राम मंदिर निर्माण और रामायण Encyclopedia बनाने की योजना पर काम कर रही योगी सरकार
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राम मंदिर निर्माण और रामायण Encyclopedia बनाने की योजना पर काम कर रही योगी सरकार
अयोध्या में बनाए जाने वाले राम मंदिर का प्रतीकात्मक मॉडल (फाइल फोटो)

सरकार ग्लोबल इन्साइक्लोपीडिया ऑफ रामायण (Ramayana) के नाम से प्रामाणिक दस्तावेज प्रकाशित करेगी. इसके तहत पूरी दुनिया में रामायण गाथा का संकलन होगा. मुख्यमंत्री योगी ने इसके लिए दो साल पहले मई 2018 में मंजूरी दे दी थी

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अयोध्या. कोरोनावायरस (COVID-19) के चलते लागू लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण (Ram Temple Construction) की तारीख की घोषणा एक बार फिर नहीं हो सकी है. वहीं राम मंदिर के वैश्विक महत्व को देखते हुए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Government) इसके निर्माण के लिए नई योजना पर काम कर रही है. सरकार ग्लोबल इन्साइक्लोपीडिया ऑफ रामायण के नाम से प्रामाणिक दस्तावेज प्रकाशित करेगी. इसके तहत पूरी दुनिया में रामायण गाथा का संकलन होगा. मुख्यमंत्री योगी ने इसके लिए दो साल पहले मंजूरी दे दी थी.

अयोध्या शोध संस्थान के डायरेक्टर डॉ. वाईपी सिंह के अनुसार इस योजना पर काम शुरू कर दिया गया है. सीएम योगी ने मई 2018 में बैठक में इस योजना पर काम करने की सहमति जताई थी. अब पांच साल का लक्ष्य बनाकर इसके प्रकाशन की योजना तैयार की गयी है. उनके मुताबिक पंचवर्षीय इस प्रोजेक्ट के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा हाल ही में 50-60 लाख की मदद दी गई है. इस बाबत कॉन्फ्रेंस के आयोजन और विदेशी संपर्क सूत्रों से वार्ता की शुरुआत कर दी गई है.

कार्य योजना के तहत इन्साइक्लोपीडिया को 150 खंडों में प्रकाशित करने का प्लान तैयार किया गया है. जिसमें देश के सभी राज्यों और डेढ़ दर्जन दूसरे देश राम कथा पर सामग्री संकलित करेंगे और उन सभी को एक साथ जोड़कर प्रकाशित किया जाएगा. सरकार इस प्रोजेक्ट के जरिए देश की युवा पीढ़ी को भगवान श्रीराम के चरित्र, आदर्श और उनकी यशगाथा को दस्तावेजों, तथ्यों और प्रमाणों को अनुसंधान के बाद पेश करना चाहती है.



भारत समेत 10 देशों में दो दर्जन से ज्‍यादा भाषाओं में रामायण के अपने-अपने संस्‍करण हैं (प्रतीकात्मक तस्वीर)

शोध संस्थान रामायण देशों का समूह बनाने पर भी काम कर रहा

इसके साथ शोध संस्थान रामायण देशों का समूह बनाने पर भी काम कर रहा है. इसमें विदेश मंत्रालय की भी मदद ली जाएगी. अध्ययन के दायरे में दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य पूर्व एशिया, मिस्र, यूरोप, अमेरिका, कैरेबियन, अफ्रीकी देश आएंगे.

वाईपी सिंह के अनुसार ग्रुप ऑफ रामायण देशों में इंडोनेशिया, मलेशिया, थाइलैंड, सूरीनाम, त्रिनिनाद, गुयाना, वियतनाम, कंबोडिया, लाओस, मॉरीशस, केन्या आदि देश शामिल होंगे. साथ ही इटली और इलाके में भी श्रीराम और हनुमान के शिलालेख पाए गए हैं. जबकि अमेरिका के होंडुरास के जंगलों में भगवान राम की मूर्ति मिली है. अन्य देशों में भी भगवान राम से जुड़े शिलालेख और पुरातत्व महत्व के चिन्ह मिले हैं. इन सभी का अध्ययन और संकलन किया जा रहा है. सभी देशों की रामलीलाओं का भी दस्तावेजीकरण होगा. दुनिया के तमाम देशों के मंदिरों में स्थापित राम-सीता की मूर्तियों आदि को भी अध्ययन का विषय बनाया जाएगा. देश के 11 राज्य भी रामवनगमन से जुड़े हैं. इन राज्यों को भी इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाए जाने की योजना है.

 
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