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    राम मंदिर ट्रस्‍ट ने 70 एकड़ के मास्टरप्लान के लिए मांगे सुझाव, म्‍यूजियम, गुरुकुल और गौशाला पर रहेगा खास फोकस

    श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट
    श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट

    श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ( Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra) ने देशभर के लोगों से 70 एकड़ के मास्टरप्लान के लिए सुझाव मांगे हैं.

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    अयोध्या: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ( Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra) ने ट्विटर पर पोस्ट डालकर राम जन्मभूमि परिसर के 70 एकड़ के मास्टरप्लान में देशवासियों से सुझाव मांगा है. इसे ट्रस्‍ट द्वारा भगवान श्रीराम के भक्तों को एक अनोखा उपहार माना जा रहा है. जी हां, राम मंदिर निर्माण के लिए बनाए गए ट्रस्ट की ओर से 70 एकड़ के मास्टरप्लान (Masterplan ) के लिए सभी विद्वतजनों और वास्तुविदों के लिए सुझाव आमंत्रित किए गए हैं. राम मंदिर निर्माण समिति ने बैठक के आखिरी दिन ये फैसला लिया था कि परिसर में निर्माण कार्य के लिए वो देशवासियों से सुझाव मांगेगी.  राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की इस कवायद में म्‍यूजियम, गुरुकुल (Gurukul) और गौशाला पर खास फोकस रहेगा.

    राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने परिसर के मास्‍टरप्‍लान में हर रोज एक लाख और सप्‍ताह में पांच लाख भक्‍तों के आने की संभावना के बीच परिसर में सुविधाओं के लिहाज से सुझाव मांगे हैं.
    25 नवंबर तक आमंत्रित हैं सुझाव रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि जो भी मंदिर परिसर के निर्माण संबंधी सुझाव दे रहे हैं, वे 25 नवंबर 2020 तक इसे भेज दें. इसके लिए बकायदा तीन ईमेल एड्रेस भी बताए गए हैं, जिन पर सुझाव भेजने हैं. ट्रस्‍ट ने कहा कि सभी बन्धुओं, वास्तुविदों, विषय के विद्वानों से हमारा निवेदन है कि 25 नवम्बर 2020 तक अपने सुझाव और विचार निम्नलिखित ईमेल पर अवश्य भेज दें.

    यह सुझाव परिसर के विभिन्न आयामों जैसे धार्मिक यात्रा, संस्कृति, विज्ञान आदि को समाहित करते हुए होने चाहिए. इस से सम्बंधित सभी जानकारी ट्रस्ट की वेबसाइट http://srjbtkshetra.org पर उपलब्ध है. सुझावों को स्वीकार अथवा अस्वीकार करने का ट्रस्ट के निर्णय अंतिम होगा.



    आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस साल 5 अगस्‍त को अध्‍योध्‍या में राम मंदिर का विधिवत भूमि पूजन किया था. इस मौके पर उन्‍होंने कहा था कि  विश्व की सर्वाधिक मुस्लिम जनसंख्या वाले इंडोनेशिया सहित दुनिया में कई ऐसे देश हैं जो भगवान राम के नाम का वंदन करते हैं. राम मंदिर को भारतीय संस्कृति की ‘‘समृद्ध विरासत’’ का द्योतक बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अनंतकाल तक पूरी मानवता को प्रेरणा देगा. साथ ही कहा था कि रामायण इंडोनेशिया, कंबोडिया, लाओस (Laos), मलेशिया, थाईलैंड, श्रीलंका और नेपाल में प्रसिद्ध और पूजनीय है.
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