काव्य है. इस पर जस्टिस बोबडे ने पूछा इन दोनों में क्या अंतर है? धवन ने कहा काव्य तुलसीदास द्वारा कल्पना के आधार पर लिखी गई थी. इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा, 'कुछ तो साक्ष्य के आधार पर लिखा जाता होगा.'

धवन ने दलील देते हुए कहा, 'हम सिर्फ इसलिए इस पक्ष को मज़बूती से देख रहे हैं, क्योंकि वहां कि शिला पर एक मोर या कमल था. इसका मतलब यह नहीं है कि मस्जिद से पहले एक विशाल संरचना थी.' भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के लिए तैयार प्रश्न का हवाला देते हुए धवन ने कहा उनसे यह पूछा गया था कि क्या कोई मंदिर था, जिसे मस्जिद निर्माण के लिए ढहा दिया गया था?
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(रिपोर्ट: सुशिल पांडेय)

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First published: September 2, 2019, 12:57 PM IST
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