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भगवान राम को लेकर BJP सांसद ने भरी सभा में कह दी यह बड़ी बात, मुसलमानों ने भी देना शुरू कर दिया चंदा

राम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए मुस्लिम समाज के लोग भी दान देने में किसी से पीछे नहीं हैं.

राम के भव्य मंदिर निर्माण के लिए मुस्लिम समाज के लोग भी दान देने में किसी से पीछे नहीं हैं.

बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) के मुताबिक हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के पुरखे मर्यादा पुरुषोतम भगवान राम (Lord Rama) ही थे. आज जब हमारे पूर्वज के भव्य मंदिर (Grand Temple) का निर्माण हो रहा है तो क्या इसमें दोनों वर्गों को अपनी भूमिका का निर्वहन दान देकर नहीं करना चाहिए?

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 2, 2021, 12:26 AM IST
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लखनऊ. अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर (Temple of Lord Rama) निर्माण के लिए मुस्लिम समाज (Muslim Society) के लोग भी दान देने में किसी से पीछे नहीं हैं. दरअसल, रविवार को उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के हुजूरपुर में राम मंदिर के निधि समर्पण का एक कार्यक्रम था. इसमें होना यह था कि स्थानीय लोगों ने राम मंदिर निर्माण के लिए जो चंदा एकत्रित किया था, उसे राम मंदिर निर्माण में लगे लोगों को सौंपा जाना था. इसी कार्यक्रम में कैसरगंज से भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लोकसभा सांसद बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Sharan Singh) भी बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने पहुंचे. जब इस कार्यक्रम को उन्होंने संबोधित करना शुरू किया तो उन्होंने कहा, 'आज के कुछ शताब्दी पहले जब विदेशी आक्रांताओं ने हमारे देश पर और हमारे क्षेत्र पर हमले किए तो बड़ी संख्या में हमारे पूर्वजों का धर्मांतरण कराया. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में मुस्लिम समाज के जो लोग हैं और जो हिंदू समाज के लोग हैं, इन दोनों वर्गों के पुरखे मर्यादा पुरुषोतम भगवान राम ही थे. आज जब हमारे पूर्वज के भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है तो क्या इसमें दोनों वर्गों को अपनी भूमिका का निर्वहन दान देकर नहीं करना चाहिए?' यह कहते ही मुस्लिम समाज के 50 से ज्यादा लोगों ने दान देना शुरू कर दिया.

राम मंदिर के निर्माण में मुस्लिम समाज के लोग भी आ रहे हैं आगे
बता दें कि इस सभा में आस-पास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज के लोग आए थे. सातवीं बार लोकसभा सांसद बने बृजभूषण शरण सिंह ने जब कहा कि दोनों समाज के पुरखे एक ही थे. यह कहने भर की देर थी कि मुस्लिम समाज के लोग मंच पर आकर दान देना शुरू कर दिया. कुछ ही मिनटों मुस्लिम समाज के 50 से अधिक लोगों ने अपने आर्थिक सामर्थ्य के हिसाब से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में दान देने का काम किया. इस कार्यक्रम में शामिल लोगों का कहना है कि कार्यक्रम की समाप्ति होने तक ऐसे लोगों की संख्या लगातार बढ़ती गई. मुस्लिम समाज से जिन लोगों ने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए दान दिया, उनमें साद मोहम्मद, नासिर खान, शकील अहमद, इलियास अहमद, मोहम्मद अली, अफजल अहमद और सलीम हैदर जैसे स्थानीय लोग भी शामिल थे. चंद मिनटों में लाखों रुपये राम मंदिर निर्माण में जुट गए.

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बीजेपी सांसद के कहने पर कई मुस्लिमों ने राम मंदिर के लिए दान दिए.




सांसद ने कही थी यह बड़ी बात
जब इस अनूठी पहल के बारे में न्यूज18 ने बृजभूषण शरण सिंह से बात की तो उन्होंने कहा, ‘यह तो एक तथ्य है कि अतीत में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हुए हैं. अयोध्या, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच और श्रावस्ती का जो क्षेत्र है, इस क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर लोगों को धर्मांतरण के लिए मुस्लिम आक्रांताओं ने बाध्य किया. इस क्षेत्र के हिंदू समाज के लोग और उसमें भी क्षत्रिय समाज के लोग तो खास तौर पर खुद को भगवान राम का वंशज मानते ही हैं. लेकिन, जिन लोगों का धर्मांतरण हुआ, वे भी तो हिंदू ही थे और जब वे हिंदू थे तो उनके पूर्वज भी भगवान राम हुए. मैंने इन्हीं बातों को उस कार्यक्रम में कहा था और उसके बाद खुद ही मुस्लिम समाज के लोग एक-एक करके आने लगे और राम मंदिर निर्माण में दान देकर अपनी भी भागीदारी सुनिश्चित करने लगे.’

इस इलाके में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण हुआ था-सांसद
सिंह आगे कहते हैं, ‘इतिहास की पुस्तकों को पढ़ने से यह स्पष्ट तौर पर पता चलता है कि जब विदेशी मुस्लिम शासकों का हमला होता था तो उस वक्त स्थानीय हिंदू समाज के लोगों के सामने तीन ही रास्ते होते थे. पहला तो यह होता था कि लड़ते हुए मर जाएं या अपने शौर्य से बच जाएं. दूसरा होता था कि पलायन कर जाएं. वहीं तीसरा रास्ता यह था कि धर्मांतरण कर लें और जहां रहते हैं, वहां हिंदू की जगह मुसलमान बनकर रहते रहें. जो भी लोग तीसरे रास्ते को चुनने के लिए मजबूर किए गए थे, अगर उनके अतीत में जाएं तो वे तो मूल रूप से हिंदू ही थे. इसलिए ऐसा कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि इस क्षेत्र के हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग एक ही पूर्वज की संताने हैं.’

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अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग एक-दूसरे के आमने-सामने हुआ करते थे.


मुस्लिम समाज के इस पहल का क्या असर होगा?
इसके प्रभाव के बारे में पूछे जाने पर बृजभूषण शरण सिंह कहते हैं, ‘देखिए इतना तो तय है कि इससे सामाजिक समरसता बढ़ेगी. समाज में आपसी भाईचारा बढ़ेगा और कई बार जो अविश्वास का माहौल बनाने की कोशिश कुछ लोगों द्वारा होती है, उस प्रवृत्ति पर रोक लगेगी. मुझे उम्मीद है कि यह पहल सामाजिक समरसता की एक नई लकीर खींचने में कामयाब होगी.’

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गौरतलब है कि वह दौर बहुत पुराना नहीं है जब अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण को लेकर हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग एक-दूसरे के आमने-सामने थे. दोनों धर्मों के लोगों के बीच इस मुद्दे पर संघर्ष सिर्फ अदालतों में नहीं हुआ बल्कि सड़कों पर और सामाजिक स्तर पर भी यह संघर्ष चला. कहना गलत नहीं होगा कि राम मंदिर को लेकर चला विवाद एक तरह से हिंदू-मुस्लिम मतभेदों की एक बड़ी वजह रहा. लेकिन, अब इस इलाके की नहीं पूरे देश की स्थितियां बदल रही हैं.
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