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जानिए पिछले 30 सालों से क्या है रामलला की दिनचर्या, कब होती है पूजा और कब लगता है भोग

News18Hindi
Updated: November 11, 2019, 7:33 PM IST
जानिए पिछले 30 सालों से क्या है रामलला की दिनचर्या, कब होती है पूजा और कब लगता है भोग
भगवान को दो रूप से भोग लगाते हैं. एक बाल रूप का भोग लगते हैं और एक युवावस्था का भोग लगते हैं

रामलला (Ramlala) के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास (Satyendra Das) कहते हैं, 'सुबह 5 बजे से रामलला की पूजा शुरू हो जाती है और पूजा के बाद 7 बजे से रामलला का दर्शन शुरू हो जाता है.

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नई दिल्ली. रामलला (Ramlala) विराजमान की लगभग 3 दशक से सेवा करने वाले राम जन्मभूमि(Ram Janam Bhumi) के मुख्य पुजारी सत्येंद्र दास (Satyendra Das) कहते हैं, 'भगवान को दो रूप से भोग लगाते हैं. एक बाल रूप का भोग लगाते हैं और एक युवावस्था का भोग लगाते हैं, जिसे राजभोग भी कहते हैं. फल-फूल, मिष्ठान, मेवा यह सब भोग बालरूप के लिए होता है, जबकि पूरी, सब्जी, खीर यह सब जो भोग लगते हैं वह राजभोग कहा जाता है. भगवान रामलला की पूजा बहुत लोग सखा के रूप में भी करते हैं, लेकिन मैं उनकी पूजा ईश्वर के रूप में करता हूं.'

रामलला आपके मित्र या भगवान

दास आगे कहते हैं, 'रामलला का वस्त्र सालभर में एक ही बार रिसीवर द्वारा बनता है, लेकिन जब भक्तों ने सुना कि भगवान का वस्त्र साल में एक ही बार बनता है और भगवान को सालभर पहनना पड़ता है तो सारे भक्तों ने कपड़े देने शुरू कर दिए और अब हम उनको कपड़े बदल-बदल के पहनाते हैं. रामलला को गहने नहीं पहनाते हैं. रामलला को सिर्फ कपड़े ही पहनाते हैं. साथ ही फूलों की माला भी पहनाते हैं. चंदन, तिलक लगा कर अभिषेक करते हैं.

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रामलला का वस्त्र सालभर में एक ही बार रिसीवर द्वारा बनता है


रामलला की दिनचर्या

दास के मुताबिक, 'सुबह 5 बजे से रामलला की पूजा शुरू हो जाती है और पूजा के बाद 7 बजे से रामलला का दर्शन शुरू हो जाता है. रामलला की पूजा 2 घंटे तक चलती है. पूजा खत्म होने के बाद रामलला को स्नान कराते हैं. उसके बाद कपड़ा पहनाते हैं फिर तिलक लगाते हैं. चंदन लगाते हैं. फूल माला पहनाते हैं. श्रृंगार होता है उसके बाद श्रृंगार आरती होती है. बता दें कि भगवान राम के साथ उनके भाइयों तथा शालिग्राम भगवान और हनुमान जी की भी पूजा होती है.

दास कहते हैं इन कामों में घंटों लग जाते हैं. दिन के 11 बजे तक दर्शन होता है और 12 बजे मंदिर बंद कर दिए जाते हैं. भगवान आधे घंटे आराम करते हैं. 12:30 मंदिर को फिर से खोल दिया जाता है. फिर शाम 5:30 बजे तक दर्शन होता है फिर उसके बाद 7 बजे तक वही पूजा-अर्चना, भोग, श्रृंगार और आरती होती है. फिर रात में भगवान 7 बजे से लेकर सुबह 5 बजे तक आराम करते हैं.पिछले दिनों ही सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अयोध्या (Ayodhya) पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए मंदिर बनाने का रास्ता साफ कर दिया है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि रामलला का भव्य मंदिर बनाया जाएगा.  कोर्ट ने केंद्र सरकार और राज्य सरकार को तीन महीने के अंदर एक ट्र्स्ट बनाने का आदेश दिया है.

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First published: November 11, 2019, 6:07 PM IST
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