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अयोध्या: रामलला को ठंड से बचाने के लिए लगाया गया ब्लोअर, ओढ़ाई गई रजाई

श्रीराम जन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि भगवान रामलला बाल रूप में विराजमान हैं और ठंड (Cold) से उनको बचाने के लिए समुचित उपाय किए गए हैं.
श्रीराम जन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि भगवान रामलला बाल रूप में विराजमान हैं और ठंड (Cold) से उनको बचाने के लिए समुचित उपाय किए गए हैं.

श्रीराम जन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि भगवान रामलला बाल रूप में विराजमान हैं और ठंड (Cold) से उनको बचाने के लिए समुचित उपाय किए गए हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 13, 2020, 4:08 PM IST
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अयोध्या. रामनगरी अयोध्या (Ayodhya) में रामलला को ठंड (Cold) से बचाने के लिए तरह-तरह के जतन किए जा रहे हैं. रामलला के दरबार में ब्लोअर लगाया गया है. मंदिरों में भगवान को ऊनी वस्त्र, रजाई व कंबल ओढ़ाया जा रहा है तो कहीं गर्भगृह में ब्लोअर के जरिए भगवान को ठंड से बचाने के उपाए किए जा रहे हैं. भगवान के भोग, शृंगार-आरती में भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है. भगवान के जागरण व शयन का समय भी मौसम के अनुरूप बदल गया है.

ब्लोअर 24 घंटे भगवान रामलला के पास चलता है. जिससे गर्भ ग्रह गर्म रहे और भगवान को ठंड का एहसास ना हो. रामलला को सुबह पुष्प से ही स्नान कराया जा रहा है. श्रीराम जन्मभूमि के पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास बताते हैं कि भगवान रामलला बाल रूप में विराजमान हैं और ठंड से उनको बचाने के लिए समुचित उपाय किए गए हैं. साथ ही विशेष तरीके की राग भोग भी दिया जा रहा है. साथ ही इत्र का लेप भी किया जाता है. पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास के मुताबिक गर्म हवा देने वाली मशीन भी लगी है. रामलाल का भोग भी मौसम के हिसाब से लगाया जाता है.

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बताते चलें कि 1992 के बाद से रामलला के परिसर में तमाम पाबंदियों थी रामलला की व्यवस्था है. केंद्र सरकार के अधीन थी जिसमें भगवान को ठंड से बचने के लिए मात्र कुछ गर्म कपड़े और रजाई ही एकमात्र संसाधन था. त्रिपाल में बैठे रामलला को ठंड से बचाने के लिए समय-समय पर पुजारियों के द्वारा तत्कालीन राम जन्म भूमि के रिसीवर से संसाधनों की मांग की जाती थी. लेकिन उसके बाद भी ठंड से बचने के उपाय रामलला को नहीं मिल पाते थे.
जब से राम मंदिर के पक्ष में फैसला आया है रामलला की व्यवस्थाएं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधीन हो गया है. अब रामलला के भोग और रखरखाव की व्यवस्था पर पुजारियों ने संतोष व्यक्त किया है. वहीं पिछले वर्षो की अपेक्षा बहुत ही अच्छी है. और आवश्यकता होने पर ट्रस्ट को सूचित किया जाता है और ट्रस्ट उसे तत्काल उपलब्ध कराता है.
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