अयोध्या के संत बोले- रामायण, महाभारत और चारों वेद परम सत्य

अयोध्या के संतों ने कहा कि हिंदू पक्ष ने सभी प्रमाण कोर्ट में पेश किए हैं. ऐसे में प्रमाण के आधार पर ही कोर्ट को निर्णय करना है.

KB Shukla | News18 Uttar Pradesh
Updated: September 2, 2019, 3:44 PM IST
अयोध्या के संत बोले- रामायण, महाभारत और चारों वेद परम सत्य
आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि रामायण, महाभारत और चारों वेद परम सत्य हैं.
KB Shukla | News18 Uttar Pradesh
Updated: September 2, 2019, 3:44 PM IST
रामजन्‍मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले में 2 सितंबर से मुस्लिम पक्षकार की ओर से पक्ष रखने की प्रक्रिया शुरू हुई है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन (Lawyer Rajeev Dhawan) ने रामायण और महाभारत (Mhabharata) को काल्पनिक बताया. इस पर अयोध्या के (Ayodhya) संतों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. अयोध्या के संतों का कहना है कि हमारे यहां कोई भी ग्रंथ काल्पनिक नहीं है. रामायण (Ramayana), महाभारत और चारों वेद परम सत्य हैं और ऋषियों के द्वारा लिखे गए हैं. उनका कहना है कि मुस्लिम पक्ष के पास कोई प्रमाण नहीं है, लिहाजा वे सनातन धर्म के ग्रंथों को काल्पनिक बताने में जुटे हैं.

अयोध्या के संतों ने कहा कि हिंदू पक्ष के सभी प्रमाण कोर्ट में प्रस्तुत किए गए हैं. प्रमाण के आधार पर ही कोर्ट को निर्णय करना है. विवादित भूमि पर रामलला का स्वामित्व है. रामजन्मभूमि के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा कि मुस्लिम पक्ष घबराया हुआ है. इसलिए ग्रंथों को काल्पनिक बता रहा है. रामजन्मभूमि न्यास के वरिष्ठ सदस्य कमल नयन दास ने कहा, 'हमारे यहां सनातन धर्म में वेद प्रमाण हैं. यह राष्ट्र श्रीराम का है और यहां रहने वाले हिंदू और मुसलमान श्रीराम के वंशज हैं. इन रचनाओं को जो काल्पनिक बता रहे हैं, उनकी दृष्टि बस यहीं तक है.'

महाभारत इतिहास और रामायण काव्य

इससे पहले मुस्लिम पक्षकार की ओर से पेश वरिष्‍ठ अधिवक्‍ता राजीव धवन ने कहा कि महाभारत एक इतिहास है और रामायण एक काव्य है. इस पर जस्टिस बोबडे ने पूछा इन दोनों में क्या अंतर है? धवन ने कहा काव्य तुलसीदास द्वारा कल्पना के आधार पर लिखी गई थी. इस पर जस्टिस बोबडे ने कहा, 'कुछ तो साक्ष्य के आधार पर लिखा जाता होगा.'

धवन ने दलील देते हुए कहा, 'हम सिर्फ इसलिए इस पक्ष को मज़बूती से देख रहे हैं, क्योंकि वहां कि शिला पर एक मोर या कमल था. इसका मतलब यह नहीं है कि मस्जिद से पहले एक विशाल संरचना थी.' भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के लिए तैयार प्रश्न का हवाला देते हुए धवन ने कहा उनसे यह पूछा गया था कि क्या कोई मंदिर था, जिसे मस्जिद निर्माण के लिए ढहा दिया गया था?

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए अयोध्या से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: September 2, 2019, 3:25 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...